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क्या आप जानते है क्या फर्क है गारंटी और वारंटी में? दुकानदार न दें तो क्या करें?

आज हम आपको गारंटी और वारंटी क्या है और दोनों में क्या फर्क है, इसकी विस्तारपूर्वक चर्चा करने जा रहे हैं

नई दिल्ली, 15 मार्च: Difference between Guarantee and warranty-आप अक्सर किसी भी सामान को खरीदने जाते होंगे तो वहां आपको गांरटी या वारंटी (Guarantee and warranty) शब्द सुनाई देता होगा। लोग अक्सर इस गारंटी और वारंटी का फर्क (Difference between Guarantee and warranty) नहीं समझ पाते, इस वजह से सामान खराब होने की स्थिति में दुकानदार या विक्रेता से अक्सर ग्राहकों की कहासुनी हो जाती है।

आज हम आपको गारंटी और वारंटी क्या (What is guarantee and warranty) है और दोनों में क्या फर्क है, इसकी विस्तारपूर्वक चर्चा करने जा रहे हैं। हमें उम्मीद है कि आपको ये आलेख पंसद आएगा और आपके लिए उपयोगी साबित होगा।

गारंटी और वारंटी क्या है ?

किसी भी वस्तु को बेचने वाले विक्रेता पक्ष की ओर से खरीदने वाले ग्राहक पक्ष को सामान बेचने के दौरान दिया गया वो विशेष लाभ जिसके तहत किसी भी उत्पाद के बिगड़ने या खराब होने की स्थिति में उत्पाद बनाने वाली कंपनी द्वारा बनवाकर या बदलवा कर ग्राहक को वापस कि जाने की सुविधा को गारंटी या वारंटी कहते हैं। यहां इस तथ्य को भी समझना जरुरी होता है कि ये सुविधा कुछ निश्चित अवधि के लिए ही होता है।

क्या होता है गारंटी : गारंटी सुविधा के अंतर्गत आप किसी उत्पाद के बिगड़ जाने की स्थिति में आप उसे कंपनी से बदल कर नया उत्पाद प्राप्त कर सकते हैं। विक्रेता पक्ष को ऐसा लगता है कि मैंने जिस उत्पाद को अपने ग्राहक से बेचा है, उसेमं खराबी आ गई है तो वह उस उत्पाद को अपनी कंपनी के माध्यम से बदलवा कर नया उत्पाद अपने ग्राहक को उपलब्ध कराते हैं, इसे गारंटी कहते हैं। चूंकि जहां गारंटी की स्थिति में खराब सामान को बदल कर नया वापस किया जाता है, इसलिए कपंनियां गारंटी कम ही देती हैं अथवा उसकी समयावधि कम रखती हैं।

वारंटी क्या है : वारंटी का मतलब सीधे सीधे ऐसे समझा जा सकता है कि अगर कोई उत्पाद आपने खरीदा और वो बिगड़ जाता है तो उसे आप उसे कंपनी की ओर से दी गई एक निश्चित अवधि के बीच रिपेयर करवा सकते हैं।  वारंटी में सामान बदला नहीं जाता बल्कि सामान की रिपेयरिंग होती है। वारंटी की अवधि तक सामानों की रिपेयरिंग के लिए कंपनी कोई शुल्क नहीं लेती। आज की तारीख में अधिकांश कंपनियां कुछ चार्ज लेकर वारंटी की अवधि बढ़ाती भी हैं।

गारंटी और वारंटी में फर्क

गारंटी और वारंटी शब्द सुनने में एक जैसे लगते हैं लेकिन इन दोनों में आसमान और जमीन का अंतर होता है। इसे आप आसानी से ऐसे समझ सकते हैं। आप किसी सामान को खरीदे और वो बिगड़ जाता है तो ऐसी स्थिति में कंपनी सामान रिप्लेस कर दूसरा सामान देती है तो उसे गारंटी कहते हैं जबकि बिगड़े हुए सामान की रिपेयरिंग करवा कर देने को वारंटी कहते हैं।

इस बात का रखें खास ख्याल

गारंटी या वारंटी किसी भी ग्राहक का अधिकार होता है। सामान खरीदते वक्त विक्रेता से उसकी पक्की रसीद और गारंटी/ वारंटी कार्ड जरुर लें और सुरक्षित रखें। सामान बिगड़ने की स्थिति में ये कागजात ही आपकी गारंटी या वारंटी प्राप्त करने का अधिकार देता है। अगर कोई भी कंपनी या विक्रेता आपको गांरटी या वारंटी अवधि में सामान बदलने या बनवाने में आनाकानी करता है तो आप उपभोक्ता कोर्ट का द्वार खटखटा सकते हैं।

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