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भारत का इकलौता ऐसा शहर जहाँ 9 दिनों तक बंद रहती है मिठाई-नमकीन की दुकानें..!

विश्व का एक मात्र शहर जैन समाज के पर्युषण पर्व के दौरान किसी भी दुकान पर पूरे 9 दिन तक मिठाई, नमकीन तथा अन्य कोई खाद्य सामग्री ना तो बनती है और ना ही बिकती है

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पाली/राजस्थान, 27 अगस्त (Pali/Rajsthan) समयधारा : जैन समाज का पर्युषण महापर्व शुरू, फैक्ट्रियों में थमा मशीनों का शोर l 

शहर में 9 दिन किसी दुकान पर मिठाई-नमकीन नहीं बनेगी और ना ही बिकेगी, जैनसमाज के पर्युषण पर्व शुरू हो गए हैं।

इसी के साथ मिच्छामी दुक्कड़म यानी शहर में 9 दिन के लिए शहर की मिठाई-नमकीन की दुकानें बंद हो गई।

साथ ही फैक्ट्रियों में भी मशीनों का शोर थम गया है।

देश में संभवत: अकेला पाली शहर ही ऐसा है, जहां जैन समाज के पर्युषण पर्व के दौरान किसी भी दुकान पर पूरे 9 दिन तक मिठाई,

नमकीन तथा अन्य कोई खाद्य सामग्री ना तो बनती है और ना ही बिकती है।

यहां तक कि प्रमुख बाजारों में नियमित रूप से फल-फ्रूट सब्जी की दुकान चलाने वाले दुकानदार भी अपने व्यापार को बंद रखते हैं।

ऐसा पाली में पहली बार नहीं हो रहा। रियासतकाल से चली रही इस परंपरा का निर्वहन अाज तक अनवरत रूप से जारी है।

संवत्सरी-मिच्छामी-दुक्कड़म करने के साथ ही शहर के बाजार खुल पाएंगे।

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शहर की कुल 3 लाख की आबादी में जैन परिवारों की आबादी महज 30 हजार ही है।

विशेष बात: मिठाई तथा नमकीन तैयार करने वाली करीब 300 से अधिक दुकानें है।

यह सभी दुकानदार अन्य जाति धर्म से है, लेकिन इनमें से कोई भी अपनी दुकान नहीं खोलता।

इसमें भी पर्युषण पर्व को लेकर विशेष ध्यान रखा जाता है, कि प्रसाद तैयार करने में गैस के चूल्हे का ही उपयोग किया जाता है।
भट्टी का उपयोग पूरी तरह से वर्जित है। इनमें से 9 दिन में एक भी नहीं खुलेगी।

देशभर में अपने स्वाद के लिए मशहूर गुलाब हलवा, बालूशाही, कलाकंद की बिक्री प्रतिदिन 3000 किलो से अधिक है,

मगर पर्युषण के दौरान यह दुकानें भी पूरी तरह से बंद रहेगी।

600 फैक्ट्रियां, 20 हजार मजदूर, 9 दिन छुट्टी, वेतन एक का नहीं कटता

पर्युषणके दौरान शहर की 600 फैक्ट्रियों पर भी ताला लगा रहता है।

रोज 50 करोड़ के कपड़े का उत्पादन करने वाले फैक्ट्रियों में 20 हजार मजदूर काम करते हैं। इन श्रमिकों की 9 दिन तक छुट्टी होती है।

खास बात यह है कि 9 दिन तक कोई काम नहीं करने के बावजूद किसी भी फैक्ट्री में इनके वेतन की कटौती नहीं होती।
शहरमें मिठाइयां नमकीन बनाने वाले दुकानदार जैन धर्म के नहीं है,

उन पर दुकानें बंद रखने का कोई दबाव भी नहीं है, मगर पुरखों के जमाने से तय हुई व्यवस्था को वे आज भी निभा रहे हैं।

रियासतकालीन परंपरा का शहर में आज भी हो रहा पालन

जैनसमाज के पर्युषण पर्व पर शहर की गर्म तैयार होने वाले खाद्य पदार्थों की दुकानें बंद रखने का निर्णय रियासतकाल से चला रहा है।

इसका पालन आज भी शहर के लगभग सभी दुकानदार कर रहे हैं। पर्युषण पर्व पर जैन समाज के प्रतिष्ठान भी बंद रहते हैं।……

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