
Thursday-Thoughts-Sai-Suvichar-Positive-thinking
साईं नाम में सब देव समाए, जो जिस रूप में साईं को ध्यावे,
साईं उस रूप में दर्श दिखावे,
जैसा भाव रहा जिस जन का, वैसा रूप हुआ मेरे मन का।
मेरे पास रहो शांत रहो अन्य मैं संभाल लूँगा।
मैं किसी पर क्रोधित नहीं होता, क्या माँ अपने बच्चों से नाराज हो सकती है?
क्या समुद्र अपना जल वापस नदियों में भेज सकता है?
साई नहीं कहते मुझे चांदी या सोने के सिंघासन पर बिठाओ,
वो तो कहते हैं मन में श्रद्धा सबुरी रखो फिर अपने साईं को बुलाओ।
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