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महिमा अपरंपार है महाशिवरात्रि त्योहार की, भोलेनाथ करते हैं सबकी मनोकामना पूरी

Mahashivratri vrat katha pujan vidhi Kab Kaise kare mahashivratri puja

भगवान भोलेनाथ की महिमा अपरंपार हैl वैसे तो उनके भक्त हर मास में शिवरात्रि व्रत को बड़ी श्रद्धा भावना से करते हैं

लेकिन फाल्गुन मास की शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहते हैंl हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि के त्योहार का बड़ा महत्व होता हैl

इस दिन दुनिया भर के शिव मंदिरों की भक्तों का तांता लगा रहता हैl मंदिरों को आकर्षक तरीके से सजाया जाता हैl

जागरण होता है, भंडारे आयोजित किए जाते हैंl भगवान शंकर का अभिषेक किया जाता हैl

महाशिवरात्रि व्रत फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता हैl

तद्नुसार वर्ष 2019 में महाशिवरात्रि व्रत 05 मार्च को हैl वर्ष 2019 के महाशिवरात्रि पर बहुत ही अद्भुत संयोग बनता हुआ दिख रहा हैl

इस दिन भगवान शंकर का व्रत रखने और आराधना करने से अत्यधिक पुण्य और मनोवांछित फल की प्राप्ति होगीl

महाशिवरात्रि की कथा

मान्यता है कि फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि को ही भगवान भोलनाथ और माता पार्वती परिणय सूत्र में बंधे थेंl

उनके विवाह की तिथि को महाशिवरात्रि के तौर पर धूमधाम से मनाया जाता हैl

भगवान शिव के उपासक इस दिन व्रत रखते हैंl कई जगहों पर इस दिन भगवान शिव की बारात भी निकाली जाती हैl

एक अन्य कथा के अनुसार एक शिकारी जंगल में शिकार की तलाश में रात भर एक वृक्ष पर बैठा रहा लेकिन उसे कोई भी शिकार नहीं मिलाl

भूख और भय की वजह से उसे रात भर नींद भी नहीं आईl संयोगवश वह जिस वृक्ष पर बैठा था, वह बेल का वृक्ष थाl

समय काटने के लिए वह बेल के पत्तों को तोड़ कर रात भर नीचे गिराता रहाl आधी रात के बाद उसे जंगल में तीन हिरण मिलें,

जिन्होंने बताया कि तुमने जाने अनजाने में जिस स्थान पर बेल के पत्ते तोड़ कर गिराए है, वहां शिवलिंग थाl

इसके बाद उस शिकारी को मोक्ष प्राप्त हो गयाl ये जिस दिन की घटना थी, वह महाशिवरात्रि की तिथि थीl

ऐसे करते हैं महाशिवरात्रि का पूजन

इस दिन भगवान शंकर का दूध, शहद, घी अथवा गंगाजल से अभिषेक किया जाता हैl

इस दिन शिवजी का अभिषेक करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैl

इस दिन पूरे दिन ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करना चाहिएl शिवलिंग पर बेल पत्र, आक और धतूरा चढ़ाना चाहिएl

इस दिन रात्रि में भगवान शिव की पूजा की जाती हैl कुछ लोग इस दिन फलाहार व्रत करते हैं

तो कई जातक निर्जला उपवास करते हैंl भोलेनाथ की आराधना में बहुत विशेष नियम नहीं बनाए गए हैंl

आप अपनी श्ऱद्धा भावना के अनुसार चाहें तो फलाहार के साथ अथवा निर्जला व्रत भी कर सकते हैंl

आप की इच्छा हो तो आप चार पहर का व्रत कर संध्या में पूजा के पश्चात अन्न जल ग्रहण कर सकते हैंl

व्रत करने वालों को इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिएl 

व्रत पूरा करने के पश्चात ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा अवश्य देनी चाहिएl

महाशिवरात्रि के महत्व का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि स्कंद पुराण के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन

भगवान भोलेनाथ का पूजन और व्रत करने वाले जातकों को मोक्ष प्राप्त हो जाता हैl वो जन्म जन्मांतर के बंधन से मुक्त हो जाते हैंl

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