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राफेल पर अब नपेंगे मोदी? केंद्र की आपत्ति खारिज,सुप्रीम कोर्ट में होगा ‘सीक्रेट डॉक्यूमेंट्स’ का परीक्षण

ध्यान दें कि मोदी सरकार ने कहा था कि सीक्रेट डॉक्यूमेंट्स की फोटोकॉपी या फिर चोरी किए गए दस्तावेजों की कॉपी पर कोर्ट को भरोसा नहीं करना चाहिए

नई दिल्ली,10अप्रैल: #Rafale deal leaked documents review petitions– सुप्रीम कोर्ट में क्या अब मोदी सरकार नपेगी? ये सवाल इसलिए उठ रहा है चूंकि राफेल डील (#Rafale deal) पर गोपनीय फाइलों (leaked documents ) का हवाला देकर केंद्र ने सुनवाई न करने की जो याचिका दायर की थी, उसे सुप्रीम कोर्ट (SC)ने खारिज कर दिया है।

याचिका के साथ लगाएं दस्तावेजों पर सरकार ने विशेषाधिकार लगाया था। सुप्रीम कोर्ट (Supreme court)  ने आदेश दिया है कि वे रक्षा मंत्रालय से फोटो कॉपी (leaked documents) हुए दस्तावेजों का परीक्षण (review petitions) करेगा।

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ध्यान दें कि मोदी सरकार ने कहा था कि सीक्रेट डॉक्यूमेंट्स की फोटोकॉपी या फिर चोरी किए गए दस्तावेजों की कॉपी पर कोर्ट को भरोसा नहीं करना चाहिए।

इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बैंच ने सहमति से सुनाया है। केंद्र सरकार ने कहा है कि याचिका के साथ दस्तावेज लगाए गए है, वो गलत तरीके से डिफेंस मिनिस्ट्री से लिए गए है और सुप्रीम कोर्ट इन डॉक्यूमेंट्स पर भरोसा नहीं कर सकता।

गौरतलब है कि राफेल मुद्दे पर पुनर्विचार याचिका डालने वाले अरुण शौरी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कहा कि डॉक्यूमेंट्स को स्वीकार करने पर केंद्र ने जो तर्क दिया है, उसे हम सर्वसम्मति से खारिज करने के निर्णय से खुश है।

दरअसल, मोदी सरकार ने 14 दिसंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर पुनर्विचार के लिए डाली गई याचिकाओं के लिए दावा किया था कि इसके साथ जो डॉक्यूमेंट्स लगाएं गए है उनपर सरकार का विशेषाधिकार है। सरकार ने अपने दावे में कहा था कि याचिका की सुनवाई के लिए साथ में संलग्न दस्तावेजों पर कोर्ट को संज्ञान नहीं लेना चाहिए।

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पूर्व भाजपा नेता और वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा, जर्नलिस्ट से नेता बने अरुण शौरी और सोशल एक्टिविस्ट व एडवोकेट प्रशांत भूषण की ओर से फाइल याचिका को केंद्र ने खारिज करने की मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने दलील दी थी कि इन तीनों याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में जो डॉक्यूमेंट्स लगाएं है, उनपर केंद्र का विशेषाधिकार है और इसलिए याचिका से इन डॉक्यूमेंट्स को हटा देना चाहिए।

सरकार के अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि ये डॉक्यूमेंट्स ओरिजनल डॉक्यूमेंट्स की अनाधिकृत रूप से ली गई फोटोकॉपी है और इस बात की जांच की जा रही है। अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने केंद्र की ओर से दलील दी थी कि डॉक्यूमेंट्स विशेषाधिकार प्राप्त डॉक्यूमेंट्स है।

इन्हें भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 123 के हिसाब से भी सबूत नहीं माना जा सकता है।  इन डॉक्यूमेंट्स को ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत संरक्षित किया जाता है।  इतना ही नहीं, एजी ने कहा कि डॉक्यूमेंट्स के प्रकटीकरण को आरटीआई एक्ट के अंतर्गत धारा 8 (1) (ए) के अनुसार छूट प्रदान की गई है

एजी के दावों को याचिकाकर्ताओं में शामिल प्रशांत भूषण ने झुठलाते हुए कहा कि जो दस्तावेज सार्वजनिक क्षेत्र में पहले से ही है,उनपर विशेषाधिकार का दावा नहीं किया जा सकता। प्रशांत ने आगे कहा भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 123 केवल “अप्रकाशित दस्तावेजों” की रक्षा करती है।

गौरतलब है कि अन्य याचिकाकर्ता अरुण शौरी ने कमेंट किया कि वे एजी के आभारी है चूंकि उन्होंने स्वीकार कर लिया कि डॉक्यूमेंट्स ओरिजनल है और याचिका के साथ लगाएं गए डॉक्यूमेंट्स उनकी फोटोकॉपी है।

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Reena Arya

रीना आर्य एक ज्वलंत और साहसी पत्रकार व लेखिका है। वे समयधारा.कॉम की एडिटर-इन-चीफ और फाउंडर भी है। लेखन के प्रति अपने जुनून की बदौलत रीना आर्य ने न केवल बड़े-बड़े ब्रांड्स में अपने काम के बल पर अपनी पहचान बनाई बल्कि अपनी काबलियत को प्रूव करते हुए पत्रकारिता के पांच से छह साल के सफर में ही अपने बल खुद एक नए ब्रैंड www.samaydhara.com की नींव रखी।रीना आर्य हर मुद्दे पर अपनी बेबाक राय रखने पर विश्वास करती है और अपने लेखन को लगभग हर विधा में आजमा चुकी है

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