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3D डूडल के साथ गूगल मना रहा LGBTQ समुदाय के ‘प्राइड के 50 साल’ का जश्न,जानें पूरी यात्रा

प्राइड परेड (Pride Parade) पूरे एलजीबीटीक्यू + समुदाय के लिए उत्सव और मुक्ति का प्रतीक है।

नई दिल्ली, 4 जून : Google doodle celebrating 50 years of pride- गूगल डूडल आज प्राइड के 50 साल  (यौन अल्पसंख्यक आंदोलन के 50 वर्ष) को (Google doodle celebrating 50 years of pride) एक इंटरैक्टिव वीडियो के साथ मना रहा है, इसमे पांच दशक के प्राइड इतिहास (Pride history) के उद्गम को एक बेहद ही शानदार 3D डूडल (3D Doodle) के माध्यम से दिखाया गया है कि कैसे और किस साल में यह बढ़ा और फिर विकसित होते हुए एक प्राइड मूवमेंट बन गया।

दरअसल, प्राइड परेड (Pride Parade) पूरे एलजीबीटीक्यू + समुदाय (LGBTQ+ community) के लिए उत्सव और मुक्ति का प्रतीक है।

2019 स्टोनवेल दंगों की पचासवीं वर्षगांठ का प्रतीक है, जोकि 1969 जून के अंत में न्यूयॉर्क सिटी में घटित हुए थे और जिन्हें अक्सर एलजीबीटीक्यू+ अधिकार आंदोलन (LGBTQ+ rights) की शुरूआत के रूप में उद्धृत किया जाता है।

जून का महीना अब गर्व के महीने (Pride month) के रूप में मनाया जाता है, और विश्वभर में इस दिशा में किए जाने वाले कामों, घटनाओं और सीखने के अवसरों द्वारा चिह्नित किया जाता है।

मैनहट्टन में क्रिस्टोफर स्ट्रीट की एक बार में, 1969 में दंगे स्टोनवेल इन में शुरू हुए थे। वास्तव में दंगों की शुरुआत कैसे हुई, एलजीबीटीक्यू + समुदाय में इसको लेकर विवाद मौजूद हैं, लेकिन इस बात पर सहमति है कि वे दंगे बार पर पुलिस की छापेमारी के कारण ही हुए थे जोकि उस समय आपराधिक काम समझा जाता था।

आमतौर पर मार्शा पी जॉनसन या सिल्विया रिवेरा द्वारा पारंपरिक कहानी में एक ईंट फेंकी जा रही है। ये दोनों समलैंगिक मुक्ति आंदोलन के प्रमुख कार्यकर्ता थे, जोकि विशेष रूप से ट्रांसजेंडर अधिकार आंदोलन के प्रतीक बन गए।

इस साल न्यूयॉर्क शहर द्वारा क्रिस्टोफर स्ट्रीट पर एक स्मारक के साथ दो महिलाओं को सम्मानित किया जाएगा। शहर का कहना है कि ये स्मारक विश्व के पहले स्मारकों में से एक होगा जोकि ट्रांसजेंडर लोगों के लिए समारोह मनाता है।

आज का गूगल डूडल उन समारोहों पर ध्यान केंद्रित करता है जो बाद के वर्षों में दंगों को याद करने के लिए व्यवस्थित रूप से विकसित हुए, साथ ही साथ यह एड्स संकट सरीखे कठिन क्षणों को भी दिखाता है। जो त्रिकोण चिह्न के साथ संकेत देते है कि कार्रवाई की आवश्यकता थी लेकिन 1980 और 1990 के दशक में अमेरिकी सरकार इस संकट पर कार्रवाई करने में विफल रही थी।

इस इतिहास को परेड के विस्तार के रूप में देखा जाता है, जिसे अक्सर प्राइड महीने के सेंटर पीस के रूप कार्य करता देखा जाता है।

Google doodle celebrating 50 years of pride
doodle celebrating 50 years of pride

डूडलर नैट स्वाइनहार्ट ने अपने काम की व्याख्या में कहा है कि “प्राइड परेड (Pride Parade) पूरे एलजीबीटीक्यू + समुदाय के लिए उत्सव और मुक्ति का प्रतीक है,”। वह अपने सहकर्मी सिंथिया चेंग को अपने डूडल के लिए परेड पर ध्यान केंद्रित करने के विचार का श्रेय देते हैं।

“न्यूयॉर्क शहर में क्रिस्टोफर स्ट्रीट पर सक्रियता के अपने शुरुआती दिनों से लेकर आज के विश्वव्यापी समारोहों तक यह शक्तिशाली हुआ है। इसने एक उज्ज्वल व जीवंत समुदाय को सशक्त आवाज दी है।”

श्री स्वाइनहार्ट ने यह भी बताया कि यह डूडल विशेषरूप से “मेरे लिए निहायत ही निजी प्रोजेक्ट था।“ वे आगे लिखते है कि “एलजीबीटीक्यू + समुदाय के एक सदस्य के रूप में, मैं इसमें शामिल संघर्ष की भावना से बखूबी परिचित हूं, स्वीकार्य हूं और मैं इस दुनिया का ही एक हिस्सा हूं।“

उन्होंने कहा, “मैंने पिछले कुछ दशकों में कतारबद्ध लोगों के लिए प्रगति देखी है और आज, हममें से कई लोग आजादी के स्तर का जश्न मना रहे हैं, जो मैं अपने सबसे सपनों में नहीं सोच सकता था, जबकि मैं बड़ा हो रहा था,” उन्होंने जारी रखा।

 “मैं भविष्य में एक ऐसे दिन के लिए आशान्वित हूं, जब हर कोई, चाहे उनकी पहचान कुछ भी हो, खड़े हो सकते है और गर्व के साथ इस उत्सव में मार्च कर सकते है।“

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Reena Arya

रीना आर्य एक ज्वलंत और साहसी पत्रकार व लेखिका है। वे समयधारा.कॉम की एडिटर-इन-चीफ और फाउंडर भी है। लेखन के प्रति अपने जुनून की बदौलत रीना आर्य ने न केवल बड़े-बड़े ब्रांड्स में अपने काम के बल पर अपनी पहचान बनाई बल्कि अपनी काबलियत को प्रूव करते हुए पत्रकारिता के पांच से छह साल के सफर में ही अपने बल खुद एक नए ब्रैंड www.samaydhara.com की नींव रखी।रीना आर्य हर मुद्दे पर अपनी बेबाक राय रखने पर विश्वास करती है और अपने लेखन को लगभग हर विधा में आजमा चुकी है

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