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#Hans Christian Gram जानियें Google-Doodle के इस वैज्ञानिक के बारें में

Google Doodle in Hindi

नई दिल्ली : हंस क्रिस्चियन ग्राम #Hans Christian Gram   जिन्होंने बैक्टीरिया (Bacteria) को दो भागों में बाटा l 

जो एक महान वैज्ञानिक थे l जिनका जन्म 13 सितम्बर 1853 को हुआ था l

अपने जीवन काल में उन्होंने कई उपलब्धियां हासिल की l  आज गूगल (Google) ने उनके 166वें बर्थडे पर  डूडल (Doodle)  बनाकर उन्हें सम्मानित किया है l

इनकी  मृत्यु 14 नवम्बर 1938 को हुई थी।  मूल रूप से डेनमार्क के निवासी ने अपने जीवन काल में बैक्टीरिया(Bacteria) पर रिसर्च किया अर्थात वे बैक्टीरिया(Bacteria) से सम्बंधित वैज्ञानिक थे।

हंस क्रिस्चियन ग्राम (Hans Christian Gram) ने Gram stain की खोज की थी।

Gram stain एक ऐसा यन्त्र है  या  यूँ कहे की यह एक ऐसा तरीका है,  जिसकी सहायता से जीवाणु को अलग-अलग प्रजातियों में बांटा जा सकता है।

उन्होंने  बैक्टीरिया को ग्राम-धनात्मक  (Gram-positive) और ग्राम-ऋणात्मक (Gram-negative)  वर्गों में विभक्त किया।

अर्थात इनके इस तरीके से इन्होने बैक्टीरिया (Bacteria) को अलग-अलग बाँट दिया।

हंस क्रिस्चियन ग्राम  ने बैक्टीरिया को उनके रासायनिक और भौतिक गुणों के आधार पर वर्गीकृत किया l

बैक्टीरिया की भीतरी झिल्ली के आधार पर और इसके भौतिक और रासायनिक गुणों के आधार पर l

हंस ने इनको अलग अलग भागो में या प्रजातियों के रूप में वर्गीकृत किया।

गूगल डूडल (Google Doodle)

इन्होने बताया कि ग्राम-धनात्मक (Gram-positive) कोशिकाओं में पेप्टिडोग्लाइकन की एक पतली परत होती है।

जबकि ग्राम-ऋणात्मक (Gram-negative) कोशिकाओ में पेप्टिडोग्लाइकन की परत मोटी होती है।

हंस क्रिस्चियन ग्राम (Hans Christian Gram) के पिता का नाम ‘फ्रेडरिक टेरकेल जूलियस ग्राम’ था,

इनके पिता न्यायशास्र सा के प्रोफेसर थे और वे ‘लुईस क्रिस्टियन राउलंड’ नामक संस्था में पढ़ाते थे।

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हंस क्रिस्चियन ग्राम (Hans Christian Gram) ने अपना अध्ययन कोपेनहेगन नामक विश्वविद्यालय में पूरी की

और इसके बाद वे जपेटस स्टीनस्ट्रुप नामक जीव विज्ञानी के पास वनस्पति विज्ञान के सहायक के रूप में कार्य किया।

हंस ने पौधों पर कई प्रकार के अध्ययन किये और इस प्रकार पौधों के गहन अध्ययन करने के पश्चात्

उन्हें औषध विज्ञान का ज्ञान प्राप्त हुआ और पौधों के गहन करने से उन्हें माइक्रोस्कोप का उपयोग करना भी सिख गए।

अपनी मेडिकल की पढाई करने के लिए हंस ने 1878 में स्कूल ने प्रवेश ले लिया,

अर्थात 1878 से उन्होंने अपनी मेडिकल की पढाई शुरू कर दी और उन्होंने 4 साल की पढाई पूरी करके मेडिकल में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।

1878 से लेकर 1885 में इन्होने यूरोप की यात्रा की इसके बाद बर्लिन में 1884 में बैक्टीरिया के वर्गीकरण करने का तरीका निजात किया

और आज उनके इसी काम और खोज के कारण उन्हें विश्व में अलग पहचान मिली है।

आज उनका 166 वाँ जन्मदिन है और इस उपलक्ष में आज गूगल ने अपने डूडल पर उनको स्थान दिया है,

और उनकी इस खोज के कारण इस क्षेत्र में काफी विकास हुआ इसलिए उनकी यह खोज काफी महत्वपूर्ण थी।

सन 1891 ने हंस ने औषध विज्ञान के बारे में बच्चो को पढाया,

तथा इसके साथ ही हंस को कोपेनहेगन विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में पढ़ाने के लिए ऑफर मिला।

Google Doodle in Hindi

फिर इसके बाद सन 1900 में इन्होने इस्तीफा दे दिया यह इस्तीफा मेडिकल का प्रोफ़ेसर बनने के लिए यह इस्तीफा दिया था।

(इनपुट सोशल मीडिया से)

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