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साल 2016 रहा इसरो के लिए ‘टेक्नोलॉजी अचीवमेंट ऑफ द इयर’

चेन्नई, 23 दिसम्बर:  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के लिए बीत रहा यह वर्ष मिली-जुली सफलता और उपलब्धियों वाला रहा।

इसरो ने जहां तकनीकी मोर्चे पर कई कामयाबियां हासिल कीं, वहीं कानूनी मोर्चे पर उसे मायूसी हाथ लगी।

तकनीकी मोर्चे पर इस साल एक साथ 20 उपग्रह लांच करने के अलावा इसरो ने अपना नाविक सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली स्थापित किया और दोबारा प्रयोग में आने वाले प्रक्षेपण यान (आरएलवी) और स्क्रैमजेट इंजन का सफल प्रयोग किया।

इस साल इसरो ने कुल 34 उपग्रहों को अंतरिक्ष में उनकी कक्षा में स्थापित किया, जिनमें से 33 उपग्रहों को स्वदेश निर्मित रॉकेट से और एक उपग्रह (जीएसएटी-18) को फ्रांसीसी कंपनी एरियानेस्पेस द्वारा निर्मित रॉकेट से प्रक्षेपित किया।

भारतीय रॉकेट से प्रक्षेपित किए गए 33 उपग्रहों में से 22 उपग्रह दूसरे देशों के थे, जबकि शेष 11 उपग्रह इसरो और भारतीय शिक्षण संस्थानों द्वारा निर्मित थे।

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी की वाणिज्यिक इकाई एंट्रिक्स कॉरपोरेशन को कुल 500 करोड़ रुपये के ऑर्डर हासिल हुए जबकि अभी 500 करोड़ रुपये के ऑर्डर पर बातचीत जारी है।

इसरो ने स्वदेश निर्मित भू-समकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) श्रृंखला के 2 से 2.5 टन वहन क्षमता वाले एक और रॉकेट ‘जीएसएलवी मार्क 2’ को वैश्विक बाजार में बिक्री के लिए पेश किया।

अंतरिक्ष एजेंसी ने इसके अलावा स्वनिर्मित रॉकेट पोलर सैटेलाइट विहकल (पीएसएलवी) में खुद विकसित किए गए मल्टीपल बर्न तकनीक का वाणिज्यिक इस्तेमाल किया।

इसरो ने दो नेविगेशन सेटेलाइटों की अभिकल्पना तैयार करने के लिए अल्फा डिजायन टेक्नोलॉजीज लि. के साथ एक अनुबंध करने के साथ उपग्रहों के उत्पादन के नए चरण में प्रवेश किया।

तमाम कामयाबियों और उपलब्धियों के बीच इसरो के लिए इस वर्ष कुछ नकारात्मक घटनाएं भी घटीं। एंट्रिक्स कॉरपोरेशन को कानूनी हार का सामना करना पड़ा।

बेंगलुरू की कंपनी देवास मल्टीमीडिया प्राइवेट लिमिटेड और एंट्रिक्स कॉरपोरेशन के साथ हुए अनुबंध को रद्द करने के मामले में एक अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण में भारत को हार झेलनी पड़ी।

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने वाणिज्यिक मोर्चे पर बेंगलुरू की कंपनी टीमइंडस के साथ चांद पर यान भेजने का समझौता किया था।

इसी वर्ष मई में स्क्रैमजेट इंजन का सफल परीक्षण इसरो के लिए बड़ी सफलता रही।

विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (वीएसएससी) के निदेशक के. शिवान ने कहा, “स्क्रैमजेट इंजन वातावरण से ऑक्सिजन खींचकर ईंधन के रूप में इस्तेमाल कर सकता है। परिणामस्वरूप रॉकेट के वजन में काफी कमी लाई जा सकती है जो अधिक से अधिक उपग्रहों को ले जाने में मददगार होगा। रॉकेट के निर्माण में लगने वाली कीमत में भी कमी आएगी।”

जून में इसरो ने भारत के उपग्रह काटरेसैट के साथ अन्य 19 उपग्रहों को प्रक्षेपित किया, जिनमें से एक उपग्रह अमेरिकी कंपनी टेरा बेला गूगल की थी।

हालांकि इसरो के अधिकारियों का इस पर कहना है कि अमेरिकी कंपनियों टेरा बेला और प्लैनेट लैब्स के उपग्रहों को एकसाथ छोड़ा जा सकता था।

इसरो अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की जेट प्रोपल्सन लेबोरेटरी के साथ संयुक्त रूप से दोहरी फ्रिक्वेंसी (एल एंड एस बैंड) वाली सिंथेटिक एपर्चर रडार (एसएआर) इमेजिंग सैटेलाइट ‘नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर सैटेलाइट’ (निसार) के निर्माण पर काम कर रही है, जिसके 2021 तक पूरा होने की उम्मीद है।

एंट्रिक्स के चेयरमैन/प्रबंध निदेशक एस. राकेश ने इससे पहले आईएएनएस से कहा था कि भारत द्वारा निर्मित हल्के वजन वाला रॉकेट पीएसएलवी छोटे उपग्रहों को प्रक्षेपित करने में वैश्विक बाजार में अपन स्थिति मजबूत करता जा रहा है।

इसके साथ ही इसरो साल 2017 में एक नया धमाका करने वाली है। इसरो की योजना अगले वर्ष एकसाथ 83 उपग्रहों को एक रॉकेट के माध्यम से प्रक्षेपित करने की है। इसमें दो उपग्रह भारत के और 81 उपग्रह दूसरे देशों के होंगे।

2017 की शुरुआत में ही इसरो चार टन क्षमता वाले जीएसएलवी रॉकेट के प्रक्षेपण की तैयारी कर रहा है। पहली तिमाही में इसरो कुल तीन उपग्रहों को प्रक्षेपित करेगा।

–आईएएनएस

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समय धारा

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