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सी॰बी॰आई॰ की सी॰बी॰आई॰ जांच

आज लोगों में झूठ इस कदर बस चुका है कि सच्चाई को झूठ से अलग कर पाना आम आदमी तो क्या सी॰बी॰आई॰ के आला अफसरों के लिए भी टेढ़ी खीर हो गया है। अनेक बड़े अधिकारी भ्रष्टाचार के आरोपी हैं। कुछ पर आरोप साबित हो जाते हैं और कुछ आरोपी झूठी दलीलें खड़ी करके खुद को बचा लेते हैं। कुछ ऐसे भी होते हैं जो झूठे आरोपों के घेरे मे फंस जाते हैं। भले ही भ्रष्ट अधिकारी बच निकले या सीधा-साधा अफसर गुनहगार साबित हो जाए, नतीजा यही होता है की लोगों का न्याय पर से विश्वास हटने लगता है। न्याय के ठेकेदार कभी सच्चाई उगलवाने तो कभी झूठ को सच बनाने लिए ऐसे हथकंडे अपनाते हैं कि इंसानियत शर्मसार हो उठती है।

राजधानी दिल्ली इन दिनों ऐसी शर्मनाक घटनाओं का डेरा बन गई है। मंगलवार दिनांक 27 सितम्बर,  2016 को दिल्ली के पूर्व डी॰जी॰-बी॰के॰बंसल एवं उनके बेटे योगेश बंसल ने अपने घर में फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली। घर में काम करने वाली बाई ने जब सुबह घर का दरवाजा खुला देखकर घर में प्रवेश किया तो पंखे से लटकती योगेश बंसल और बी॰के॰बंसल की लाश देखकर चीख पड़ी। घबराई हुई कामवाली ने घटना की जानकारी सोसाइटी गार्ड को दी। इसे एक आत्महत्या का केस कहकर घटना को भुला दिया जाता लेकिन इससे पहले ही (26 सितम्बर,16) बी॰ के॰ बंसल ने इस आत्महत्या के कारणों के बारे में एक सुसाइड नोट लिखकर कई न्यूज़ चैनल वालों को भेज दिया था, जो इस घटना के अगले दिन समाचार चैनलों तक पहुंचा, जिसमें साफ तौर पर उन्होने सी॰बी॰आई॰ के बड़े अधिकारियों को इस आत्महत्या का जिम्मेदार ठहराया है। बी॰के॰बंसल और उनके बेटे योगेश बंसल ने अलग-अलग सुसाइड नोट में डी॰आई॰जी संजीव गौतम के अलावा महिला एस॰पी॰, डी॰एस॰पी॰ और एक हैड कांस्टेबल के ऊपर अपने परिवार को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।

गौरतलब है कि सी॰बी॰आई॰ ने उन्हें 18 जुलाई,2016 को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था, जिसके अगले दिन (19 जुलाई को) उनकी पत्नी और बेटी ने आत्महत्या कर ली थी। सुसाइड नोट में बी॰के॰बंसल ने लिखा है कि उन्होने डी॰आई॰जी को फोन पर ये कहते हुए सुना था कि इसकी बीवी और बेटी को इतना प्रताड़ित करो कि वो अधमरी हो जाएँ। बाद में बी॰के॰बंसल ने अपने पड़ोसियों से इस बात की पुष्टि भी की, कि महिला एस॰पी॰, डी॰एस॰पी॰, जांच अधिकारी और एक हैड कांस्टेबल ने उन्हें बुरी तरह प्रताड़ित किया। उन पर नाखून गड़ाए, मारपीट और अभद्र भाषा का प्रयोग किया और रात भर उन्हें अपमानजनक तरीके से यातनाएं दीं। इस घटना की जानकारी बी॰के॰बंसल की पत्नी ने अपने पड़ोसियों को दी थी और उसके बाद दोनों माँ-बेटी ने आत्महत्या कर ली थी। बी॰के॰बंसल का आरोप है कि यदि मेरी गलती थी भी, तो भी मेरी पत्नी और बेटी को इस कदर प्रताड़ित करना कि वो आत्महत्या पर मजबूर हो जाएँ, उनकी आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या मानी जानी चाहिए।

पूरा बंसल परिवार आज आत्महत्या कर चुका है लेकिन मरने से पहले बी॰के॰बंसल ने सी॰बी॰आई॰ पर जो आरोप लगाए वो बेबुनियाद नहीं हैं। मामला बेहद संगीन है क्योंकि न्याय करने वालों पर ही आरोप लगा है, पूरी घटना की जांच कराये जाने के आदेश दिये गए हैं, लेकिन अब देखना ये है कि सी॰बी॰आई॰ की सी॰बी॰आई॰ जांच कितनी कारगार साबित होती है।

 

भावना गौर

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