Trending

Samaydhara Exclusive दिल्ली : ई-रिक्शावालों से चालान की आड़ में जबरन पैसा वसूली

Delhi E Rickshaw से आई आवाज, न करो हमें अब नजरअंदाज

नई दिल्ली, 29 अक्टूबर : ई-रिक्शावालों ने 27 अक्टूबर कालकाजी, डीडीए फ्लैट्स, मच्छी मार्केट क्षेत्र में तकरीबन

दोपहर 2 बजे ट्रैफिक पुलिस की जबरन वसूली के गोरखधंधे के खिलाफ आवाज उठाई।

इन लोगों का आरोप है कि इनसे पुलिसवाले चालान की आड़ में पैसों की जबरन वसूली करते है

और इनकी ई-रिक्शा को जानबूझकर प्रतिबंधित रहित क्षेत्र से उठाकर चालान काटते है

और रसीद में चालान की फर्जी वजह प्रतिबंधित क्षेत्र लिखी जाती है और फिर इनसे रूपयों की उगाही की जाती है।

ई रिक्शा एसोसिएशन,कालकाजी क्षेत्र के प्रेजिडेंट हनीफ शेख ने अपनी यूनियन की समस्याओं को

उजागर करने के लिए समयधारा से संपर्क किया और जब हमारे संवाददाता मौके पर पहुंचे तो

उन्हें अपने खिलाफ हो रही ज्यादतियों और तकलीफों के बारे में बताया।

27 अक्टूबर 2018, शुक्रवार को  इन ई-रिक्शावालों ने हड़ताल की

और अपनी हड़ताल का कारण बताया- दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की इनसे जबरन वसूली l

समयधारा ने जब इन ई-रिक्शावालों से बात की तो उन्होंने बताया कि हमारे साथ बहुत नाइंसाफी हो रही है

और इन लोगों से बातचीत करने के बाद समयधारा ने अपना पत्रकारिता धर्म निभाते हुए

इनकी समस्याएं और इनके हालात जनता व सरकार के नुमाइंदों तक पहुंचाने की एक कोशिश की है।

ई-रिक्शावालों का क्या है मुद्दा?

गौरतलब है कि दिल्ली में ई-रिक्शा चलाने के लिए कुछ क्षेत्रों में प्रतिबंध है

और इन ई-रिक्शावालों का कहना है कि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस इसी बात का नाजायज फायदा उठाकर

इन लोगों से जबरन वसूली चालान की आड़ में कर रही है।

ये ई-रिक्शावाले ट्रैफिक पुलिस की पैसा उगाही से त्रस्त है।

इन लोगों के लगाएं आरोपों में कितनी सच्चाई है ये तो संबंधित अधिकारियों द्वारा जांच के बाद ही पता चलेगा

लेकिन हमारे समक्ष जो सबूत पेश किए गए उसी के आधार पर पेश है इनसे बातचीत के अंश और ये एक्सक्लूसिव रिपोर्ट:

ई-रिक्शावालों की कई समस्या है जिनको लेकर इन्होंने 27 अक्टूबर 2018 को कालकाजी क्षेत्र,

मच्छी मार्केट में एक तरह का आंदोलन किया और अपनी समस्याओं को जनता से व सरकार से अवगत कराने की सोची l

सबसे पहले इनकी समस्या है ट्रैफिक पुलिस वाले इनका आये दिन 400 रुपये का चालान करते है l

आखिर यह 400 रुपये का चालान है क्या ..? और क्यों काटा जाता है?

यह चालान ई-रिक्शावालों पर इसलिए काटा जाता है क्योंकि वह अपना ई-रिक्शा प्रतिबंधित क्षेत्र में चलाते है l

मतलब जहां की उनको परमिशन नहीं होती है वहां ई-रिक्शा चलाने पर ट्रैफिक पुलिस उनका चालान काटती है l

अब जब हमने ई-रिक्शावालों से बात की तो उनका कहना था कि ट्रैफिक पुलिस वाले

खुद जानबूझकर उनको परेशान करते है और कहीं भी उन्हें रोककर पैसों की डिमांड करते है l

न देने पर 400 रूपये की रसीद काटते है पर इन पुलिस वालों का एक कोटा होता है की कम से कम

रोज के चार ई-रिक्शा को ट्रोल किया जाए। उन्हें थाने में लाकर बंद किया जाए l

इसके चलते पुलिस वाले रोज कम से कम चार ई-रिक्शा पकड़ते है और उन्हें थाने में बंद कर देते है l

अब इन ई-रिक्शा को कम से कम बाहर आते-आते 15 दिन लग जाते है l

इतना ही नहीं, अपनी ई-रिक्शा को छुड़वाने और खुद को पुलिस से बचाने के लिए इन ई-रिक्शावालों को

अपनी जेब से 1500 से 2500-3000 के करीब रुपया खर्च करना पड़ता है।

दूसरे शब्दों में कहें, तो इनसे पैसों की उगाही का एक गोरखधंधा पुलिस ने चालू कर रखा है।

ऐसा नहीं है कि पुलिस वालों को कथित रुपया खिलाने पर इन्हें अपना ई-रिक्शा सही-सलामत मिल जाता है

बल्कि बकौल ई-रिक्शावाले, अपनी जेब काटकर जो पैसा ये पुलिसवालों को देते है,

उसकी एवज में जब इन्हें इनका ई-रिक्शा वापस दिया जाता है तो कई बार उसके टायर बदल दिए गए होते है,

कभी बैटरी और कभी कोई सा पार्ट इनकी रोजी-रोटी के वाहन से चुरा लिया गया होता है या बदल दिया गया होता है।

इनका दुख ये है कि खुद कानून के रक्षक जब इनके भक्षक बने हुए है तो ये

किसे जाकर अपना दुखड़ा सुनाएं और किससे शिकायत करें?

इसलिए ई-रिक्शावालों को आखिर में उम्मीद की एक किरण मीडिया दिखी

और उन्होंने सोचा कि शायद इस दीवाली अगर सच में उन्हें अपने परिवार को रोशन करना है तो

अपना अपने दुखों का अंधेरा सबसे पहले जनता और सरकार के बीच की कड़ी मीडिया तक पहुंचाना होगा

ताकि संबंधित लोग इस बाबत कोई कार्रवाई कर सकें और जनता के प्रतिनिधि

इनके पास खुद आकर इनकी समस्याएं सुन  सकें। इसके लिए ई-रिक्शा, कालकाजी,

डीडीए फ्लैट्स क्षेत्र के प्रेजिडेंट हनीफ शेख ने अपनी समस्याएं सरकार में बैठे नुमाइंदों

तक पहुंचाने हेतु समयधारा से संपर्क किया तो हमने भी मौके से पहुंचकर इन लोगों की

समस्याओं को सुना और जनता व सरकार के कानों तक पहुंचाने की एक छोटी सी कोशिशभर की है।

ई-रिक्शा एसोसिएशन , कालकाजी क्षेत्र, के प्रेजिडेंट हनीफ शेख ने कहा कि “प्रधानमंत्री मोदी यूं तो बड़ी-बड़ी बातें करते है।

गरीबी कम करने और गरीबों का भला करने के दावे करते है।

उज्जवल भारत बनाने के सपने हम गरीबों को दिखाते है लेकिन फिर इसके उलट वे हम गरीबों को क्यों मार रहे है?

जब भी हम ई-रिक्शावालों के भाई-बंध कुछ भी गलत कदम उठाते है तो आप सब लोग उन्हें दोष देते है

लेकिन जब हम ई-रिक्शावालों के साथ इतना गलत हो रहा है तो कोई क्यों नहीं हमारी आवाज सुन रहा।

एक ई-रिक्शा की कीमत सिर्फ 1.60 लाख के करीब है लेकिन हम गरीबों तक पहुंचते-पहुंचते उसी ई-रिक्शा की

कीमत 3 से 3.50 लाख रुपये के तकरीबन हो जाती है।

इतने पर भी, जब हम गरीब ई-रिक्शावाले किस्ते समय पर अदा नहीं कर पाते तो फाइनेंस कंपनी वाले

इन ई-रिक्शा को उठा ले जाते है और तभी ई-रिक्शावाले गलत कदम उठाने को मजबूर हो जाते है।

पैसों की उगाही, किस्ते समय पर न दे पाना और सरकार की हमारी समस्याओं के प्रति उदासीनता

हमारे भाई-बंधुओं को गलत रास्ते पर धकेल रही है। हमारे जैसे ही कई ई-रिक्शावाले इसी कारण जुआ खेलने,

शराब पीने और अपनी पत्नी के साथ मारपीट करने सरीखे गलत काम करने लगते है

क्योंकि ट्रैफिक पुलिस इनकी मेहनत का जो सारा पैसा चालान के रुप में काट लेते है,

उसका गुस्सा और मजबूरी इनके अंदर की इंसानियत को मारकर एक जानवर बनने को मजबूर कर रही है।

इसपर समयधारा ने उनसे पूछा कि आप प्रतिबंधित क्षेत्र में गाड़िया लेकर ही क्यों जाते है

आप भी तो गलत करते है? इस पर उनका जवाब था कि “ट्रैफिक पुलिस खुद हमें नॉन प्रतिबंधित क्षेत्र से पकड़ती है

लेकिन चालान में प्रतिबंधित क्षेत्र का नाम डाल देती है और जब हम इस बाबत उनसे सवाल पूछते है तो

हमें डराया-धमकाया जाता है और कानून व पुलिस का रौब दिखाया जाता है।

इतना ही नहीं, हमारा चालान सिर्फ और सिर्फ 100 रुपये काटना चाहिए लेकिन एक ही गलती के लिए किसी

ई-रिक्शावाले से 100 रुपये तो किसी से 300,400 रुपये वसूले जाते है।

गलती भी वो जो हम जानबूझकर नहीं करते। अगर कानून के दायरे में सबकुछ हो रहा है तो एक ही गलती के लिए

किसी का 100, किसी का 200, 300 और किसी का 400 रुपये तक का चालान कैसे काट लिया जाता है?

अपनी बात को सच साबित करने के लिए इन ई-रिक्शावालों ने हमें कई रसीदें भी बतौर सबूत दिखाई।

आप भी देंखे कैसे चालान की आड़ में पैसा उगाही का गोरखधंधा ट्रैफिक पुलिस द्वारा चलाया जा रहा है।

हम यहाँ चालान की कुछ रसीदें आपको दिखायेंगे और कुछ वीडियो द्वारा भी हम आपको समझायेंगे l

E - RICKSHAW CHALAN
ई-रिक्शा चालान

ई-रिक्शावाले आगे बताते है कि इसमें से केवल 100रुपये ही सरकार के खाते में जाते है

बाकी के 300 रुपये कहां,किसके खाते में, किसके पास जाते है, ये किसी को नहीं पता।

ई-रिक्शा, कालकाजी क्षेत्र, प्रेजिडेंट हनीफ शेख ने पुलिस की कथित ज्यादतियों से तंग

आकर इसके खिलाफ आवाज उठाने की मुहिम शुरू की है। इसके लिए उन्होंने 400 रुपये के जबरन चालान की आड़ में

वसूली का धंधा पनपने की न केवल पोल खोली बल्कि ये भी बताया कि कैसे

इन ई-रिक्शावालों को गलत करने पर मजबूर किया जा रहा है और उन्हें

एक जिम्मेदार नागरिक न बनने देकर एक अपराध के रास्ते पर धकेला जा रहा है।

अपनी बात को जारी रखते हुए हनीफ शेख ने आगे कहा कि

“पुलिस वाले प्रतिबंधित रहित क्षेत्र से गाड़ियां उठाते है और उन्हें जानबूझकर प्रतिबंधित क्षेत्र में ले जाते है

और फिर 2000 – 2500 से लेकर 5000 तक का जुर्माना लगा देते है l

हमारे पास इस बात का भी प्रूफ है कि यह उन ड्राईवरों से 2500-2500 रुपया वसूलते है

जो कानून को जानते तक नहीं है।

आगे हनीफ शेख इस वसूले के गोरखधंधे पर सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताते है कि

पुलिस वाले गाडियों को 66 में उठाते है(66-मतलब लावारिस गाड़ी)।

इन गाड़ियों में ड्राइवर होने के बावजूद भी इन्हें लावारिस बताकर उठाया जाता है।

वे धारा 66 के तहत इन गाड़ियों को उठाकर अपने थाने में ले जाते है।

अब जब पीड़ित अपनी गाड़ी छुड़ाने आता है तो उसे रोज-रोज अपनी गाड़ी (ई-रिक्शा) छुड़ाने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है

औऱ 10 से 15 दिन तक उनकी गाड़ियां उन्हें नहीं मिलती और दी गई मियाद के बाद

जब इन गाड़ियों को वापस देने की बात आती है तो इन लोगों को इनकी ई-रिक्शा में

कोई न कोई खामी बताकर 1000,1500,2000 की जबरन वसूली की जाती है,

जिसकी इन्हें कोई रसीद भी नहीं दी जाती और फिर इन्हें गेट पास दिया जाता है।

दूसरे शब्दों में कहें तो, इस गेटपास की एवज में ही इन ई-रिक्शावालों से 1000,1500,2000 रुपये की वसूली की जाती है।

अब जैसे तैसे ले-देकर गेट पास जब मिलती है तो जहां गाड़ी खड़ी होती है

वहां पर भी जब तक 500 रुपये नहीं दो तब तक आपकी गाड़ी बाहर नहीं निकलती l”

अपनी बात को आगे जारी रखते हुए हनीफ शेख बताते है कि “गाड़ी निकलने के बाद भी

इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि जो गाड़ी आपको दी गई है, उसके टायर उसी के है या नहीं क्योंकि

अक्सर जो गाड़ियां इतनी वसूली के बाद हमारे भाई-बंधुओं को सौंपी जाती है

उनकी कभी बैटरी, कभी टायर तो कभी कोई सा पार्ट बदल दिया गया होता है।

कानून के रखवालों द्वारा प्रताड़ित होने का आक्रोश ये ई-रिक्शावाले खुद की पत्नी,

बच्चों पर निकालते है और कोई दारुबाज बन जाता है तो कोई जुआं खेलने का आदी हो जाता है

क्योंकि पैसा कमाने और चुकाने का इन्हें ये ही रास्ता दिखने लगता है।

एक ओर पुलिसावालों को चालान की आड़ में पैसा उगाही का वसूली धंधा, दूसरी ओर फाइनेंस कंपनी को समय पर

किश्ते न चुका पाने का डर, तीसरी ओर बीवी का मंगलसूत्र  बेचकर या उधार से अपने परिवार का पोषण करना…

हम ई-रिक्शावालों के हालात दिन पर  दिन बदत्तर करता जा रहा है।

हमें अपराध के रास्ते पर जबरन डालने की कोशिश इन पुलिसवालों और सरकार की बेरुखी से हो रही है।

हमारी समस्याओं और तकलीफों पर कोई ध्यान नहीं दे रहा।

ऐसा नहीं है कि सारे ई-रिक्शावाले अनपढ़ ही है बल्कि कई पढ़े-लिखे लोग भी आज ई-रिक्शा चला रहे है।

ऐसे ही एक शिक्षित ई-रिक्शावाले से जब हमने उनके हालात जानना चाहा तो उन्होंने बताया कि वो तो

निगम पार्षद का चुनाव भी लड़ चुका है और वो भी दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की कथित ज्यादतियों से परेशान है।

अपनी बातों को अपनी परेशानियों को सरकार व लोगों तक रखने के लिए ई-रिक्शा वालों ने एक हस्ताक्षर

अभियान भी चलाया और लगभग 200 से 250 ई-रिक्शा चालकों ने कागजों पर हस्ताक्षर कर अपना विरोध दर्ज कराया l 

E-RICKSHAW DRIVERS SIGNATURE
ई-रिक्शा चालाक हस्ताक्षर

समयधारा ने समाज के इस उदासीन तबके की समस्याओं को उजागर करने की एक छोटी सी पहल की है

और बतौर जिम्मेदार न्यूज वेबसाइट हमारी कोशिश है कि समयधारा की ये एक्सक्लूसिव रिपोर्ट संबंधित

अधिकारियों और सरकार में बैठे जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाई जा सकें ताकि दिल्ली को सुरक्षित राज्य बनाया जा सकें।

समयधारा मानती है कि असंतोष, अन्याय से ही अपराध का जन्म होता है

और उम्मीद की किरण,साकारात्मक कदम व बातचीत किसी भी तबके को अपराधी होने से रोक सकती है। 

Tags

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error:
Close