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Diwali LakshmiPujan2018: आज दिवाली पर इस शुभ मुहूर्त में करें लक्ष्मी पूजन,बरसेगा पैसा ही पैसा

मां लक्ष्मी की कृपा से आप पर हमेशा पैसों की बरसात होती रहें, इसके लिए जरूरी है कि आप शुभ मुहूर्त में दिवाली की पूजा करें

नई दिल्ली, 7 नवंबर: #DiwaliLakshmiPujanShubhMuhurat2018 – आज (7 नवंबर,बुधवार ) रोशनी का त्यौहार दिवाली है। मां लक्ष्मी की कृपा से आप पर हमेशा पैसों की बरसात होती रहें, इसके लिए जरूरी है कि आप शुभ मुहूर्त में दिवाली की पूजा (#DiwaliLakshmiPujanShubhMuhurat2018) करें। इसलिए हम आपको बताने जा रहे है कि आज किस मुहूर्त में पूजा करें ताकि मां लक्ष्मी की कृपा आप पर और आपके परिवार पर सदैव बनी रहें,लेकिन उससे पहले जान लें कि दिवाली पर लक्ष्मी पूजन की विधि क्या है?

दीपावली के दिन लक्ष्‍मी पूजन की विधि (DiwaliLakshmiPujanVidhi)
सबसे पहले लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति या फिर तस्वीर लें। अब एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर मां लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति को रखें। फिर जलपात्र  या लोटे से चौकी के ऊपर पानी छिड़कते हुए इस मंत्र का उच्‍चारण करें।

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ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्‍थां गतोपि वा । य: स्‍मरेत् पुण्‍डरीकाक्षं स: वाह्याभंतर: शुचि: ।। 

धरती मां को प्रणाम: इसके बाद अपने ऊपर और अपने पूजा के आसन पर जल छिड़कते हुए दिए गए मंत्र का उच्‍चारण करें। 
पृथ्विति मंत्रस्‍य मेरुपृष्‍ठ: ग ऋषि: सुतलं छन्‍द: कूर्मोदेवता आसने विनियोग: ।।
ॐ पृथ्‍वी त्‍वया धृता लोका देवि त्‍वं विष्‍णुना धृता ।
त्‍वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम् नम:  ।।
पृथ्वियै नम: आधारशक्‍तये नम: ।।

आचमन: अब इन मंत्रों का उच्‍चारण करते हुए गंगाजल से आचमन करें।
ॐ केशवाय नम:, ॐ नारायणाय नम: ॐ माधवाय नम: 

ध्‍यान: अब इस मंत्र का उच्‍चारण करते हुए मां लक्ष्‍मी का ध्‍यान करे।
या सा पद्मासनस्था विपुल-कटि-तटी पद्म-पत्रायताक्षी,
गम्भीरार्तव-नाभि: स्तन-भर-नमिता शुभ्र-वस्त्रोत्तरीया ।
या लक्ष्मीर्दिव्य-रूपैर्मणि-गण-खचितैः स्‍वापिता हेम-कुम्भैः,
सा नित्यं पद्म-हस्ता मम वसतु गृहे सर्व-मांगल्य-युक्ता ।।

आवाह्न: अब इस मंत्र का उच्‍चारण करते हुए मां लक्ष्‍मी का आवाह्न करें।
आगच्‍छ देव-देवेशि! तेजोमय‍ि महा-लक्ष्‍मी !
क्रियमाणां मया पूजां, गृहाण सुर-वन्दिते !
।। श्रीलक्ष्‍मी देवीं आवाह्यामि ।।

पुष्‍पांजलि आसन: अब इस मंत्र का उच्‍चारण करते हुए हाथ में पांच पुष्‍प अंजलि में लेकर अर्पित करें।
नाना रत्‍न समायुक्‍तं, कार्त स्‍वर विभूषितम् ।
आसनं देव-देवेश ! प्रीत्‍यर्थं प्रति-गह्यताम् ।।
।। श्रीलक्ष्‍मी-देव्‍यै आसनार्थे पंच-पुष्‍पाणि समर्पयामि ।। 

स्‍वागत: अब श्रीलक्ष्‍मी देवी ! स्‍वागतम् मंत्र का उच्‍चारण करते हुए मां लक्ष्‍मी का स्‍वागत करें। 

पाद्य: अब इस मंत्र का उच्‍चारण करते हुए मां लक्ष्‍मी के चरण धोने के लिए जल अर्पित करें।

द्यं गृहाण देवेशि, सर्व-क्षेम-समर्थे, भो: !
भक्तया समर्पितं देवि, महालक्ष्‍मी !  नमोsस्‍तुते ।।
।। श्रीलक्ष्‍मी-देव्‍यै पाद्यं नम: 

अर्घ्‍य: अब इस मंत्र का उच्‍चारण करते हुए मां लक्ष्‍मी को अर्घ्‍य दें.
नमस्‍ते देव-देवेशि ! नमस्‍ते कमल-धारिणि !
नमस्‍ते श्री महालक्ष्‍मी, धनदा देवी ! अर्घ्‍यं गृहाण ।
गंध-पुष्‍पाक्षतैर्युक्‍तं, फल-द्रव्‍य-समन्वितम् ।
गृहाण तोयमर्घ्‍यर्थं, परमेश्‍वरि वत्‍सले !
।। श्रीलक्ष्‍मी देव्‍यै अर्घ्‍यं स्‍वाहा ।।

स्‍नान: अब इस मंत्र का उच्‍चारण करते हुए मां लक्ष्‍मी की प्रतिमा को जल से स्‍नान कराएं. फिर  दूध, दही, घी, शहद और चीनी के मिश्रण यानी कि पंचामृत से स्‍नान कराएं. आखिर में शुद्ध जल से स्‍नान कराएं।
गंगासरस्‍वतीरेवापयोष्‍णीनर्मदाजलै: ।
स्‍नापितासी मय देवी तथा शांतिं कुरुष्‍व मे ।।
आदित्‍यवर्णे तपसोsधिजातो वनस्‍पतिस्‍तव वृक्षोsथ बिल्‍व: ।
तस्‍य फलानि तपसा नुदन्‍तु मायान्‍तरायश्र्च ब्रह्मा अलक्ष्‍मी: ।
।। श्रीलक्ष्‍मी देव्‍यै जलस्‍नानं समर्पयामि ।।

वस्‍त्र: अब मां लक्ष्‍मी को मोली के रूप में वस्‍त्र अर्पित करते हुए इस मंत्र का उच्‍चारण करें।
दिव्‍याम्‍बरं नूतनं हि क्षौमं त्‍वतिमनोहरम्  ।
दीयमानं मया देवि गृहाण जगदम्बिके ।।
उपैतु मां देवसख: कीर्तिश्च मणिना सह ।
प्रादुर्भूतो सुराष्‍ट्रेsस्मिन् कीर्तिमृद्धि ददातु मे ।
।। श्रीलक्ष्‍मी देव्‍यै वस्‍त्रं समर्पयामि ।।

आभूषण: अब इस मंत्र का उच्‍चारण करते हुए मां लक्ष्‍मी को आभूषण चढ़ाएं।
रत्‍नकंकड़ वैदूर्यमुक्‍ताहारयुतानि च ।
सुप्रसन्‍नेन मनसा दत्तानि स्‍वीकुरुष्‍व मे ।।
क्षुप्तिपपासामालां ज्‍येष्‍ठामलक्ष्‍मीं नाशयाम्‍यहम् ।
अभूतिमसमृद्धिं च सर्वात्रिर्णद मे ग्रहात् ।।
।। श्रीलक्ष्‍मी देव्‍यै आभूषणानि समर्पयामि ।।

सिंदूर: अब मां लक्ष्‍मी को सिंदूर चढ़ाएं।
ॐ सिन्‍दुरम् रक्‍तवर्णश्च सिन्‍दूरतिलकाप्रिये ।
भक्‍त्या दत्तं मया देवि सिन्‍दुरम् प्रतिगृह्यताम् ।।
।। श्रीलक्ष्‍मी देव्‍यै सिन्‍दूरम् सर्पयामि ।।

कुमकुम: अब कुमकुम समर्पित करें.
ॐ कुमकुम कामदं दिव्‍यं कुमकुम कामरूपिणम् ।
अखंडकामसौभाग्‍यं कुमकुम प्रतिगृह्यताम् ।।
।। श्रीलक्ष्‍मी देव्‍यै कुमकुम सर्पयामि ।।

अक्षत: अब अक्षत चढ़ाएं.
अक्षताश्च सुरश्रेष्‍ठं कुंकमाक्‍ता: सुशोभिता: ।
मया निवेदिता भक्‍तया पूजार्थं प्रतिगृह्यताम् ।।
।। श्रीलक्ष्‍मी देव्‍यै अक्षतान् सर्पयामि ।।

गंध: अब मां लक्ष्‍मी को चंदन समर्पित करें.
श्री खंड चंदन दिव्‍यं, गंधाढ्यं सुमनोहरम् ।
विलेपनं महालक्ष्‍मी चंदनं प्रति गृह्यताम् ।
।। श्रीलक्ष्‍मी देव्‍यै चंदनं सर्पयामि ।।

पुष्‍प: अब पुष्‍प समर्पिम करें.
यथाप्राप्‍तऋतुपुष्‍पै:, विल्‍वतुलसीदलैश्च ।
पूजयामि महालक्ष्‍मी प्रसीद मे सुरेश्वरि ।
।। श्रीलक्ष्‍मी देव्‍यै पुष्‍पं सर्पयामि ।।

अंग पूजन: अब हर एक मंत्र का उच्‍चारण करते हुए बाएं हाथ में फूल, चावल और चंदन लेकर दाहिने हाथ से मां लक्ष्‍मी की प्रतिमा के आगे रखें.
ॐ चपलायै नम: पादौ पूजयामि ।
ॐ चंचलायै नम: जानुनी पूजयामि ।
ॐ कमलायै नम: कटिं पूजयामि ।
ॐ कात्‍यायन्‍यै नम: नाभि  पूजयामि ।
ॐ जगन्‍मात्रै नम: जठरं पूजयामि ।
ॐ विश्‍व-वल्‍लभायै नम: वक्ष-स्‍थलं पूजयामि ।
ॐ कमल-वासिन्‍यै नम: हस्‍तौ पूजयामि ।
ॐ कमल-पत्राक्ष्‍यै नम: नेत्र-त्रयं पूजयामि ।
ॐ श्रियै नम: शिर पूजयामि ।

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– अब लक्ष्मी जी को धूप, दीपक और मिठाई चढ़ाएं। फिर उन्‍हें पानी देकर आचमन कराएं। 
-इसके बाद ताम्‍बूल अर्पित करें और दक्षिणा दें। 
– फिर अब मां लक्ष्‍मी की बाएं से दाएं प्रदक्षिणा करें।
– अब मां लक्ष्‍मी को साष्‍टांग प्रणाम कर उनसे पूजा के दौरान हुई ज्ञात-अज्ञात भूल के लिए माफी मांगे। 
– अब इसके बाद मां लक्ष्‍मी की आरती उतारें।

घर-परिवार, बिजनेस और नौकरी में धन-संपदा में वृद्धि व तरक्की के लिए लक्ष्मी पूजन दीवाली के दिन किया  जाता है,लेकिन इस पूजन की कृपा तभी मिलती है जब इसे शुभ मुहूर्त में किया जाएं और पूरे विधि-विधान से किया जाए। तो चलिए बताते है दीवाली पूजा का समय क्या है और लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त क्या है:

दिवाली 2018- लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त  #Diwali Lakshmi Pujan Shubh muhurat 2018

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लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त

दीपावली के दिन लक्ष्मी जी की पूजा प्रदोषकाल में करना शुभ कहा जाता है। ऐसा मानना है कि दिवाली के दिन मां लक्ष्मी का पूजन विधि-विधान और शुभ मुहूर्त में करने से आप गरीबी,दरिद्रता से बचते है और आपके जीवन में धन की देवी मां लक्ष्मी का आवागमन हो जाता है।

ये है दिवाली पूजन का शुभ मुहूर्त (Diwali Lakshmi Pujan Muhurat):

लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त: शाम 5:57 से 7:53 तक।
प्रदोष काल: शाम 5:27 बजे से 8:06 बजे तक।
वृषभ काल: 5:57 बजे से 7:53 बजे से तक।

हिंदू धर्म में दीपावली का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसी दिन भगवान राम रावण का वध करके 14 साल का वनवास काटकर माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापस लौटे थे।

उस दिन कार्तिक मास की अमावस्या थी और भगवान राम के वापस अयोध्या लौटने पर अमावस्या की उस काली,घनी अंधेरी रात को अयोध्यावासियों ने दीपक जलाकर रोशन किया था, बस तभी से हिंदू धर्म में दीवाली का त्यौहार धूमधाम से दीयों की रोशनी के साथ मनाया जाने लगा।

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जगमग रोशनी का त्यौहार दीवाली उर्फ दीपावली 7 नवंबर 2018 , बुधवार को है (तस्वीर,साभार-गूगल)

इसके अलावा कई अन्य पौराणिक कथाएं भी दीवाली मनाने का प्रमुख कारण है। उन्हीं में से एक श्रीकृष्ण और नरकासुर की कथा है।

दरअसल, दिवाली के दिन ही श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था और दीवाली के दिन ही जैन धर्म के तीर्थंकर महावीर स्वामी ने निर्वाण या मोक्ष लिया था।

इतना ही नहीं, आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती ने कार्तिक की अमावस्या को ही निर्वाण प्राप्त किया था,बस तभी से इस खास दिन को दीवाली के रूप में इस धर्म के लोग भी मनाने लगे।

देखा जाएं तो धार्मिक और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक है दीयों का त्यौहार दीपावली।

दीवाली की शुरूआत धनतेरस (Dhanteras)से होती है। उसके बाद छोटी दीवाली (Chhoti Diwali), बड़ी दीवाली या लक्ष्मी पूजन (Badi Diwali/Lakshmi Pujan) मनाया जाता है

कब है दीवाली? When is Diwali 2018

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दीपावली 7 नवंबर 2018 , बुधवार को है

साल 2018 में दीवाली 7 नवंबर, बुधवार को है। इस दिन विशेषतौर पर लक्ष्मी-गणेश का पूजन किया जाता है और ऐसा करने के पीछे मान्यता है कि संपूर्ण वर्ष मां लक्ष्मी की कृपा से घर,परिवार व बिजनेस पर धनधान्य की वर्षा होती है और विघ्नहर्ता गणेश जी की कृपा से जीवन के सभी विघ्नों का हरण हो जाता है।

दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों मसलन केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में दिपावली का त्यौहार 6 नवंबर 2018 को मनाया जाएगा। इतना ही नहीं, जो भारतीय सिंगापुर में रहते है वे भी 6 नवंबर को ही दीवाली का त्यौहार मनायेंगे लेकिन इसके अलावा पूरे भारत वर्ष में दीपावली का त्यौहार 7 नवंबर 2018 (When is Diwali 2018) को ही मनाया जाएगा। दीपावली एक ऐसा पर्व है जो पूरे पांच दिन तक धूमधाम से मनाया जाता है।

दिवाली की शुरूआत धनतेरस (Dhanteras)से होती है। उसके बाद छोटी दीवाली (Chhoti Diwali), बड़ी दीवाली या लक्ष्मी पूजन (Badi Diwali/Lakshmi Pujan) मनाया जाता है। बड़ी दीवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा (Govardhan Pooja) और फिर भाई दूज (Bhai Dooj) मनाया जाता है। गुलाबी ठंड की दस्तक के साथ ही भारत में दीपावली के दीयों की गर्मी और रोशनी की जगमगाहट देशवासियों को रोशन कर देती है।

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क्यों मनाई जाती है दिवाली? When is Diwali celebrated: 

यूं तो हम आपको पहले ही बता चुके है कि हिंदू धर्म के अनुसार, दीवाली मनाने की प्रमुख वजह तो श्रीराम का चौदह साल का वनवास खत्म करके माता सीता और लक्ष्मण सहित अयोध्या लौटना ही है लेकिन इसके अलावा क्या आपने कभी सोचा है कि फिर इस दिन माता लक्ष्मी और गणेश जी ही की पूजा विशेष रूप से क्यों की जाती है? अगर आपको नहीं पता तो हम आपको बता देते है।

दरअसल पौराणिक कथाओं के अनुसार, धन की देवी मां लक्ष्मी का जन्म इसी दिन हुआ था। राक्षस और देवताओं के बीच हुए समुद्र मंथन के वक्त क्षीर सागर (दूध के समुद्र) से धन की देवी मां लक्ष्मी का प्रादुर्भाव हुआ था और उस समय कार्तिक मास की अमावस्या थी। बस तभी से धन-संपदा की देवी मां लक्ष्मी जी के जन्मदिवस की खुशी में दीवाली का त्यौहार मनाया जाने लगा और मां लक्ष्मी की कृपा से सभी पर धनधान्य की वर्षा होती रहें,इसलिए दीवाली के दिन विशेष रूप से माता लक्ष्मी को पूजा जाता है।

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दीवाली के दिन विशेष रूप से माता लक्ष्मी को पूजा जाता है।

विष्णु जी ने वामन रूप में लक्ष्मी को बचाया था- दीपों के त्यौहार दीपावली को मनाने के पीछे एक अन्य कथा यह भी प्रचलित है कि बलशाली दानव बाली तीनों लोक (पृथ्वी,आकाश,पाताल) पर शासन करना चाहता था। उस समय संपूर्ण पृथ्वी पर गरीबी थी चूंकि राजा बाली ने पृथ्वी का सारा धन रोक लिया था।

बाली को भगवान से असीमित शक्तियां प्राप्त थी इसलिए कोई उसका सामना करने में समर्थ नहीं था। प्रकृति कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं करती और ईश्वर की बनाई सृष्टि में कोई भेदभाव न रहें इसलिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार (विष्णु जी का 5 वां अवतार) के रूप में दानव बाली से अपनी चतुराई से तीनों लोकों (पृथ्वी,आकाश,पाताल) को अपने पगो (पैरों से) नाप लिया था और बाली ने चूंकि वामन अवतार धारी विष्णु को वचन दिया था कि उनके पैरों के नीचे जितना भी हिस्सा आएगा,वे वामन को दान स्वरूप दे दिया जाएगा।

तब बाली सोचा भी नहीं था कि वामन रूप में भगवान विष्णु उसके चंगुल से तीनों लोकों को आजाद करा लेंगे और धन की देवी लक्ष्मी को भी बाली के चंगुल से छुड़ा लेंगे।

बस तभी से इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत और धन की देवी मां लक्ष्मी को सुरक्षित बचाने के लिए धूमधाम से दीवाली के रूप में मनाया जाने लगा।

चूंकि हिंदू धर्म में किसी भी पूजा से पहले भगवान श्री गणेश जी की पूजा को सर्वोपरि माना जाता है,इसलिए मां लक्ष्मी के साथ इस दिन गणेश जी की पूजा भी अनिवार्य होती है।

पांच दिनों का त्यौहार दिवाली इन तिथियों से शुरू हुआ:

दिवाली 2018 (Diwali 2018)——————– —————————-तिथि (Diwali Festival dates)

धनतेरस 2018 (Dhanteras 2018)—————– ———————————-5 नवंबर 2018

छोटी दिवाली /नरक चतुर्दशी (Narak Chaturdashi 2018)————- ————-6 नवंबर 2018

बड़ी दिवाली/ लक्ष्मी पूजन (Badi Diwali/ Lakshmi Pujan 2018)——————-7 नवंबर 2018

गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja 2018)————————————————-8 नवंबर 2018

भाई दूज/भाऊ बीज (Bhai Duj/Bhau Beej 2018)——————————— —–9 नवंबर 2018

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