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सदियों पुराना है ‘टैटू’; सिर काट कर लाने वाले योद्धाओं का था प्रतीक!

कभी टैटू का प्रयोग किसी का सिर काट के लाने वाले योद्धा के लिए होता था।

आज कल युवाओं के बीच टैटू का चलन काफी लोकप्रिय हो रहा है। सभी नौजवानों को देखों… तो कहीं-न-कहीं टैटू बनवा रखा होगा। आज के समय में लड़के-लड़कियां टैटू का प्रयोग अपने आप को फैशन से जोड़ने और अपने दोस्तों के बीच अलग से दिखने के लिए करते हैं, लेकिन क्या अपको पता है, नागालैण्ड में कभी टैटू का प्रयोग किसी का सिर काट के लाने वाले योद्धा के लिए होता था।

जी हां! टैटू कोई आजकल का फैशन नहीं बल्कि सदियों पहले भी था, बस टैटू बनाने का उनका मकसद अलग हुआ करता था। हम बात कर रहे हैं, नागालैंड के सदियों पुराने टैटू की परंपरा की। नागालैंड में सदियों पहले टैटू गुदवाना दुश्मन का सिर काटकर लाने का प्रतीक होता था।

जो इन योद्धा दुश्मन का सिर काटकर लाता था, उसके चहरे पर टैटू गोदा जाता था और यह टैटू उनका प्रतिक माना जाता था। इनके अलावा कोई अन्य व्यक्ति टैटू नही बनावा सकता था।

कोन्यांक में कहा गया है कि टैटू गुदवाना एक जनजातिय परम्पंरा थी,  जिसका इस्तेमाल अपनी उपलब्धियों को दर्शाने के लिए होता था।

इसके अलावा शरीर के अन्य हिस्सों पर टैटू पुरूषों के लिए बचपन से बड़े होने तक की यात्रा होती थी, वहीं महिलाओं के लिए टैटू शादी, मां बनने जैसे जीवन चक्र को दर्शाने का जरिया होता था।

लेकिन जैसे-जैसे समय बदलता गया अब यह परंपरा एकदम खत्म हो गई है।