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शायरी : सफर से बस इतना ही सबक सीखा है…. सहारा कोई – कोई ही देता है…

(1) सफर से बस इतना ही सबक सीखा है ..
सहारा कोई – कोई ही देता है

धक्का देने को हर शख्स तैयार बैठा है..

(2) एक आशिक ने क्या खूब लिखा है कि

“मरने के बाद मुझे जल्दी ना जला देना
उसे  देर से आने की आदत है” ….!

(3) तलाश ज़िन्दगी की थी,
दूर तक निकल पड़े,
ज़िन्दगी नही मिली मगर
तज़ुर्बे बहुत मिले.

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(इनपुट सोशल मीडिया से)

 

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