
Angarki Sankashti Chaturthi Ka Mahatva Mangal Dosh Upay
Importance of Angarki Chaturthi: क्यों खास होती है अंगारकी संकष्टी? जानें मंगल दोष दूर करने के अचूक उपाय और पौराणिक कथा
Importance of Angarki Chaturthi को समझना हर उस भक्त के लिए जरूरी है जो भगवान गणेश की विशेष कृपा पाना चाहता है। अंगारकी संकष्टी चतुर्थी न सिर्फ एक सामान्य व्रत है, बल्कि यह ऐसा दिव्य संयोग है जिसमें मंगलवार + संकष्टी चतुर्थी का मेल होता है। मंगल ग्रह को ऊर्जा, साहस, भूमि, विवाह और रक्त से जोड़ा जाता है, जबकि भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं। जब ये दोनों शक्तियाँ एक साथ आती हैं, तो इसे अंगारकी संकष्टी कहा जाता है—और यही कारण है कि यह चतुर्थी बाकी सभी संकष्टी चतुर्थियों से कई गुना अधिक प्रभावशाली मानी जाती है।
हिंदू धर्म में माना जाता है कि अंगारकी संकष्टी पर विधिपूर्वक गणेश पूजा और व्रत करने से मंगल दोष, वैवाहिक अड़चनें, करियर में रुकावटें और मानसिक तनाव धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं। यही वजह है कि यह दिन ज्योतिषीय और आध्यात्मिक—दोनों दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अंगारकी संकष्टी चतुर्थी क्या है?
संकष्टी चतुर्थी हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को आती है।
लेकिन जब यह चतुर्थी मंगलवार को पड़ती है, तब इसे अंगारकी संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है।
- अंगारक = मंगल ग्रह
- संकष्टी = संकटों से मुक्ति
- चतुर्थी = भगवान गणेश की प्रिय तिथि
👉 यानी यह दिन संकटों के नाश और मंगल दोष शांति के लिए विशेष माना जाता है।
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अंगारकी संकष्टी क्यों होती है इतनी खास? (Importance of Angarki Chaturthi)
अंगारकी संकष्टी को खास बनाने के पीछे कई धार्मिक और ज्योतिषीय कारण हैं:
🔴 1. मंगल ग्रह और गणेश जी का अद्भुत संयोग
मंगल ग्रह उग्र, ऊर्जावान और कभी-कभी अशुभ प्रभाव देने वाला माना जाता है।
भगवान गणेश उस उग्रता को शांत कर सकारात्मक दिशा में मोड़ देते हैं।
🔴 2. मंगल दोष निवारण का श्रेष्ठ व्रत
जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष होता है, उनके लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी माना गया है।
🔴 3. साल में कम बार आता है यह योग
अंगारकी संकष्टी साल में 2–4 बार ही आती है, इसलिए इसका महत्व और बढ़ जाता है।
🔴 4. मनोकामना पूर्ति का विशेष अवसर
शास्त्रों में कहा गया है कि अंगारकी पर मांगी गई सच्चे मन की प्रार्थना शीघ्र फल देती है।
मंगल दोष क्या है और यह जीवन को कैसे प्रभावित करता है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब मंगल ग्रह कुंडली के कुछ विशेष भावों (1, 4, 7, 8, 12) में होता है, तो उसे मंगल दोष कहा जाता है।
मंगल दोष के सामान्य प्रभाव:
- विवाह में देरी या बाधा
- पति-पत्नी में कलह
- करियर में संघर्ष
- गुस्सा, चिड़चिड़ापन
- भूमि, संपत्ति से जुड़े विवाद
👉 अंगारकी संकष्टी को मंगल दोष शांति के लिए अचूक उपाय माना गया है।
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अंगारकी संकष्टी पर मंगल दोष दूर करने के अचूक उपाय
🐘 1. गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें
21 या 108 दूर्वा गणेश जी को चढ़ाएं। यह मंगल की उग्रता को शांत करता है।
🔥 2. मंगल मंत्र और गणेश मंत्र का जाप
- “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः”
- “ॐ गं गणपतये नमः” (108 बार)
🕯️ 3. लाल वस्त्र और लाल फूल का दान
लाल रंग मंगल का प्रतिनिधि है। अंगारकी पर लाल वस्त्र दान करने से विशेष लाभ होता है।
🌙 4. चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत तोड़ें
संकष्टी व्रत चंद्रोदय के बाद ही पूर्ण माना जाता है।
🍚 5. नमक रहित व्रत
अंगारकी संकष्टी पर नमक त्यागने से मंगल दोष शांति में सहायता मिलती है।
अंगारकी संकष्टी व्रत विधि (संक्षेप में)
- सुबह स्नान कर संकल्प लें
- दिनभर उपवास रखें
- गणेश जी की पूजा करें
- शाम को चंद्र दर्शन करें
- पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करें
अंगारकी संकष्टी की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय एक ब्राह्मण अत्यंत निर्धन और दुःखी था। उसकी कुंडली में मंगल दोष था, जिसके कारण विवाह और जीवन—दोनों में बाधाएँ थीं।
एक दिन उसे एक ऋषि मिले, जिन्होंने उसे अंगारकी संकष्टी व्रत करने की सलाह दी। ब्राह्मण ने श्रद्धा से यह व्रत किया—मंगलवार को संकष्टी चतुर्थी पर गणेश पूजा, उपवास और चंद्र दर्शन।
कुछ ही समय में—
- उसके विवाह में आ रही बाधा दूर हुई
- जीवन में सुख और स्थिरता आई
- मंगल दोष का प्रभाव समाप्त हुआ
तभी से अंगारकी संकष्टी को मंगल दोष नाशक व्रत माना जाता है।
अंगारकी संकष्टी और विवाह का संबंध
- अविवाहित लोगों के लिए शुभ
- विवाह में देरी हो रही हो तो विशेष लाभ
- दांपत्य जीवन में शांति के लिए श्रेष्ठ
विशेषकर जिनकी कुंडली में मंगल दोष या कुज दोष है, उनके लिए यह व्रत अत्यंत उपयोगी माना जाता है।
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FAQ: अंगारकी संकष्टी चतुर्थी (कम से कम 7 प्रश्न)
1. अंगारकी संकष्टी क्या होती है?
जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को आती है, उसे अंगारकी संकष्टी कहते हैं।
2. यह व्रत कितनी बार आता है?
साल में आमतौर पर 2 से 4 बार।
3. क्या यह मंगल दोष को सच में कम करता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा से किया गया व्रत मंगल दोष के प्रभाव को शांत करता है।
4. क्या महिलाएं यह व्रत कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं और पुरुष—दोनों कर सकते हैं।
5. व्रत में क्या खाना वर्जित है?
अनाज, नमक और तामसिक भोजन वर्जित माना जाता है।
6. क्या बिना व्रत रखे पूजा कर सकते हैं?
हाँ, लेकिन व्रत के साथ फल अधिक माना जाता है।
7. अंगारकी संकष्टी पर कौन-सा मंत्र सबसे प्रभावी है?
“ॐ गं गणपतये नमः” और मंगल मंत्र का जाप श्रेष्ठ माना जाता है।
🙏 Ganpati Bappa Morya!
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