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होली में किस रिश्तेदार के किस अंग पर लगाना चाहिए रंग !

नई दिल्ली,14 मार्च : Holi-  होली (Holi)  मौज मस्ती और होली (Holi)  ठिठोली का त्यौहार है। यही एक ऐसा पर्व है जिसमें दुश्मन भी दोस्त बन जाते हैं और गले लग जाते हैं। होली का अपना पारंपरिक महत्व है।

साल भर में घर, परिवार या निजी जिंदगी में किसी भी तरह की कोई दुर्घटना या किसी के साथ मनमुटाव को होलिका दहन के साथ ही समाप्त समझा जाता है। पहले के समय में अगर किसी भी प्रकार का कोई बैर विरोध हो जाता था, तो उसे होली के दिन समाप्त कर दिया जाता था। एक तरह से यह त्योहार दुश्मनी को दोस्ती में बदलने वाला होता है।

हर किसी को लगाते हैं रंग (colour)

होली के दिन हम अपने जानने वाले, इष्ट मित्र, सगे संबंधी, रिश्तेदार, पड़ोसी आदि को रंग गुलाल लगाते हैं और अपने संबंधों को प्रगाढ़ करते हैं। भारतीय संस्कृति में हर रिश्ते का अपना महत्व, अपनी मर्यादा और गरिमा है। होली के दिन भी हमें इस परंपरा का पालन करना होता है।

कई बार रंग गुलाल लगाने में छोटी छोटी गलतियां हो जाती है और खटास दूर होने की बजाय और बढ़ जाती है, इसलिए हमें इन पंरपराओं का पालन करना चाहिए। आपको यह अवश्य जानना चाहिए कि किस संबंधी के किस अंग पर रंग लगाने से रिश्तों में और मजबूती आती है और संबंध मधुर बन जाते हैं।

माता और पिता : हमारी संस्कृति में माता और पिता का स्थान देवताओं से भी ऊंचा माना गया है। होली वाले दिन प्रातःकाल उठकर पिता और माता को प्रणाम करना चाहिए। इसके पश्चात माताजी के गाल पर पिताजी की छाती पर हल्का सा रंग लगा देना चाहिए। इससे माता पिता सुबह सुबह ही आनंदित हो जाता है और ये आनंद पूरे वर्ष बना रहता है।

पति और पत्नी : पति और पत्नी एक दूसरे के पूरक होते हैं। पति और पत्नी का रिश्ता ऐसा होता है वो एक दूसरे के शरीर के किसी भी अंग पर रंग या गुलाल लगाने को स्वतंत्र होते हैं लेकिन इस बात का ख्याल रखा जाना चाहिए कि उन्हें सार्वजनिक तौर पर इसका प्रदर्शन नहीं करना चाहिए। होली के दिन पति पत्नी चाहें तो बेहद निजी तौर पर भी एक दूसरे को रंग लगाकर होली खेल सकते हैं।

छोटा और बड़ा भाई : होली के दिन बड़े भाई के मस्तक पर रंग अबीर गुलाल  लगाकर उनका पैर छूकर आर्शीवाद लेना चाहिए जबकि छोटे भाई के भुजाओं पर रंग लगार उसे आर्शीवाद देना चाहिए।

बड़ी बहन और छोटी बहन : बहन अगर बड़ी हो तो उसके गालों पर प्यार से रंग लगाकर आर्शीवाद देना चाहिए और बहन अगर बड़ी है तो उसके हाथ पर रंग लगाकर उनसे आर्शीवाद लेना चाहिए।

भाभी और देवर : भाभी और देवर का रिश्ता मजाक का रिश्ता होता है। इन्हें शरीर के किसी भी रंग लगाने की छूट हासिल होती है।

चाचा, चाचीः चाचा और चाची के पैर पर रंग डालकर उनसे आर्शीवाद प्राप्त करना चाहिए।

मामा और मामी : मामा और मामी को पूरे शरीर पर रंग लगाने की आजादी होती है।

बुआ और फूफाजी : बुआ और फूफाजी को आराम से और मन भर कर रंग लगाना चाहिए।

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