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73rd Independence Day 2019: भारत के 73वें स्वतंत्रता दिवस पर जानें ये 11 रोचक-अनजानी बातें

भारत का राष्ट्रीय ध्वज 15 अगस्त 1947 को फहराया गया था,लेकिन यह पूरी तरह सच नही है...

नई दिल्ली, 15 अगस्त: Indian Independence 11 unknown interesting facts-

आज भारत अपना 73वां स्वतंत्रता दिवस (73rd Independence Day 2019) धूमधाम से मना रहा है।

15 अगस्त 1947 को भारत अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ था और पूरे विश्व के सामने एक आत्मनिर्भर,

स्वतंत्र लोकतंत्र की नींव भारत के रूप में रखी गई। आज भारत के स्वतंत्रता दिवस

(India Independence Day)पर ट्विटर पर हैशटैग #IndependenceDayIndia टॉप पर ट्रेंड हो रहा है।

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स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं

विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए आजादी पाना मात्र सपना ही रह जाता अगर असंख्य लोगों ने

इस आजादी के लिए अपनी जान की कुर्बानी न दी होती।

इतिहास में अनगिनत,असंख्य ऐसे शहीद है जिन्हें देश आज भी भले ही नाम से न जानता हो

लेकिन आजादी की लड़ाई लड़ने में उन शहीदों ने अपना सर्वस्व केवल देश पर न्यौछावर कर दिया।

स्वतंत्रता दिवस की 73वीं वर्षगाठ (73rd Independence Day 2019) को सभी भारतवासी सही मायनों में तभी मनायेंगे।

जब हम लोग देश के संविधान की मूलभावना के अनुकूल मिल-जुलकर, स्वार्थ, नफरत, अंधविश्वास त्यागकर,

 धर्म-जाति,लिंग-भेद मिटाकर केवल और केवल स्वंय को एक ‘भारतीय’ के रूप में स्वीकार करना शुरू कर देंगे।

चूंकि हमें आजादी दिलाने और गुलामी की बेड़ियों से मुक्ति दिलाने के लिए असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों ने खुद को शहीद किया है।

आज भारत के 73वें स्वतंत्रता दिवस (73rd Independence Day 2019) पर जानते है

कुछ ऐसे रोचक और अनजाने पहलू जो  भारत की आजादी से जुड़े है:

Indian Independence 10 unknown interesting facts:

 

1.राष्ट्रीय गान- आपको जानकर संभवत: यकीन नहीं होगा लेकिन यह सच है कि रबींद्रनाथ टैगोर द्वारा तैयार किया गया भारतीय राष्ट्रगान किंग जॉर्ज पंचम को श्रद्धांजलि देने के लिए था!

जी हां यह सही है! हैरत हुई न? जन-गण-मन को भारतीय राष्ट्रगान के रूप में आधिकारिक तौर पर 1950 में अपनाया गया था।

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2.राष्ट्रीय ध्वज- हम सभी यह तो जानते है कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज 15 अगस्त 1947 को फहराया गया था,लेकिन अगर हम कहें कि यह पूरी तरह सच नही है तो इस पर भी आपको यकीन नहीं होगा।

हमारा राष्ट्रीय ध्वज सबसे पहले 7 अगस्त 1906 को कलकत्ता (वर्तमान में कोलकाता) के पार्सी बागान स्क्वेयर (ग्रीन पार्क) में फहराया गया था।

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3. जवाहर लाल नेहरू देश के पहले निर्वाचित प्रधानमंत्री नहीं थे- जी हां, सुनकर बहुत हैरत होगी लेकिन इतिहास

के झरोखों से पता चला है कि भारत के पहले प्रधानमंत्री के तौर पर जवाहर लाल नेहरू को

नहीं बल्कि सरदार वल्लभ भाई पटेल को निर्वाचित किया गया था।

आजादी मिलते ही जब देश के पहले प्रधानमंत्री के लिए नाम का चुनाव किया गया तो सरदार वल्लभ भाई पटेल

ने प्रधानमंत्री पद का चुनाव जीता लेकिन नेहरू दूसरे नंबर का स्थान नहीं चाहते थे

और गांधी जी भी सरदार वल्लभ भाई पटेल से ज्यादा नेहरू जी के हाथ में देश की कमान सौंपना पसंद करते थे

इसलिए अंतत: जवाहर लाल नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री बने।

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4.भारत की प्रेरणादायक आत्मा- भगत सिंह कई अलग-अलग भाषाओं जैसे कि फ्रेंच, स्वीडिश, अंग्रेजी, अरबी,

हिंदी और पंजाबी में बहुत धाराप्रवाह थे और सिर्फ इतना ही नहीं, वे एक उच्च श्रेणी के पाठक भी थे।

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5.  भारतीय ध्वज के निर्माता- हमारे राष्ट्रीय ध्वज के विभिन्न रूपांतर है और अक्सर यह कल्पना की जाती है

कि महात्मा गांधी थे जिन्होंने भारत के राष्ट्रीय ध्वज को डिजाइन किया था लेकिन वास्तव में,

इसका विचार एक स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया के द्वारा लाया गया था!

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6. जवाहरलाल नेहरू -ट्रेंड सेटर: उस समय यह एक गजब की बात थी। भारत के पहले

प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को वोग मैगज़ीन में उनका पारंपरिक कोट पहने हुए

चित्रित किया गया था और इसलिए उनकी ‘जवाहर जैकेट’ पश्चिम में एक फैशन ट्रेंड बन गई।

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7. भारत-शांतिप्रिय देश- आपको भारत के विषय में ये जानकर गर्व होगा कि भारत एक शांतिप्रिय देश रहा है।

निश्चित रूप से, इतिहास इसके बारे में बोलता है! भारत ने अपने पिछले 1,00,000 वर्षों के इतिहास

में कभी किसी देश पर आक्रमण नहीं किया।

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8. भारत (India)- नाम- भारत को सिंधु नदी से अपना नाम मिला है, जिसे अंग्रेजी में Indus भी कहते है। सिंधु नदी सिंधु घाटी सभ्यता का घर था,

और इसे पहली सभ्यताओं में से एक माना जाता है। दूसरी ओर, संस्कृत में हमारे देश का नाम भारतीय गणराज्य है।

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9.15 अगस्त 1947 ही भारत की आजादी के लिए क्यों चुना गया- ब्रिटिश साम्राज्य के अंतिम वाइसरॉय लॉर्ड माउंटबेटन ने आखिरकार भारत को स्वतंत्र करने का निर्णय ले लिया था

लेकिन जब बात तिथि निर्धारित करने की आई तो वे थोड़े सकपका गए चूंकि उन्होंने

फिलहाल कुछ नहीं सोचा था कि कौन सी तिथि को वे भारत को पूर्ण स्वतंत्रता देंगे। इस बारे में प्रख्यात इतिहासकार

डॉमिनिक लैपियर और लैरी कॉलिन्स ने अपनी बुक ‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ में लिखा हैं कि जब

एक भारतीय संवाददाता ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में माउंटबेटन से पूछा कि वे कौन सी तिथि पर भारत को आजाद करेंगे

तो उस टाइम माउंटबेटन के मस्तिष्क में कई तिथियां चल रही थीं… सितंबर के शुरू में… सितंबर के बीच में..

अगस्त के बीच में या कुछ और…?’ और फिर यकायक माउंटबेटन ने कहा कि भारत को स्वतंत्रता की चाबी

15 अगस्त 1947 को सौंप दी जाएगी। माउंटबेटन ने इस तिथि को एक खास वजह से चुना था।

असल में 15 अगस्त से माउंटबेटन का एक गौरवशाली इतिहास जुड़ा है और वो चाहता था कि

भारत की आजादी के साथ इतिहास उसके इस गौरवाशाली स्मृति को याद रखें।

15 अगस्त के दिन ही जापानी साम्राज्य ने बिना किसी शर्त के आत्मसमर्पण कर दिया था और

यह जापान के आत्मसमर्पण की दूसरी वर्षगाठ थी। माउंटबेटन के लिए इससे बेहतर तिथि और भला क्या हो सकती थी।

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10.पाकिस्तान ने अपने स्वतंत्रता दिवस की तारीख बदलकर 14 अगस्त की थी- भले ही पाकिस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस 14 अगस्त को मनाता है

लेकिन तकनीकी रूप से पाकिस्तान को भी आजादी भारत के स्वतंत्रता दिवस के दिन ही मिली थी। दरअसल,

भारत स्वतंत्रता अधिनियम कहा गया है कि “अगस्त के पंद्रहवें दिन से, उन्नीस सौ सैंतालीस के रूप में,

भारत में दो स्वतंत्र डोमिनियन स्थापित किए जाएंगे, जिन्हें क्रमशः भारत और पाकिस्तान के रूप में जाना जाएगा”।

असल में, पाकिस्तान द्वारा छापे गए पहले डाक टिकट पर स्वतंत्रता की तारीख “15 अगस्त 1947” थी।

हालांकि, बाद में पाकिस्तान ने, इस तारीख को बदलकर 14 अगस्त 1948 कर दिया गया।

कुछ लोगों का मानना ​​है कि माउंटबेटन ने 14 अगस्त, 1947 को कराची में किंग द्वारा आजादी का संदेश दिया था।

वहीं, कई अन्य लोगों का कहना है कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि 14 अगस्त 1948 बेहद पवित्र था।

इस्लाम (यह रमजान का 27 वां दिन था)। या हो सकता है, पाकिस्तान भारत से एक दिन पहले अपना जन्म बनाना चाहता था।

जो भी कारण है, यह एक भयावह स्थिति की ओर ले जाता है जहां जुड़वां देश अलग-अलग जन्म तिथियों के साथ समाप्त हो गए।

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11. 15 अगस्त, 1947 को 1 रुपये की विनिमय दर (exchange rate) = $ 1 थी।

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Reena Arya

रीना आर्य एक ज्वलंत और साहसी पत्रकार व लेखिका है। वे समयधारा.कॉम की एडिटर-इन-चीफ और फाउंडर भी है। लेखन के प्रति अपने जुनून की बदौलत रीना आर्य ने न केवल बड़े-बड़े ब्रांड्स में अपने काम के बल पर अपनी पहचान बनाई बल्कि अपनी काबलियत को प्रूव करते हुए पत्रकारिता के पांच से छह साल के सफर में ही अपने बल खुद एक नए ब्रैंड www.samaydhara.com की नींव रखी।रीना आर्य हर मुद्दे पर अपनी बेबाक राय रखने पर विश्वास करती है और अपने लेखन को लगभग हर विधा में आजमा चुकी है

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