शायरी : वो इत्र की शीशियां बेवज़ह इतराती हैं खुद पे..

itr shayaris shayri-in-hindi india-sayari वो इत्र की शीशियां बेवज़ह इतराती हैं खुद पे हम तो उनके साथ होते है तो महक जाते है… शायर की शायरी : जला हुआ जंगल.. छिप कर रोता रहा.. जला हुआ जंगल छिप कर रोता रहा….. लकड़ी उसी की थी    उस माचिस की तीली में…… शायरी : लोग आँखों … Continue reading शायरी : वो इत्र की शीशियां बेवज़ह इतराती हैं खुद पे..