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पहले गए ‘शिव’ फिर गए ‘राम’ दो पाल ने किया सपा का काम तमाम

लखनऊ, 23 अक्टूबर:   उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रविवार को अपना ‘तुरुप का पत्ता’ चलते हुए अपने चाचा और वरिष्ठ मंत्री शिवपाल यादव सहित चार मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके तुरंत बाद मुलायम ने भी जवाबी तौर पर सांसद रामगोपाल यादव को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। पार्टी विधायकों, मंत्रियों की रविवार को बुलाई गई बैठक में अखिलेश ने वरिष्ठ मंत्री शिवपाल सिंह यादव सहित चार मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की घोषणा की। साथ ही अमर सिंह की करीबी और फिल्म विकास परिषद की उपाध्यक्ष जया प्रदा को भी पद से हटा दिया।

बर्खास्त किए गए मंत्रियों में शिवपाल सिंह यादव के अलावा पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह, महिला कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) शादाब फातिमा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री नारद राय शामिल हैं।

अखिलेश यादव ने पार्टी में टूट की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी नहीं बंटेगी। उन्होंने खुद को पिता व सपा का वाजिब उत्तराधिकारी बताया।

सूत्रों के अनुसार, अखिलेश ने अपने आधिकारिक आवास पर मंत्रियों व विधायकों की बुलाई बैठक में भावुक हो गए। उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि वह सोमवार को उनके पिता की ओर से बुलाई गई बैठक में हिस्सा लेंगे।

अखिलेश ने कहा, “नेताजी (मुलायम) केवल पार्टी के नेता नहीं हैं, बल्कि वह मेरे पिता भी हैं। मैं हमेशा उनकी सेवा करूंगा।”

बैठक में अखिलेश ने सीधे तौर पर राज्यसभा सदस्य अमर सिंह पर हमला बोला और उन्हें ‘दालाल’ तक कह दिया। उन्होंने कहा कि अमर सिंह परिवार के साथ-साथ सपा को भी तोड़ने आए हैं। वह भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं।

उन्होंने अपने आधिकारिक आवास पर आयोजित बैठक में शिवपाल और तीन अन्य मंत्रियों की बर्खास्तगी के मुद्दे को उचित ठहराते हुए कहा कि ‘अमर सिंह का कोई भी करीबी मेरे मंत्रिमंडल में नहीं होगा।’

इस घटनाक्रम के बाद सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के घर पर बड़े सपा नेताओं का जमावड़ा लगने लगा। सबसे पहले विधान सभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय और नरेश अग्रवाल वहां पहुंचे। फिर किरणमय नंदा, रेवती रमण, बेनी प्रसाद वर्मा व शिवपाल सिंह यादव भी पहुंचे।

बैठक करीब दो घंटे चली। इसके बाद शिवपाल ने अपनी सभी सरकारी सुविधाएं और सुरक्षा वापस कर दी।

तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम में दिनभर आरोपों और निष्कासनों का दौर चलता रहा। सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि रामगोपाल अपनी बहू और बेटे को घोटाले के मामले में सीबीआई से बचाने के लिए भाजपा के बड़े नेता से तीन बार मिल चुके हैं। उन्होंने हमेशा नेता जी (मुलायम सिंह यादव) और सपा को कमजोर किया है।

रविवार सुबह रामगोपाल यादव का लिखा पत्र सामने के बाद सपा में चल रहा घमासान और तेज हो गया। शिवपाल यादव ने कहा कि पार्टी मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में अगला चुनाव लड़ेगी।

पार्टी से निष्कासित नेता रामगोपाल यादव पर प्रत्यक्ष हमला करते हुए शिवपाल ने कहा कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता सीबीआई के दबाव के कारण पार्टी को अस्थिर करने के लिए भाजपा से मिले हुए हैं।

इस बीच रामगोपाल यादव को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। रामगोपाल ने रविवार को ही एक पत्र कार्यकर्ताओं के नाम लिखा, जिसमें उन्होंने अखिलेश को सपा का भविष्य बताया है।

रामगोपाल ने ‘प्यारे साथियों’ नाम से संबोधित पत्र में कहा है कि अखिलेश के साथ के लोगों ने पार्टी के लिए खून-पसीना बहाया और बड़े बलिदान दिए, जबकि दूसरी ओर ऐसे लोग हैं, जिन्होंने ‘करोड़ों कमाए और सत्ता का दुरुपयोग’ किया।

रामगोपाल के इस पत्र के सामने आने के बाद शिवपाल ने कहा, “हमारे घर के कुछ लोग भाजपा से मिल गए हैं। सीबीआई से बचने के लिए हमारे कुछ लोग भाजपा से मिल गए हैं। अभी मुख्यमंत्री अखिलेश इन बातों को नहीं समझ रहे हैं, उन्हें समझना चाहिए।”

शिवपाल ने पत्र में कहा है, “आप सबने प्रोफेसर साहब का पत्र पढ़ लिया होगा। वह यह सब इसीलिए कर रहे हैं, क्योंकि वह भाजपा से मिल गए हैं। रामगोपाल भाजपा के एक बड़े नेता से तीन बार मिल चुके हैं। वह ये सब इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उनके पुत्र अक्षय यादव एवं पुत्रवधू यादव सिंह वाले घोटाले में फंसे हुए हैं। स्वयं को बचाने के लिए भाजपा के इशारे पर सपा को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं।”

शिवपाल ने आगे लिखा, “मुख्यमंत्री समझ नहीं रहे हैं, लेकिन उन्हें यह बात समझनी चाहिए कि कौन उनका सगा है और कौन उनका शुभेच्छु है। प्रोफेसर साहब हमेशा तिकड़म करते रहते हैं।”

उधर, रामगोपाल का पत्र सार्वजनिक होने के बाद मुलायम सिंह के नजदीकी आशू मलिक ने एक बार फिर फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर बिना नाम लिए रामगोपाल पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा है कि पार्टी का एक बेहद खास शख्स भाजपा के साथ मिलकर समाजवादी पार्टी तोड़ने की साजिश रच रहा है।

सपा से निकाले जाने के बाद प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने सफाई दी। उन्होंने कहा, “मुझ पर शिवपाल यादव द्वारा लगाए गए सारे बयान झूठे हैं। मुझे पार्टी से निकाले जाने का दुख नहीं है, बल्कि दुख इस बात का है कि मुझ पर बेबुनियाद आरोप लगाए गए।”

उन्होंने यह भी कहा, “मैं किसी भी सीबीआई जांच का हिस्सा नहीं हूं और दूसरी पार्टी के नेताओं से मिलते रहना ये तो एक सामान्य बात है।”

उन्होंने अपने बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के बुलावे पर सैफई आए थे। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि वह पार्टी में रहें या न रहें अखिलेश यादव के साथ हमेशा रहेंगे।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अखिलेश शनिवार को भी पार्टी की बैठक में नहीं पहुंचे थे। जबकि शिवपाल ने स्वयं उन्हें आमंत्रित किया था। कार्यकारिणी की इस महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव भी नहीं आए। इस बीच शिवपाल ने अखिलेश समर्थक एमएलसी उदयवीर सिंह को पार्टी से छह साल के लिए निलंबित कर दिया।

शिवपाल ने पार्टी कार्यालय में कार्यकारिणी की बैठक में मुख्यमंत्री अखिलेश को भी आमंत्रित किया था, लेकिन वह बैठक में नहीं आए। शुक्रवार को जिलाध्यक्षों की बैठक में भी अखिलेश नहीं शरीक हुए थे। बाद में उन्होंने जिलाध्यक्षों को अपने सरकारी आवास पर बुलाकर उनके साथ अलग से बैठक की थी।

मुलायम के कुनबे में मची रार को लेकर विरोधियों ने भी रविवार को जमकर अपनी भड़ास निकाली। भाजपा, बसपा व कांग्रेस ने एक सुर में हमला बोला। किसी ने इसे ‘फैमिली ड्रामा’ करार दिया है तो किसी ने अखिलेश सरकार को चार दिन का मेहमान बताया।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “प्रदेश में संवैधानिक संकट है। अखिलेश सरकार अल्पमत में पहुंच गई है। उसे बहुमत साबित करना चाहिए। चार मंत्री के बर्खास्त होने से समस्या का हल नहीं होगा, अखिलेश सरकार को जनता बर्खास्त करेगी।”

बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में चाचा-भतीजे की लड़ाई विकास के बजाय विनाश की ओर ले जा रही है। यह सरकार तीन-चार दिन में बर्खास्त हो जाएगी। सपा अब अपने अस्तित्व की समाप्ति की ओर है।

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि यह सपा का अंदरूनी मामला है। इसका जनता से कोई लेनादेना नहीं है।

उत्तर प्रदेश सरकार में चल रही उठापटक को लेकर राज्यपाल राम नाईक भी पैनी नजर रखे हुए हैं। नाईक के पास मुख्यमंत्री अखिलेश ने चार मंत्रियों की बर्खास्तगी का पत्र भेजा। राज्यपाल ने पत्र को स्वीकार कर चारों मंत्रियों को बर्खास्त किए जाने की संस्तुति की।

राज्यपाल ने कहा कि अखिलेश सरकार पर किसी भी प्रकार का कोई संवैधानिक संकट नहीं है। जब तक बहुमत को कोई चैलेंज नहीं करता, तब तक कोई संकट नहीं है।

–आईएएनएस

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समय धारा

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