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Bhai Dooj 2018 shubh muhurat: आज भाई दूज पर इस शुभ मुहूर्त में करें भाई को तिलक,जानें महत्व

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भाई दूज का त्यौहार आता है। आज 9 नवंबर को भैया दूज मनाया जा रहा है

नई दिल्ली,9 नवंबर: BhaiDooj2018shubhmuhurat– भाई-बहन के पवित्र प्यार का प्रतीक भाई दूज (BhaiDooj2018)आज(9 नवंबर 2018) को है।

आज के दिन शादीशुदा महिलाएं अपने भाईयों को घर बुलाकर तिलक लगाकर उन्हें भोजन कराती है।जो कुंवारी बहनें है और भाई के साथ उसी घर में रहती है वे भाई को तिलक लगाकर साथ बैठकर खाना खाती है।

एक लौकिक मान्यता है कि भाई दूज वाले दिन यदि भाई-बहन यमुना किनारे बैठकर साथ में खाना खाते है तो यह बहुत मंगलकारी व कल्याणकारी होता है। भाई दूज चूंकि दिवाली के दो दिन बाद आता है इसलिए इस त्यौहार को यम द्वितीया (Yam Dwitiya) कहते है और इसी दिन मौत के देवता यम की पूजा (Yam Puja) भी की जाती है।

भाई दूज या भैया दूज का क्या है शुभ मुहूर्त?

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भाई दूज का त्यौहार आता है। आज 9 नवंबर को भैया दूज मनाया जा रहा है।

भाई दूज के दिन बहनें अपने भाईयों को इस शुभ मुहूर्त में तिलक करें:

भाई दूज तिलक का मुहूर्त: 09 नवंबर 2019 को दोपहर 01 बजकर 16 मिनट से 03 बजकर 28 मिनट तक।

भाई दूज की पूजा विधि

  1. भाई दूज के दिन बहन-भाई नहाकर साफ-सुथरे नए कपड़े पहनती है। अगर कोई नए कपड़े खरीदने में सक्षम नहीं है तो वो केवल स्वच्छ कपड़े पहन सकता है।

2. अब साबूत चावल के साथ अक्षत,कुमकुम या रोली से 8 दल वाला कमल का फूल बनाए।

3. इसके बाद अपने भाई की दीर्घायु और कल्याण की प्रार्थना के साथ अपने व्रत का संकल्प लें।

4. अब यम की पूजा विधि-विधान के साथ करें।

5. इसके बाद यमुना,चित्रगुप्त और यमदूतों की पूजा-अर्चना करें।

6. फिर अपने भाई को तिलकर लगाएं और उनकी आरती करें।

7. इसके उपरांत भाई को कोई भी गिफ्ट या उपहार अपनी बहन को देना चाहिए।

8. भाई दूज की पूजा जब तक नहीं होती तब तक दोनों भाई-बहन को ही यह व्रत रखना होता है।

9. अब पूजा खत्म होने के बाद दोनों भाई-बहन साथ में मिलकर खाना या भोजन करें।

क्या है भाई दूज या भैया दूज का महत्व

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भाई दूज के दिन शादीशुदा महिलाएं अपने भाईयों को घर बुलाकर तिलक लगाकर उन्हें भोजन कराती है

रक्षाबंधन के बाद भाई-बहन के पवित्र प्यार का प्रतीक है भाई दूज। इस त्यौहार को ‘यम द्वितीया’ और ‘भ्रातृ द्वितीया’ भी कहते है।भाई दूज के दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र की कामना करती है। कुछ स्थानों पर बहनें अपने भाई को तेल लगाकर स्नान भी करवाती है।वैसे आज भाई दूज के दिन यमुना नदी में स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है। यदि यमुना नदी में स्नान न कर सकें तो भाई दूज के दिन भाईयों को अपनी बहन के घर जाकर स्नान करना चाहिए।अगर बहन शादीशुदा है तो उसे भाई को अपने घर बुलाकर अपनी सामर्थ्य अनुसार भोजन करवाना चाहिए। भोजन में चावल खिलाना शुभ माना जाता है। यदि आपकी कोई सगी बहन नहीं है तो चचेरी-ममेरी या मुंहबोली बहन के साथ भी भैया दूज का त्यौहार मनाया जा सकता है। भाई दूज के त्यौहार का संदेश केवल इतना है कि भाई-बहनों के बीच मीलों की दूरियां और व्यस्तता होने के बावजूद भी प्यार बना रहना चाहिए और दोनों को एक-दूसरे के लिए कुछ पल जरूर निकालने चाहिए।

क्‍यों मनाया जाता है भैया दूज?

पौराणिक कथा के अनुसार, सूर्य भगवान की पत्नी का नाम छाया था। उनकी कोख से यमराज और यमुना का जन्म हुआ था। यमुना अपने भाई यमराज से बड़ा स्नेह करती थी। वह उससे बराबर निवेदन करती कि इष्ट मित्रों सहित उसके घर आकर भोजन करो। अपने कार्य में व्यस्त यमराज बात को टालते रहे। फिर कार्तिक शुक्ला का दिन आया। यमुना ने उस दिन फिर यमराज को भोजन के लिए निमंत्रण देकर, उसे अपने घर आने के लिए वचनबद्ध कर लिया।

यमराज ने सोचा, ”मैं तो प्राणों को हरने वाला हूं। मुझे कोई भी अपने घर नहीं बुलाना चाहता। बहन जिस सद्भावना से मुझे बुला रही है, उसका पालन करना मेरा धर्म है।’ बहन के घर आते समय यमराज ने नरक निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया। यमराज को अपने घर आया देखकर यमुना की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने स्नान कर पूजन करके व्यंजन परोसकर भोजन कराया। यमुना के आतिथ्य से यमराज ने प्रसन्न होकर बहन से वर मांगने के लिए कहा।

यमुना ने कहा, ”भद्र! आप प्रति वर्ष इसी दिन मेरे घर आया करो। मेरी तरह जो बहन इस दिन अपने भाई को आदर सत्कार करके टीका करे, उसे तुम्हारा भय न रहे।’ यमराज ने तथास्तु कहकर यमुना को अमूल्य वस्त्राभूषण देकर विद ली। तभी से भैया दूज की परंपरा शुरू हुई। ऐसी मान्यता है कि जो भाई इस दिन आतिथ्य स्वीकार करते हैं, उन्हें यम का भय नहीं रहता। इसी वजह से भैया दूज के दिन यमराज और यमुना का पूजन किया जाता है।

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