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आज है गणेश संकष्टी चतुर्थी व्रत, जिसे करने से भगवान दूर करते हैं सारे विध्न

Today Sankashti ganesh  chaturthi vrat katha, pooja vidhi

आज यानी 22 फरवरी को संकष्टी चतुर्थी व्रत हैl सनातन धर्म में ऐसी मान्यता है कि

आज के दिन विधि विधान और पूरे निष्ठा भाव से भगवान गणेश की पूजा, अर्चना करने

और उनका व्रत रखने से जातक के तमाम विध्न दूर होते हैं और भगवान अपने भक्तों के तमाम कष्टों को दूर कर देते हैंl

अगर आप भी भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो इस व्रत को जरुर करेंl

आज हम आपको संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत का महत्व और व्रत की विधि बता रहे हैंl

संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा हरिश्चंद्र के नगर में एक कुम्हार को उसके व्यापार में बार बार नुकसान होता थाl

बार बार नुकसान से आजिज आकर कुम्हार एक तांत्रिक की शरण में गयाl

तांत्रिक ने उउसे कहा कि तुम्हे विध्नों और बाधाओं से बचने के लिए किसी की बलि देनी पड़ेगीl

कुम्हार ने तपस्वी ऋषि शर्मा के पुत्र बलि दे दीl उस बालक की माता ने बलि वाले दिन ही भगवान गणेश की पूजा की थीl

पुत्र के गायब होने की खबर पाते ही माता ने भगवान गणेश की आराधना शुरु कर दी

और अगले सुबह उसका पुत्र जीवित मिल गयाl कुम्हार यह देखकर डर गया

और राजा हरिश्चंद्र के पास जाकर अपना अपराध स्वीकार कर लियाl

पहले तो राजा ने इस बात को मानने से इंकार कर दिया लेकिन जब बालक की माता को बुलाकर

इसका रहस्य पूछा तो उसने भगवान गणेश की पूजा की बात बताईl

इसके बाद राजा ने भी भगवान गणेश की महिमा का नमस्कार करते हुए पूरे राज्य में गणेश पूजा करने का आह्वान कर दियाl

वो तिथि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी थीl उसी समय से इस व्रत की परंपरा प्रारंभ हो गईl

आस्था है कि इस व्रत को पूरा करने से तमाम संकट और कष्टों का निवारण होता हैl

संकष्टी चतुर्थी व्रत की विधि

संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत के दिन पूरे दिन उपवास रखा जाता है

और चंद्रमा के दर्शन के उपरातं ही व्रत समाप्त किया जाता हैl व्रत करने वाले इस दिन सिर्फ फलाहार करते हैंl

व्रत के दिन सुबह सुबह स्नानादि से निवृत होकर साफ सुथरे वस्त्र ग्रहण करना चाहिएl

पूजा के लिए ईशानकोण में भगवान गणेश की प्रतिमा को लकड़ी की चौकी पर स्थापित करना चाहिएl

इसके बाद भगवान के समक्ष करबद्ध होकर उन्हें अक्षत, जल, दूर्वा घास, लड्डू, पान और पुष्प अर्पित करना चाहिएl

इसके बाद ओम गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करते हुए अपनी मनोकामना भगवान के समक्ष प्रकट करें और उन्हें प्रणाम करेंl

इसके बाद एक केले के पत्ते पर रोली से स्वस्तिक बना कर उसमें घी का दिया जलाएंl

पत्ते पर सात लाल मिर्च और मसूर की दाल रखेंl इसके बाद दिन भर व्रत रखेंl व्रत तोड़ने के समय चंद्रमा को शहद, चंदन

और दूध का अर्ध्य देंl व्रत के उपरांत भगवान को अर्पित किया हुआ लड्डू प्रसाद के रुप में ग्रहण करेंl

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