OMG! आलू बस खाएं ही नहीं बल्कि आलू से अपने घर का बल्ब भी जलाएं, ये है स्मार्ट ट्रिक

नई दिल्ली, 23 जून : यकीन नहीं आता, पर सच तो यही है की एक आलू पूरे चालीस दिनों तक एलईडी बल्ब को जला सकता है l  शोधकर्ता राबिनोविच और उनके सहयोगी पिछले कुछ सालों से लोगों को यही करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं l ये सस्ती धातु की प्लेट्स, तारों और एलईडी बल्ब को जोड़कर किया जाता है और उनका दावा है कि ये तकनीक दुनियाभर के छोटे कस्बों और गांवों को रोशन कर देगी l

येरुशलम की हिब्रू यूनिवर्सिटी के राबिनोविच का दावा है l “एक आलू चालीस दिनों तक एलईडी बल्ब को जला सकता हैl”

राबिनोविच इसके लिए कोई नया सिद्धांत नहीं दे रहे हैंl ये सिद्धांत हाईस्कूल की किताबों में पढ़ाया जाता है और बैटरी इसी पर काम करती हैl

इसके लिए ज़रूरत होती है दो धातुओं की- पहला एनोड, जो निगेटिव इलेक्ट्रोड है, जैसे कि ज़िंक, और दूसरा कैथोड – जो पॉज़ीटिव इलेक्ट्रोड है, जैसे कॉपर यानी तांबा.

आलू के भीतर मौजूद एसिड ज़िंक और तांबे के साथ रासायनिक क्रिया करता है और जब इलेक्ट्रॉन एक पदार्थ से दूसरे पदार्थ की तरफ जाते हैं तो ऊर्जा पैदा होती है.

इसकी खोज वर्ष 1780 में लुइगी गेल्वनी ने की थी जब उन्होंने मेंढ़क की मांसपेशियों को झटके से खींचने के लिए दो धातुओं को मेंढ़क के पैरों में बांधा था.

लेकिन आप इसी प्रभाव को पाने के लिए इन दो इलेक्ट्रोड्स के बीच कई पदार्थ रख सकते हैं.

एलेक्जेंडर वोल्टा ने नमक के पानी में भीगे हुए कागज का इस्तेमाल किया था. अन्य शोधों में धातु की दो प्लेट्स और मिट्टी के एक ढेर या पानी की बाल्टी से ‘अर्थ बैटरियां’ बनाई गईं थीं.

(इनपुट बीबीसी से )

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