शायरी : बँधी हैं सबके हाथों में घडियाँ मगर, पकड में किसी के एक लम्हा भी नहीं
samay shayaris trending shayris twitter shayri indian shayaris बँधी हैं सबके हाथों में घडियाँ मगर.. पकड में किसी के एक लम्हा भी नहीं लाइफ शायरी : यूँ तो ए ज़िन्दगी…तेरे सफर से शिकायते बहुत थी… एक जैसी ही दिखती थी वो माचिस की तीलियाँ कुछ ने दिये जलाये और कुछ ने घर दिलवालों की शायरी … Continue reading शायरी : बँधी हैं सबके हाथों में घडियाँ मगर, पकड में किसी के एक लम्हा भी नहीं
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