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शायरी : एक चाहत होती है, जनाब़.. अपनों के साथ जीने की ..

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(1) रिश्तो में झुकना कोई अजीब बात नहीं,  
सूरज भी तो ढल जाता है, चाँद के लिए !!

 (2) एक चाहत होती है, जनाब़.. अपनों के साथ जीने की ..

वरना पता तो हमें भी है कि… ऊपर अकेले ही जाना है

दिलवालों की शायरी : नजरअंदाजी शौक बडा़ था उनको हमने भी तोहफे में उनको..

मोहब्बत शायरी : ऐ मोहब्बत… तुम्हारे मुस्कुराने का असर मेरी सेहत

जिंदगी-शायरी : मिलो किसी से ऐसे कि ज़िन्दगी भर की पहचान बन जाये…..

शायरी : कल शीशा था, सब देख-देख कर जाते थे….

मोहब्बत-शायरी : कुछ इस अदा से निभाना है किरदार मेरा मुझको….

(3) “ख्वाईश-मनुष्य”
को जीने नहीं देती
और
“मनुष्य-ख्वाईश”
को मरने नहीं देता l

(इनपुट सोशल मीडिया से)

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