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Mumbai Corona : प्राइवेट अस्पतालों के 80 प्रतिशत बेड पर सरकार का कब्जा

ठाकरे का नया फरमान, मुंबई शहर और राज्य के प्राइवेट अस्पतालों को कब्जे में लेने का आदेश

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मुंबई : देश भर में कोरोना का कहर कम होने का नाम ही नहीं ले रहा l अकेले महाराष्ट्र में देश के 35 फीसदी कोरोना के मरीज है l 

देश में कोरोना संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए मुंबई और महाराष्ट्र में रोगियों का इलाज करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने कड़ा निर्णय लेते हुए,

मुंबई शहर और राज्य के प्राइवेट अस्पतालों को कब्जे में लेने का आदेश दिया है।

राज्य में कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या और सरकारी अस्पतालों की क्षमता समाप्त होने के चलते सरकार को यह कड़ा फैसला करना पड़ा है।

कोरोना के प्रसार के कारण राज्य के स्वास्थ्य सेवाओं पर बहुत दबाव है।

महाराष्ट्र टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक महानगरपालिकाओं और सरकारी अस्पतालों में नये मरीज लेने की गुंजाइश नहीं रह गई है।

ऐसे समय में कई लोग निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं पंरतु वहां पर उनसे मनमाना शुल्क वसूला जा रहा है।

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मरीजों से 20 से 25 लाख रुपये लिये जाने की अनेकों शिकायतें राज्य सरकार को मिली हैं।

इसके बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए

निजी अस्पतालों की मनमानी पर लगाम लगाने का निर्णय लिया और आदेश दिया कि,

31 अगस्त तक निजी अस्पतालों के 80 प्रतिशत बेड सरकार के कब्जे में रहेंगे।

इन अस्पतालों को कब्जे में लेने के अधिकार सरकार द्वारा जिलाधिकारियों, महानगरपालिका आयुक्तों और राज्य स्वास्थ्य गारंटी सोसाइटी को दिये गये हैं।

ये अस्पताल सरकारी नियंत्रण में लेने के साथ ही इन अस्पतालों में अत्यावश्यक सेवा कानून (मेस्मा) लागू किया जायेगा।

जिसके कारण निजी अस्पतालों के डॉक्टरों, नर्स एवं अन्य कर्मचारियं को सेवा देना बाध्यकारी होगा।

यह जानकारी राज्य स्वास्थ्य गारंटी सोसाइटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुधाकर शिंदे ने दी।

सरकार ने आपदा निवारण कानून भी लागू किया है,

जिससे सरकार का आदेश नहीं मानने वाले निजी अस्पतालों पर गैरजमानती अपराध दर्ज किया जा सकता है।

इसके साथ ही चिकित्सा उपचार खर्च पर नियंत्रण करते हुए सरकार ने मेडिकल फीस भी निर्धारित की है,

जिसके अनुसार प्रत्येक दिन के लिए अधिकतम 4 हजार, 7.5 हजार और 9 हजार रुपये फीस लेने का आदेश दिया गया है।

ये फीस बीमा कंपनियों द्वारा मेडिकल फीस की दर निर्धारित किये जाने के आधार तय की गई है।

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