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CRPC-161 के तहत घायल व्यक्ति का दिया बयान उसके मृत्युकाल बयान के समान : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर : माननीय सुप्रीम कोर्ट की 2 जजों की पीठ ने बुधवार को

सीआरपीसी धारा 161 के सन्दर्भ में कहा कि यदि कोई घायल व्यक्ति इस धारा के  तहत बयान देता है

तो उसकी मृत्यु हो जाने हो के बाद इस बयान मृत्यु के समय के बयान के रूप में यानी अंतिम बयान माना जायेगा|

इसी प्रकार साक्ष्य अधिनियम यानी एविडेंस एक्ट की धारा 32 के तहत इसे साक्ष्य भी माना जायेगा|

जस्टिस एके तिवारी एवं जस्टिस भूषण के पीठ ने ओडिशा हाई कोर्ट के 25 जनवरी 2017 के

खिलाफ दायर याचिका के ऊपर सुनवाई कर रहे थे|

इस मामले में निचली अदालत ने धारा 304 के तहत 5 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी

जिसके खिलाफ हाईकोर्ट ने अपील रिजेक्ट कर दी थी|

अपीलकर्ता के वकील ने कोर्ट में कहा कि धारा 161 के तहत किसी घायल व्यक्ति के बयान को

मर रहे व्यक्ति का बयान नहीं माना जा सकता है|

वकील ने इसके पीछे केस स्टडी लक्ष्मण बनाम स्टेट ऑफ़ महाराष्ट्र वर्ष 2002 का हवाला दिया|

पीठ ने इस पर कहा कि पुलिस द्वारा धारा 161 के तहत दर्ज़ किया गया घायल व्यक्ति का बयान साक्ष्य अधिनियम की

धारा 32 के क्लॉज़ 1 के अंदर आता है जो कि सीधे तौर पर तर्कसंगत और स्वीकार्य है|

कोर्ट ने कहा कि निचली व ऊपरी अदालत ने घायल व्यक्ति के बयान पर भरोसा करते हुए उसे सांगत माना है|

अंत में कोर्ट ने अपीलकर्ता की अपील को खारिज करते हुए कहा कि वह इस बारे में पूरी तरह संतुष्ट है

क्योंकि कोर्टो ने आरोपी को दोषी ठहराकर कोई गलती नहीं की है|

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