breaking_newsHome sliderदेशराज्यों की खबरें

Breaking Live: फुलपुर में मुरझाया कमल, सपा की 59,613 वोटों से जीत

लखनऊ, 14 मार्च : उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को तगड़ा झटका देते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) ने बुधवार को फूलपुर सीट 59,613 वोटों से जीत ली। 2014 में पहली बार बीजेपी ने फुलपुर सीट पर कब्जा किया था लेकिन इस बार वापिस सपा इस सीट पर काबिज हो गई। पिछली बार यूपी के डिप्टी सीएम केशव मौर्या इस सीट पर भारी मतों से जीते थे और अबकी बार वे अपनी सीट नहीं बचा पाएं।

सपा ने फुलपुर में 3,42,796 वोट हासिल किए और बीजेपी को 2,83,183 वोट ही मिल सकें।

और गोरखपुर लोकसभा सीटों पर हुए उप चुनाव में लगभग विजयी बढ़त बना ली है। गोरखपुर सीट उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और फूलपूर सीट उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के सांसद पद से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई थी।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अपनी कट्टर प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी को उपचुनाव में समर्थन का ऐलान किया था। सपा और बसपा का जनाधार भाजपा पर भारी पड़ता दिख रहा है। भाजपा दोनों ही लोकसभा क्षेत्रों में हार की तरफ बढ़ती हुई दिखाई दे रही है। यह संभावित हार मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के लिए एक बड़ा धक्का साबित होगी।

निर्वाचन आयोग के अधिकारियों का कहना है कि फूलपूर में सपा के नागेंद्र सिंह पटेल ने भाजपा के कौशलेंद्र सिंह पटेल पर 22,848 मतों की अजय बढ़त बना ली है।

फूलपूर और गोरखपुर में रविवार को मतदान हुआ था।

गोरखपुर में सपा के प्रवीण निषाद, भाजपा उम्मीदवार उपेंद्र दत्त शुक्ला से 19,201 वोटों से आगे चल रहे हैं। इस सीट पर लगातार पांच बार से आदित्यनाथ जीतते आ रहे थे।

फूलपूर और गोरखपुर में क्रमश: मात्र 37 और 42 फीसदी मतदान हुआ था।

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अनुराग भदौरिया ने आईएएनएस से कहा, “यह (प्रधानमंत्री नरेंद्र) मोदी और योगी (आदित्यनाथ) को अस्वीकार किया जाना है।”

2014 लोकसभा चुनाव के बाद से इन दोनों सीटों पर अचानक भाजपा के खिलाफ हुए मतदाताओं के रुख पर उन्होंने कहा, “उन्होंने बड़े-बड़े वादे किए लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया। “

भाजपा ने 2014 में राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 73 पर जीत हासिल की थी। उसके सहयोगियों ने भी दो सीटों पर जीत दर्ज की थी। सपा ने पांच सीटें अपने नाम की थी जबकि कांग्रेस और बसपा अपना खाता खोलने में नाकाम रही थीं।

गोरखपुर के जिला अधिकारी राजीव रौतेला ने मतगणना केंद्रों पर पत्रकारों के प्रवेश पर रोक लगाकर विवाद खड़ा कर दिया था और पहले दो चरण के बाद वोटों की संख्या को जारी नहीं किया था। लेकिन, बाद में उन्होंने संवाददाताओं को हर दौर की गिनती की जानकारी दी।

सपा कार्यकर्ताओं ने फूलपूर और गोरखपुर में जश्न मनाया जबकि भाजपा खेमे में सन्नाटा पसर गया है।

–आईएएनएस

Tags

समयधारा

समयधारा एक तेजी से उभरती हिंदी न्यूज पोर्टल है। जिसका उद्देश्य सटीक, सच्ची और प्रामाणिक खबरों व लेखों को जनता तक पहुंचाना है। समयधारा ने अपने लगभग महज चार साल के सफर में बिना मूल्यों से समझौता किए क्वांटिटी से ज्यादा क्वालिटी कंटेंट पर हमेशा ज़ोर दिया है। एक आम मध्मय वर्गीय परिवार से निकली लड़की रीना आर्य के सपनों की साकार डिजिटल मूर्ति है- समयधारा। रीना आर्य समयधारा की फाउंडर, एडिटर-इन-चीफ और डायरेक्टर भी है। उनके साथ समयधारा को संपूर्ण बनाने में अहम भूमिका निभाई है समयधारा के को-फाउंडर-धर्मेश जैन ने। एक आम मध्यमवर्गीय परिवार में जन्में धर्मेश जैन पेशे से बिजनेसमैन रहे है और लेखन में अपने जुनूूून के प्रति उन्होंने समयधारा की नींव रखने में अहम रोल अदा किया है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: