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विकास परियोजनाओं पर भारत ने अपना पक्ष रखा और कहा की अधिकारों पर संतुलन होना चाहिए

संयुक्त राष्ट्र, 31 अक्टूबर : विकास परियोजनाओं पर भारत ने अपना पक्ष रखा और कहा की अधिकारों पर संतुलन होना चाहिए  l 

विकास परियोजनाओं के खिलाफ कई विरोधों का सामना कर रहे भारत ने कहा है कि

विकास के अधिकार और नागरिक व राजनीतिक अधिकारों के बीच बेहतर संतुलन होना चाहिए। 

भारतीय मिशन में प्रथम सचिव पॉलोमी त्रिपाठी ने मानवाधिकारों के मुद्दों से निपटने वाली महासभा की

समिति को सोमवार को बताया कि आर्थिक प्राथमिकताएं और सामाजिक संदर्भ उस पथ को परिभाषित करना जारी रखेंगे,

जिसे विभिन्न देश व्यक्तिगत और सामूहिक अधिकारों की प्रक्रिया को जानने के रूप में लेते हैं।”

उन्होंने ‘मानवाधिकार संरक्षण व संवर्धन’ विषय पर हुई चर्चा पर समिति में कहा,

“1993 में ऐतिहासिक वियना घोषणा और कार्रवाई कार्यक्रम ने विकास के अधिकार सहित नागरिक

और राजनीतिक अधिकारों को भी समान स्तर पर रखते हुए आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों को रखा।”

त्रिपाठी ने कहा, “जिम्मेदार लोगों के दायित्वों को पूरा करने के लिए उनकी क्षमता बढ़ाने

और अधिकार धारकों का अधिकारों का दावा करने की क्षमता बढ़ाने के लिए हमारे पास एक संतुलित दृष्टिकोण होना चाहिए।”

भारत में विकास कार्यक्रमों का विरोध नागरिक अधिकार संगठनों द्वारा समर्थित समूहों

और कुछ मामलों में विदेशी शह और समर्थन के साथ किया गया है। 

विरोध का का सामना कर रहीं कई परियोजनाएं ऊर्जा और आधारभूत संरचना क्षेत्र से संबंधित हैं,

जिनका विकास पर उच्च प्रभाव है।

त्रिपाठी ने कहा कि सतत विकास पर संयुक्त राष्ट्र के 2030 एजेंडा के कार्यान्वयन के लिए

अधिकारों के दो सेटों के बीच संतुलन पर विचार प्रासंगिक है।

मानवाधिकारों पर वियना घोषणा पत्र को संयुक्त राष्ट्र विश्व सम्मेलन में स्वीकृति दी गई थी, जिसमें 171 देशों ने भाग लिया था।

–आईएएनएस

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