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बिहार चुनावी नतीजों से निराश लालू यादव ने खाना छोड़ा

बिहार, 26 मई (समयधारा) : इस लोकसभा चुनाव में बड़े-बड़े सुरमा हार गए l

क्या कांग्रेस तो क्या दूसरी पार्टियाँ l आज हम बात कर रहे है लालू प्रसाद यादव की l लालू यादव को हार का बड़ा सदमा लगा है l

उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा है की बिहार की जनता उनकी पार्टी को इस तरह से नकार देगी l

चाहे उनकी बेटी हो या बेटा सभी बुरी तरह से हार गए l राष्ट्रिय जनता दल का बिहार में सूपड़ा साफ़ हो गया l

महागठबंधन पूरी तरह से फेल रहा l लोकसभा सभा चुनाव 2019 की मोदी सुनामी से कई बड़े नेताओं के पसीने छूट गए हैं। 

पार्टी की करारी हार से लालू प्रसाद यादव काफी निराश हैं।

आपको बता दे कि इन दिनों चारा घोटाले के आरोप में जेल में बंद लालू प्रसाद यादव का इलाज चल रहा है।

अस्पताल में लालू प्रसाद ने भोजन करना छोड़ दिया है। साथ ही उन्हों ठीक से नींद भी नहीं  रही है।

गौरतलब है कि दरअसल लालू प्रसाद यादव रांची के रिम्स असपताल में भर्ती हैं।

इस बार का लोकसभा चुनाव लालू प्रसाद की अनुपस्थिति में लड़ा गया। ऐसे में उनकी पार्टी को तगड़ा नुकसान हुआ है।

इससे राजद नेता और पार्टी के मुखिया लालू प्रसाद यादव काफी निराश हैं। उन्हें नींद भी ढंग से नहीं आ रही।

डॉक्टरों के मुताबिक, सुबह का नाश्ता तो जैसे-तैसे कर ले रहे हैं, लेकिन दोपहर का भोजन नहीं कर रहे हैं।

ऐसे में उनकी तबियत और बिगड़ सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि हम अपनी तरफ से काफी समझा रहे हैं,

इस तरह से खाना छोड़ना सेहत के लिए हानिकारक है। ऐसे में दवा और इंसुलिन देने में मुश्किल होगी।

पर उनसे मिलने-जुलने वालों का कहना तो कुछ और ही है l लालू से मुलाकात करने वाले उनके

एक विधायक ने तनाव की स्थिति को खारिज करते हुए कहा कि लालू जी के लिए ये कोई पहला चुनाव नहीं है।

उनकी स्थिति ठीक है। जो भी हो राहुल इस चुनाव में मिली हार से आहत तो जरुर होंगे l

उनकी तबियत भगवान ठीक रखें और वो जल्द से ठीक हो बिहार की राजनीति में फिर कदम रखें l हमारी यही कामना l   

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समयधारा

समयधारा एक तेजी से उभरती हिंदी न्यूज पोर्टल है। जिसका उद्देश्य सटीक, सच्ची और प्रामाणिक खबरों व लेखों को जनता तक पहुंचाना है। समयधारा ने अपने लगभग महज चार साल के सफर में बिना मूल्यों से समझौता किए क्वांटिटी से ज्यादा क्वालिटी कंटेंट पर हमेशा ज़ोर दिया है। एक आम मध्मय वर्गीय परिवार से निकली लड़की रीना आर्य के सपनों की साकार डिजिटल मूर्ति है- समयधारा। रीना आर्य समयधारा की फाउंडर, एडिटर-इन-चीफ और डायरेक्टर भी है। उनके साथ समयधारा को संपूर्ण बनाने में अहम भूमिका निभाई है समयधारा के को-फाउंडर-धर्मेश जैन ने। एक आम मध्यमवर्गीय परिवार में जन्में धर्मेश जैन पेशे से बिजनेसमैन रहे है और लेखन में अपने जुनूूून के प्रति उन्होंने समयधारा की नींव रखने में अहम रोल अदा किया है।

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