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आयकर विभाग के रिकॉर्ड में है पीएम मोदी ने सहारा, बिड़ला से 40 करोड़ की घूस ली: राहुल गांधी

(Photo: IANS)

मेहसाणा (गुजरात), 22दिसम्बर:  कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि गुजरात का मुख्यमंत्री रहने के दौरान उन्होंने कॉरपोरेट घरानों से 40 करोड़ रुपये की रिश्वत ली थी। उन्होंने इस आरोप की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह लोगों का ध्यान अगुस्ता वेस्टलैंड घोटाले की जांच से हटाने की कोशिश है, जिसमें कांग्रेस नेताओं तथा ‘परिवार’ का नाम सामने आ रहा है।

वहीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मामले की सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग की।

राहुल ने उत्तरी गुजरात में मोदी के गृह जिले मेहसाणा में एक रैली के दौरान कहा, “यह आयकर विभाग के रिकॉर्ड में है कि मोदी ने साल 2013-14 के दौरान सहारा ग्रुप (सात बार पांच करोड़ रुपये तथा दो बार 2.5 करोड़ रुपये) से छह महीनों में नौ किश्तों में रकम ली।”

मोदी द्वारा कथित तौर पर रिश्वत लेने की तारीख का खुलासा करते हुए उन्होंने कहा, “सहारा समूह की डायरी के ये रिकॉर्ड आयकर विभाग के पास बीते ढाई साल से हैं और विभाग ने इसकी जांच की सिफारिश की थी।”

राहुल ने कहा, “फिर, इतने समय से जांच क्यों नहीं कराई गई।”

राहुल गांधी ने कहा, “नरेंद्र मोदी जी, हमें बताइए कि यह आरोप सच्चा है या झूठा? इसकी स्वतंत्र जांच कराइए और पाक साफ होकर आइए। आपने पूरे देश को कई दिनों से कतार में ला खड़ा किया है। अब सच्चाई बयान कीजिए।”

उन्होंने कहा, “यह एकमात्र मामला नहीं है। आयकर विभाग के पास बिड़ला समूह का भी रिकॉर्ड है। इसमें लिखा है ‘गुजरात के मुख्यमंत्री को 25 करोड़ रुपये, 12 करोड़ रुपये दिए, बाकी?’।”

राहुल ने कहा, “मोदी जी अब देश को बताइए कि क्या यह सच है। आपको आयकर विभाग के इन रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच का आदेश देना चाहिए।”

राहुल गांधी के मुताबिक, रिश्वतखोरी का यह मामला आयकर विभाग द्वारा 22 नवंबर, 2014 को सहारा कंपनी में छापेमारी के दौरान जब्त रिकॉर्ड से हुआ।

राहुल गांधी ने कहा कि एंट्री से पता चलता है कि 30 अक्टूबर, 2013 को मोदी को 2.50 करोड़ रुपये, 12 नवंबर को मोदी को पांच करोड़ रुपये, 27 नवंबर को मोदी को 2.5 करोड़ रुपये तथा 29 नवंबर को मोदी को पांच करोड़ रुपये की रकम दी गई।

राहुल ने कहा, “आपने संसद में मुझे बोलने की अनुमति नहीं दी। आप संसद में हमारे सामने खड़े होने को तैयार नहीं थे। मालूम नहीं, क्या कारण था।”

राहुल ने जो आरोप लगाए हैं, इन्हें ही पहले वकील प्रशांत भूषण सर्वोच्च न्यायालय में ले गए थे।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी सार्वजनिक रैलियों में यही आरोप लगाते रहे हैं और उन्होंने अब राहुल के भाषण के बाद आरोपों की सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग की है।

उन्होंने मोदी से कहा कि वह आरोपों से बरी होने तक अपने पद से इस्तीफा दे दें, जैसा भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने 1996 में हवाला में नाम आने के बाद किया था।

केजरीवाल ने संवाददाताओं से कहा कि सर्वोच्च न्यायालय को मामले पर स्वत: संज्ञान लेना चाहिए और मोदी के खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए पूरी तरह ‘स्वतंत्र’ एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन करना चाहिए। उन्होंने संवाददाताओं को इस संबंध में कुछ दस्तावेज दिखाए और उन्हें आयकर विभाग का बताया।

कांग्रेस के भ्रष्टाचार से लड़ने का वादा कर 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी के नेतृत्व में भाजपा के सत्ता में आने की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “देश के साथ विश्वासघात किया गया है।”

उन्होंने कहा, “वे (भाजपा) कांग्रेस से भी ज्यादा भ्रष्ट हो गए हैं।”

राहुल गांधी के आरोपों के कुछ घंटे बाद केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने नई दिल्ली में कहा, “मैं राहुल गांधी के शर्मनाक व निराधार आरोप की निंदा करता हूं। लोग कभी इसमें विश्वास नहीं करेंगे। हमारे प्रधानमंत्री गंगा की तरह पवित्र हैं।”

भाजपा के संवाददाता सम्मेलन के कुछ घंटे बाद कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा बौखला गई है और उन्होंने इस बात का जवाब नहीं दिया कि मोदी ने रिश्वत ली थी या नहीं।

उन्होंने इसकी जांच की मांग की। लेकिन उन्होंने कहा, “केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) प्रधानमंत्री के खिलाफ जांच नहीं कर सकता।”

प्रधानमंत्री का सीधे तौर पर इस्तीफा न मांगते हुए सुरजेवाला ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का उदाहरण दिया, जिन्होंने लाभ के पद के मुद्दे पर साल 2006 में इस्तीफा दे दिया था।

–आईएएनएस

 

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समय धारा

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