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मोदी का इजरायल दौरा फिलिस्तीन के साथ विश्वासघात और हिंदुत्व का प्रसार: प्रकाश करात

नई दिल्ली, 5 जुलाई : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे को ‘पूर्णतया अहम मोड़’ करार देते हुए मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता प्रकाश करात ने मंगलवार को कहा कि यह हिंदुत्व विचारधारा का ही हिस्सा है, जो घरेलू के साथ-साथ विदेश नीति में भी परिलक्षित हो रहा है। माकपा के पूर्व महासचिव ने यह भी कहा कि मोदी का दौरा इस बात की खुली घोषणा है कि भारत अब फिलिस्तीन के मुद्दे पर उसके साथ नहीं खड़ा है। 

फिलिस्तीन सॉलिडिटरी कमेटी द्वारा आयोजित एक बैठक में करात ने कहा, “मोदी सरकार भारत में जो कर रही है, यह विदेश नीति उसी का विस्तार है।” उन्होंने जोर देते हुए कहा कि विदेश नीति की इस तरह की दिशा तथा भारत व इजरायल के बीच रणनीतिक गठबंधन का विरोध करने की जरूरत है, जो फिलिस्तीन के मुद्दे के साथ विश्वासघात है। 

मंगलवार से मोदी का इजरायल का तीन दिवसीय दौरा शुरू हो गया। भारतीय प्रधानमंत्री की इजरायल की यह पहली यात्रा है।

यह दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है, जब भारत तथा इजरायल अपने कूटनीतिक संबंधों की 25वीं वर्षगांठ मना रहा है, जबकि वेस्ट बैंक तथा गाजा पट्टी पर इजरायल के कब्जे का 50वां साल है।

करात ने कहा कि इस दौरे से भारत सरकार की पहचान और भारत के विचार फिलिस्तीन के समक्ष पूरी तरह उजागर हो जाएंगे और इजरायल द्वारा किए गए तमाम अत्याचारों व कब्जों को वैधता मिल जाएगी।

उन्होंने कहा, “भारत ने लंबे वक्त से जो रुख अख्तियार कर रखा था, यह उसका पूरी तरह उलटा है, क्योंकि भारत ने हमेशा फिलिस्तीन की आजादी की लड़ाई की बात की है।”

करात ने कहा, “महात्मा गांधी से लेकर सन् 1980 तक भारत फिलिस्तीन के संघर्ष के साथ खड़ा रहा और आज की तारीख में सबकुछ पूरी तरह पीछे छोड़ दिया गया है।”

–आईएएनएस

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