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CAA के खिलाफ यूरोपीय संसद में लाया गया प्रस्ताव- भारत ने जताया ऐतराज

बीते दिसंबर में भारत में CAA लागू किया गया था।इसे लेकर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन और आंदोलन हो रहे है

लंदन:Resolution against CAA in European Parliament– देश में आंदोलनों की लहर लाने वाले नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) की खिलाफत की आग यूरोपीय यूनियन की संसद (European Parliament) तक भी पहुंच गई है।

सीएए के खिलाफ (Against CAA) यूरोपीय संसद (EU) में प्रस्ताव लाया गया (Resolution against CAA in European Parliament) है और अब इस पर बहस व वोटिंग होगी।

हालांकि भारत ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज की है। आधिकारिक सोर्सेज के अनुसार, भारत ने कहा है कि संशोधित नागरिकता कानून पूर्णत: भारत का आतंरिक मामला है।

बकौल अधिकारी ‘हमें उम्मीद है कि यूरोपीय यूनियन में इस प्रस्ताव को लाने वाले और इसका सपोर्ट करने वाले लोग सभी तथ्यों को समझने के लिए भारत से संपर्क साधेंगे।

यूरोपीय संसद को कोई भी ऐसी कार्रवाई नहीं करनी चाहिए जिससे कि लोकतांत्रिक प्रकार से चुनी गई विधायिका के अधिकारों पर सवाल खड़े हो।‘

सीएए के खिलाफ प्रस्ताव ईयू में इसलिए लाया गया चूंकि इस कानून के समर्थन वाले सड़क पर नहीं आए बल्कि विरोध वाले आएं है और हमने उन्हें मुंहतोड़ जवाब नहीं दिया है।

इस हफ्ते की शुरुआत में यूरोपीय संसद (European Parliament) में यूरोपियन यूनाइटेड लेफ्ट/नॉर्डिक ग्रीन लेफ्ट (जीयूई/एनजीएल) ग्रुप ने एक प्रस्ताव पेश किया था और अब इस पर बुधवार को बहस होगी और फिर इसके एक दिन बाद वोटिंग होगी।

सीएए (CAA) के खिलाफ EU में लाए गए इस प्रस्ताव (Resolution against CAA in European Parliament) में संयुक्त राष्ट्र के घोषणापत्र, ह्यूमैन राइट्स की सार्वभौमिक घोषणा (UDHR) के अनुच्छेद 15 के अतिरिक्त वर्ष 2015 में हस्ताक्षरित किए गए

भारत-यूरोपीय संघ (Indo-European Union)सामरिक भागीदारी संयुक्त कार्य योजना और ह्यूमैन राइट्स पर यूरोपीय संघ-भारत विषयक संवाद का जिक्र किया गया है।

इस प्रस्ताव में भारत (India) से मांग की गई है कि जो लोग सीएए की खिलाफत कर रहे (Resolution against CAA in European Parliament) है उनके साथ ‘रचनात्मक बातचीत’ हो और ‘भेदभावपूर्ण सीएए’ को निरस्त करने की उनकी मांग पर विचार किया जाए।

इस प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि  ‘संशोधित सीएए भारत में नागरिकता तय करने के तरीके में खतरनाक रूप से बदलाव (Resolution against CAA in European Parliament)करेगा।

इससे नागरिकता खोने वाले लोगों के संबंध में बड़ा संकट विश्व में पैदा हो सकता है और यह बहुत बड़ी मानव पीड़ा का कारण बन सकता है।’

गौरतलब है कि बीते दिसंबर में भारत में CAA लागू किया गया था।इसे लेकर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन और आंदोलन हो रहे है।

भारतीय सरकार (Government of India) ने कहा है कि नया नागरिकता कानून किसी की नागरिकता छीनता नहीं है

बल्कि पड़ोसी देशों में भेदभाव व उत्पीड़न से पीड़ित अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करने और उन्हें नागरिकता प्रदान करने के लिए लाया गया है।

 

Resolution against CAA in European Parliament

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