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शायरी : रहने दे मुझको यूँ उलझा हुआ सा तुझमे… सुना है सुलझ जाने से….

(1) रहने दे मुझको यूँ उलझा हुआ सा तुझमे…

सुना है सुलझ जाने से धागे अलग अलग हो जाते है…

(2) “शीशा कमज़ोर बहुत होता है”!

“मगर सच दिखाने से घबराता नहीं है”!!

(3) “जब हम अकेले हों तब अपने विचारों को संभालें….
और जब हम सबके बीच हों तब अपने शब्दों को संभालें..”

(4) कुछ लम्हे गुजारे है,
मैंने भी अपने खास दोस्तो संग

लोग उन्हें वक़्त कहते है और
हम उन्हे जिंदगी कहते है

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(इनपुट सोशल मीडिया से)

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