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शायरी : जख्म हैं कि दिखते नहीं..! मगर ये मत समझिये कि दुखते नहीं..!!

(1) कितनों ने खरीदा सोना
मैने एक ‘सुई’ खरीद ली

सपनों को बुन सकूं
उतनी ‘डोरी’ खरीद ली

सबने बदले नोट
मैंने अपनी ख्वाहिशे बदल ली

‘शौक- ए- जिन्दगी’ कम करके
‘सुकून-ए-जिन्दगी’ खरीद ली…

(2) हर किसी को दिल में लिये बसते हैं हम …

कोई अपना दुखी ना हो इसलिए सदा हँसते हैं हम..

(3) जख्म हैं कि दिखते नहीं..!!

मगर ये मत समझिये कि दुखते नहीं..! 

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(इनपुट सोशल मीडिया से)

 

 

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