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क्या है शुभ मुहूर्त भाई-दूज की पूजा का, क्यों और कैसे मनाया जाता है भाई-दूज का पवित्र त्योहार

भाई दूज के दिन बहनें भाई के हाथ में नारियल देकर उनके माथे पर रोली और अक्षत से टीका करती है  व भाई की आरती उतारती है इसलिए इसे टीका भी कहते है

नई दिल्ली, 21 अक्टूबर:  रक्षा बंधन के बाद भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक अगर अन्य कोई त्योहार है तो वह है-भाई दूज। संपूर्ण भारत में भाई दूज बेहद धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र के लिए दुआएं मांगती है और भाई भी ताउम्र अपनी बहनों की रक्षा और उसे खुश रहने का आशीर्वाद देते है।

क्यों मनाया जाता है भाई दूज

यूं तो पुराणों में भाई दूज मनाने को लेकर अनेकों किस्से-कहानियां है,लेकिन हम आपको आज दो प्रमुख पौराणिक कथाएं बताने जा रहे है, जिनके चलते आम जनजीवन में भी भैया-दूज बेहद धूमधाम से मनाया जाने लगा।

कहा जाता है कि पौराणिक हिंदू धर्म कथाओं के अनुसार, सूर्य की दो संतानें थी और ये दोनों ही संतानें संज्ञा से थी लेकिन संज्ञा सूरज का तेज ज्यादा समय तक बर्दाश्त न कर सकी और छायामूर्ति को रचकर वह अपनी दोनों संतानों- पुत्र यमराज और पुत्री यमुना को, सौंपकर वहां से चली गई। छाया को यमराज और यमुना से कोई खास स्नेह नहीं था लेकिन दोनों भाई-बहनों यानि यमराज और यमुना के परस्पर काफी स्नेह था। यम को बहन यमुना से प्यार तो बहुत था लेकिन काफी व्यस्तता के चलते वह बहन से मिलने नहीं जा पाते थे। फिर एक दिन जब यम अपनी बहन यमुना से आखिरकार मिलने पहुंचे तो वह अत्यंत खुश हुई। यमुना ने अपने प्यारे भाई यम के लिए स्वादिष्ट भोजन बनाया और सेवा-सत्कार किया। बहन का इतना प्यार देख यमराज अभिभूत हो गए और उन्होंने अपनी बहन को ढ़ेर सारे तोहफें दिए।

भेंट देकर जब यम जाने लगे तो बहन यमुना से मनचाहा वरदान मांगने को कहा, तब यमुना ने भाई के आग्रह को स्वीकार करके कहा कि यदि आप मुझे वरदान देना चाहते है तो यही वर दीजिए कि आज के दिन हर साल आप यहां आएंगे और मेरा अतिथि सत्कार स्वीकार करेंगे। बस तभी से आज के दिन लौकिक जगत में भी भाई-दूज का पवित्र बंधन मनाया जाने लगा।

भाई दूज के संदर्भ में एक अन्य कथा श्रीकृष्ण से संबंधित है। श्रीकृष्ण जब नरकासुर को मारकर अपनी बहन सुभद्रा से मिलने पहुंचे तो बहन सुभद्रा ने उनका फूलों से और माथे पर टीका व आरती से स्वागत किया और फिर इसके बाद से भाई-दूज का स्नेहपूर्ण त्यौहार मनाया जाने लगा। बहनें इस दिन भाई को टीका लगाकर उनकी लंबी उम्र की कामना करती है।

ऐसे मनाया जाता है भाई दूज

भाई दूज के दिन बहनें भाई के हाथ में नारियल देकर उनके माथे पर रोली और अक्षत से टीका करती है  व भाई की आरती उतारती है इसलिए इसे टीका भी कहते है और भाई दूज को यम द्वितीय भी कहते है। इसके बाद भाई भी अपनी बहनों को ढ़ेरों उपहार देकर उन्हें सौभाग्य और खुशियों का आशीर्वाद देते है। पौराणिक हिंदू धर्म कथाओं के अनुसार, इस दिन मृत्य के देवता यमराज की पूजा की जाती है और बहनें अपने भाईयों की दीर्घ आयु, स्वास्थ्य और कल्याण की कामना करती है।

 

भाई दूज का ये है शुभ मुहूर्त

इस साल भाई दूज 21अक्टूबर 2017 को शनिवार के दिन है। अगर आप अपने भाईयों को इस दिन शुभ मुहूर्त में तिलक या टीका करेंगी तो आपकी पूजा जरूर सफल होगी। पूजा का शुभ मुहूर्त है- 1 बजकर 31 मिनट से लेकर 3 बजकर 49 मिनट तक।

 

समयधारा की ओर से सभी भाई-बहनों को भैया दूज की हार्दिक शुभकामनाएं!

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समय धारा

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