झूठ नहीं हकीकत है यह..! भारत के इस गावं में बिना माँ बने नहीं हो सकती है शादी

राजस्थान/गुजरात,11 जुलाई:  भारत में ही नहीं विश्व भर में कही भी अगर आप शादी से पहले माँ बन जाती है तो तरह-तरह की बातें होती है l भारतीय समाज में तो इसे कलंक माना जाता है l समाज में उस स्त्री की कोई जगह ही नहीं होती जो शादी से पहले माँ बन गयी हो l लोग न जाने उन्हें किन-किन नामों से बुलाते है और न जाने उन्हें कैसी नजरो से देखते है l ऐसे किस्से  सुनने को भी बहुत मिल जायेंगे कि शादी से पहले माँ बनने की वजह से माँ-बाप ने लड़की का गर्भपात करवा दिया या फलां लड़की ने खुदखुशी कर ली क्योंकि वो माँ बनने वाली थी l कुल मिलाकर समाज में  कुंवारी माँ की कोई जगह नहीं l  

पर हम यहाँ आपको एक सबसे बड़ी अविश्वसनीय खबर बताने वाले है जिसे सुनकर आप हैरत में रह जाओगे l भारत में एक ऐसा भी गांव है जहां कि एक जनजाति में शादी से पहले लिव इन रिलेशन में रहना जरुरी है l इतना ही नहीं एक दूसरे के साथ रहते-रहते अगर लड़की माँ नहीं बन सकी तो लड़का उससे अपना रिश्ता तोड़ देता है और उस लड़की से शादी नहीं कर सकता l इसका मतलब यह है कि लड़की का शादी से पहले माँ बनना एक रस्म है और लड़की अगर माँ नहीं बन सकी तो लड़का उससे शादी नहीं करेगा l चाहे माँ न बनने में लड़के का कसूर क्यों न हो !

इस जनजाति का नाम है ‘गरासिया’ जो गुजरात व राजस्थान के कुछ हिस्सों में पायी जाती है l गरासिया जनजाति उदयपुर पाली व गुजरात की कुछ जगहों पर पायी जाती है l  इस जनजाति में लड़का-लड़की जवान होने पर एक दूसरे के साथ लिव इन रिलेशन में रहते है l यहाँ बच्चे होने पर भी लड़के लोग शादी को टालते रहते है l इतना ही नहीं, इस जनजाति के कुछ लोग तो पचास के आस-पास शादी करते है और उनकी शादी में उनके बेटे-बेटियां भी शामिल होती है ! हाल ही में इस जनजाति में लिव इन रिलेशन में रहने वाले एक 80 साल के बुजुर्ग(युवा) ने 70 साल की महिला से शादी की और उनकी शादी में उनके पोते, परपोते भी शामिल हुए !  राजस्थान और गुजरात में इस जनजाति का विवाह मेला लगता है l इस मेले के दौरान लड़का-लड़की एक दूसरे को पसंद करते है और भाग जाते है। भागकर वापस लौटने के बाद वह एक दूसरे के साथ पति-पत्नी के रूप में रहने लगते है l समाज की सहमती के बाद लड़के वाले कुछ पैसे लड़की वालों को दे देते है l कहते है कि यह प्रथा करीब 1000 साल पुरानीं है l  कहते है कि इस जनजाति के एक परिवार में चार भाई थे। उनकी शादी हुई पर तीन को बच्चे नहीं हुए और सिर्फ चौथे को ही बच्चें हुए। इस वजह से कुल को बढ़ाने के लिए इस समाज में यह प्रथा चली आ रही है l

इस सौ फीसदी सच्ची बात से एक बात तो तय है कि हमारे भारतीय  समाज में भी लोग लिव इन रिलेशन में रहते है l उन्हें समाज में उचित मन सम्मान भी मिलता है l  

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