शायरी : कभी देख लो तुम भी मुझे कशिश से… हर बार मैं ही पुकारूँ …….

(1) कभी देख लो तुम भी मुझे कशिश से…
हर बार मैं ही पुकारूँ ये शर्त तो नही थी….!

(2) कभी तुम्हारी याद आती है
तो कभी तुम्हारे ख्व़ाब आते है
मुझे सताने के सलीके तो तुम्हें बेहिसाब आते है

(3) एक ही चेहरे की अहमियत हर एक नजर में अलग सी क्यूँ है,,

उसी चेहरे पर कोई खफा तो कोई फिदा सा क्यूँ है,,,,,,?

(4) साथ जब भी छोड़ना तो,
मुस्कुरा कर छोड़ना ए दोस्तों

ताकि दुनिया ये ना समझे,
हम में दूरी हो गई….

(इनपुट सोशल मीडिया से)

 

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