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Tuesday Thoughts : स्वयं के प्रति संतोष दूसरें के प्रति दया,इन्ही दो पंखो से आकाश छू सकते है हम …

मैंने बहुत से इंसान देखें है, जिनके बदन पर लिबास नहीं होता मैंने बहुत से लिबास देखें है.. जिनके अंदर इंसान नहीं होतें...

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स्वयं के प्रति संतोष

दूसरें के प्रति दया 

इन्ही दो पंखो से

आकाश छू सकते है हम …

जीवन की किताबों पर

बेशक नया कवर चढ़ाइये

परन्तु बिखरे पन्नो को

पहले प्यार से तो चिपकाइये  

जिंदगी में उतार-चढाव का 

आना बहुत जरुरी है…

क्योकि ECG में सीधी लाइन 

का मतलब मौत ही होती है…

मैंने बहुत से इंसान देखें है 

जिनके बदन पर लिबास नहीं होता 

मैंने बहुत से लिबास देखें है l

जिनके अंदर इंसान नहीं होतें…

यह Thoughts भी पढ़े : 

Monday Thought : एक मंदिर के बाहर लिखा था.. बेझिझक भीतर चले आइये,

Sunday Thoughts : दुनिया के रीति है, यहाँ मजबूत से मजबूत… 

Saturday Thoughts : ना बादशाह चलता है… ना इक्का चलता है …

Friday Thoughts : जितना तेज़ होता है, उतना तेज़ डाऊनलोड नही होता

Thursday Thoughts : कल शीशा था, सब देख-देख कर जाते थे, आज टूट गया..,

Wednesday Thoughts : प्रत्येक व्यक्ति अलग होता है, हर किसी की क्षमता और कमजोरियां

Monday Thoughts : कटीली झाड़ियों पर ठहरी हुई बूंदों ने बस यही बताया है….,

Sunday Thoughts : वक्त और किस्मत पर कभी घमंड मत करों 

( इनपुट सोशल मीडिया से )

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Dropadi Kanojiya

द्रोपदी कनौजिया पेशे से टीचर रही है लेकिन अपने लेखन में रुचि के चलते समयधारा के साथ शुरू से ही जुड़ी है। शांत,सौम्य स्वभाव की द्रोपदी कनौजिया की मुख्य रूचि दार्शनिक,धार्मिक लेखन की ओर ज्यादा है।

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