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चीन ने भारत को फिर दिया धोखा,UN में मसूद अजहर को चौथी बार ग्लोबल आतंकी घोषित नहीं होने दिया

इसके साथ ही ट्विटर पर #ChinaBacksTerror और #BoycottChina हैश टैग टॉप पर ट्रेंड करने लगा।

नई दिल्ली/ न्यूयॉर्क 14 मार्च: China vetoes ban on Masood Azhar in UN- चालबाज चीन ने UN/संयुक्त राष्ट्र में मसूद अजहर (China vetoes  ban on Masood Azhar) को फिर बचा लिया। 10 साल में चौथी बार चीन ने मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी (Global terrorist) घोषित नहीं होने दिया चूंकि उसने फिर से वीटो लगाकर जैश सरगना मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित किए जाने से रोक लिया। इसके साथ ही ट्विटर पर #ChinaBacksTerror और #BoycottChina हैश टैग टॉप पर ट्रेंड करने लगा।

गौरतलब है कि जैश-ए-मोहम्मद का चीफ मसूद अजहर भारत में 14 फरवरी पुलवामा आतंकी हमले का मास्टर माइंड है। इस आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। इस आतंकी घटना के बाद भारत ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी (Global terrorist) घोषित करने की गुहार लगाई थी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UNSC) में मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी या ग्लोबल आतंकियों की लिस्ट में डालने के भारत के प्रस्ताव का अमेरिका,फ्रांस,ब्रिटेन और जर्मनी ने भी समर्थन किया था लेकिन चौथी बार चीन ने मसूद अजहर पर वीटो पावर (China vetoes ban on Masood Azhar) का प्रयोग किया और उसे संयुक्त राष्ट्र में ग्लोबल आतंकी घोषित नहीं होने दिया।

मसूद अजहर को बचाने की दलील में चीन ने कहा कि वह बिना सूबतों के कारर्वाई के खिलाफ है। चीन पिछले 10 सालों से मसूद अजहर को बचाता आ रहा है। मसूद अजहर इस समय पाकिस्तान में है। इससे पहले भी भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UNSC) में मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने के लिए प्रस्ताव देता रहा है और हर बार चीन मसूद अजहर को अपनी वीटो पावर (China vetoes ban on Masood Azhar)का प्रयोग करके बचा लेता है।

हालांकि भारत के विदेश मंत्रालय ने इस प्रतिक्रिया पर निराशा जाहिर की है और साथ ही कहा है कि उपलब्ध सभी विकल्पों पर कार्य करते रहेंगे ताकि भारतीयों पर आतंकी हमले करने वालों को न्याय के कठघरे में खड़ा किया जा सके। विदेश मंत्रालय ने उन सभी देशों का आभार व्यक्ति किया है जिन्होंने मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव का समर्थन किया है।

जानें आखिर मसूद अजहर को क्यों बचाता रहता है चीन?

1.चीन भारत को अपना इकोनॉमी कॉम्पिटिटर मानता है। इसलिए वह चाहता है कि भारत अपने घरेलू झगड़ो में उलझा रहे और अपनी इकोनॉमी ग्रोथ पर ध्यान न दे सकें और भारत का रुतबा दक्षिण एशिया के प्रमुख पॉइंट्स पर न जाएं और भारत चीन के मुकाबले एशियाई देशों में इकोनॉमी में पीछे हो जाए। इसलिए अगर चीन मसूद अजहर को बचाता तो वैश्विक स्तर पर भारत चीन के मुकाबले काफी स्ट्रॉन्ग दिखने लगता।

2.चीन पाकिस्तान में सीपैक में 3.8 लाख करोड़ रुपये का इनवेस्टमेंट करेगा। इतना ही नहीं, चीन पाकिस्तान के साथ कई प्रोजेक्ट्स कर रहा है जिनका खर्चा 46 बिलियन डॉलर यानि 3.2 लाख करोड़ है। पाकिस्तान में रजिस्टर्ड फॉरेन कंपनियों में सबसे ज्यादा कंपनियां चीन (77) की ही है।

3.चीन अमेरिका-भारत के गुड रिलेशन्स से खुश नहीं है। इसलिए चीन मसूद अजहर को भारत के खिलाफ एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करता है। चीन दलाई लामा के भारत के साथ संबंधों के भी खिलाफ है चूंकि जैसा भारत मसूद अजहर को मानता है ठीक वैसा ही दलाई लामा को चीन मानता है।

4.उईगर मुस्लिमों के खुले में नमाज पढ़ने पर चीन में प्रतिबंध है। इतना ही नहीं, कई और तरह के बैन चीन ने उईगर मुस्लिम समुदाय पर लगाएं हुए है। उसके इन बैन का समर्थन इस्लामिक सहयोग संगठन के देशों में से केवल पाकिस्तान करता है। यही कारण है कि चीन को इस कारण पाकिस्तान की जरूरत है और वो मसूद को बचाकर कहीं न कहीं खुद की ही मदद करता आ रहा है।

 चीन ने कहा- हम हमेशा अपने रवैये के मुताबिक जिम्मेदारी निभाते रहेंगे

ऐसा नहीं है कि चीन ने कोई पहली बार मसूद अजहर पर वीटो पावर का इस्तेमाल किया है। जैसा कि पहले भी बता चुके है कि पिछले 10 सालों से चीन यही करता आ रहा है। भारत ने वर्ष 2009 में पहली बार संयुक्त राष्ट्र में मसूद अजहर  को ग्लोबल आतंकी घोषित किए जाने का प्रस्ताव दिया था लेकिन तब भी चीन ने अपना वीटो पावर इस्तेमाल करके मसूद अजहर को बचा लिया था और इसके बाद आज तक वो बचाता ही आ रहा है।

चालबाज चीन का बयान

मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी (Masood Azhar Global terrorist)घोषित करने के प्रस्ताव पर चीन की फॉरेन मिनिस्ट्री के स्पीकर लु कंग ने कहा कि “चीन हमेशा अपने रवैये के अनुसार जिम्मेदारी निभाता रहेगा और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् 1267 समिति की मीटिंग में हिस्सा लेगा। हम इस मामले को लेकर सभी पक्षों के साथ संपर्क में है और परस्पर तरीके से ही इस मामले को निपटायेंगे।

अमेरिका ने चीन को दी सलाह

अमेरिका ने भी मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित (Masood Azhar Global terrorist)किए जाने का समर्थन किया है। अमेरिका की फॉरेन मिनिस्ट्री के वाइस स्पीकर रॉबर्ट पलाडिनो ने कहा कि मसूद अजहर जैश-ए-मोहम्मद का फाउंडर है। वह ग्लोबल आतंकी घोषित करने के यूनाईटेड नेशन्स के दायरे में आता है। UN जैश-ए-मोहम्मद को आतंकवादी समूह मानता है।

पलाडिनो ने बताया कि ‘चीन और अमेरिका के परस्पर हित है. दोनों शांति और क्षेत्रीय स्थायित्व लाना चाहते है लेकिन मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने के प्रयासों को नाकाम करने के कारण यह लक्ष्य प्राप्त नहीं हो पा रहा।‘

कब-कब भारत ने मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित कराना चाहा

भारत ने दूसरी बार 2016 में मसूद अजहर को पी-3 के साथ मिलकर बैन लगाने का प्रस्ताव दिया। यह प्रस्ताव 2016 में पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले के पीछे मसूद अजहर का हाथ होने का पता लगने पर दिया गया था।

भारत ने तीसरी बार मसूद अजहर पर प्रतिबंध का प्रस्ताव 2017 में दिया था। तब भी पी-3 देशों ने साथ मिलकर यूएन में मसूद को ग्लोबल आतंकी घोषित करने का प्रस्ताव दिया था। उस समय भी चीन ने वीटो (विरोध) पावर का इस्तेमाल करके मसूद अजहर को बचा लिया था। इसी कारण मसूद अजहर पर प्रतिबंध का प्रस्ताव सेंक्शन कमेटी तक नहीं पहुंच पाता।

भारत ने चौथी बार मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव 14 फरवरी को पुलवामा आत्मघाती हमले (जिसमें 40 सीआरपीएफ के जवान शहीद हुए थे) के बाद 2019 में दिया था और इस बार भी चीन ने मसूद अजहर को वीटो पावर का इस्तेमाल करके ग्लोबल आतंकी घोषित किए जाने से रोक लिया।

वैसे पाकिस्तान के फॉरेन मिनिस्टर शाह महमूद कुरैशी ने सांकेतिक रूप से कहा था कि पाक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित किए जाने का विरोध नहीं करेगा।

 मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगता तो क्या आतंक थम जाता?

इस सवाल का जवाब हमें 26/11 के मुंबई हमले के मास्टर माइंड हाफिज सईद के अंजाम से मिलता है। इस आतंकी हमले के बाद हाफिज सईद को भी यूएन ने ग्लोबल आतंकी घोषित कर दिया था लेकिन हाफिज सईद आज भी पाकिस्तान में भारत के खिलाफ बोलता है और रैलियां करता है। इतना ही नहीं, आज भी हाफिज सईद आतंकवादी तैयार करता है। बस फर्क इतना है कि अब उसका संगठन जमात-उद-दावा अपनी आतंकी करतूतों की जिम्मेदारी खुलेआम नहीं लेता।

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Reena Arya

रीना आर्य एक ज्वलंत और साहसी पत्रकार व लेखिका है। वे समयधारा.कॉम की एडिटर-इन-चीफ और फाउंडर भी है। लेखन के प्रति अपने जुनून की बदौलत रीना आर्य ने न केवल बड़े-बड़े ब्रांड्स में अपने काम के बल पर अपनी पहचान बनाई बल्कि अपनी काबलियत को प्रूव करते हुए पत्रकारिता के पांच से छह साल के सफर में ही अपने बल खुद एक नए ब्रैंड www.samaydhara.com की नींव रखी।रीना आर्य हर मुद्दे पर अपनी बेबाक राय रखने पर विश्वास करती है और अपने लेखन को लगभग हर विधा में आजमा चुकी है

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