Category - संपादक की कलम से

breaking_news Home slider विचारों का झरोखा संपादक की कलम से

जब अपने ही हो जाए पराएं और लड़नी पड़े उनसे लड़ाई तो क्या करें?

नई दिल्ली,13फरवरी: भले ही इंसान पैदा अकेला होता है और मरता भी अकेला है,लेकिन इस सृष्टि में जन्म के साथ ही उसके कुछ रिश्ते बन जाते है। फिर वो रिश्ता माता-पिता से हो या...

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‘पद्मावत’ रिलीज: हमें क्या देखना चाहिए इसका निर्णय करेगा कौन?

नई दिल्ली: 25 जनवरी को फिल्म ‘पद्मावत’ उर्फ ‘पद्मावती’ कई महीनों से विरोध-प्रदर्शन,हिंसा और आलोचनाओं के बीच आखिरकार देश की सुप्रीम अदालत के आदेश...

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हमने वही किया जो हमें सिखाया गया ,बाबाओं ने इसका फायदा उठाया ..!’इंसान वो गधा है जो एक ही खड्डे में बार-बार गिरता है’

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‘जैनम जयंती शासनम’ : ‘जैन धर्म’ के 8दिवसीय ‘महापर्व पर्यूषण’ की शुरुआत, जाने जैन धर्म के बारे में