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Income Tax Slab 2026-27: हर साल जब देश का आम बजट पेश होने वाला होता है, तो करोड़ों टैक्सपेयर्स की नजरें सिर्फ एक चीज़ पर टिक जाती हैं—Income Tax Slab 2026-27।
यह कोई सामान्य वित्तीय शब्द नहीं है, बल्कि यह सीधे उस पैसे से जुड़ा है जो एक मध्यमवर्गीय व्यक्ति पूरे साल मेहनत करके कमाता है और जिसका बड़ा हिस्सा टैक्स के रूप में सरकार को चला जाता है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत में सैलरीड क्लास पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ा है। महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर है, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य खर्च कई गुना बढ़ चुके हैं, होम लोन और अन्य ईएमआई आम आदमी की मासिक आय को सीमित कर रही हैं।
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ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि Income Tax Slab 2026-27 में क्या ऐसा कोई बदलाव होगा जो मिडिल क्लास को वास्तविक राहत दे सके।
इसी संदर्भ में एक और बड़ा भ्रम बना हुआ है—नई टैक्स व्यवस्था बनाम पुरानी टैक्स व्यवस्था। सरकार नई टैक्स व्यवस्था को सरल, कम झंझट वाली और डिफॉल्ट विकल्प के रूप में पेश कर चुकी है,
लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि आज भी बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स पुरानी टैक्स व्यवस्था को छोड़ नहीं पा रहे हैं।
कारण साफ है—पुरानी व्यवस्था में मिलने वाली कटौतियाँ (80C, 80D, होम लोन ब्याज, NPS) टैक्स बोझ को वास्तविक रूप से कम करती हैं।
हम Income Tax Slab 2026-27 को केवल एक खबर या अनुमान के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक टैक्स गाइड के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
हमने टैक्स सिस्टम की बुनियाद, नई और पुरानी टैक्स व्यवस्था का मूल अंतर और मिडिल क्लास की अपेक्षाओं को समझा।
₹15 लाख की आय पर टैक्स का पूरा गणित, टेबल्स और तुलना के साथ रखा गया।और
भविष्य की संभावनाएँ, 80C-80D, Standard Deduction, Marginal Relief और टैक्स प्लानिंग का अंतिम रोडमैप समझाया गया।
यह पूरा लेख/आर्टिकल उन लोगों के लिए है जो सिर्फ टैक्स भरना नहीं चाहते, बल्कि समझदारी से टैक्स प्लानिंग करना चाहते हैं।
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बजट 2026 और इनकम टैक्स – क्या इस बार मिडिल क्लास की लॉटरी लगेगी?
हर साल जब बजट का महीना आता है, तो देश के करोड़ों सैलरीड और मिडिल-क्लास टैक्सपेयर्स की नजर सिर्फ एक चीज़ पर टिक जाती है—इनकम टैक्स स्लैब।
Income Tax Slab 2026-27 को लेकर भी यही उम्मीदें, आशंकाएँ और सवाल हैं।
पिछले कुछ वर्षों में महंगाई तेज़ी से बढ़ी है—
- घर का किराया
- बच्चों की पढ़ाई
- मेडिकल खर्च
- ईएमआई और इंश्योरेंस
इन सबके बीच टैक्स स्लैब और डिडक्शन लगभग जस के तस बने हुए हैं। यही वजह है कि बजट 2026 से सबसे ज्यादा उम्मीद ₹10–15 लाख सालाना कमाने वाले सैलरीड क्लास को है।
क्यों ₹15 लाख की सैलरी वाला वर्ग सबसे ज्यादा दबाव में है?
₹15 लाख की सालाना आय वाला टैक्सपेयर न तो लो-इनकम स्लैब में आता है, जहाँ छूट ज़्यादा है,
और न ही इतना अमीर कि टैक्स प्लानिंग के महंगे टूल्स (ट्रस्ट, एडवांस स्ट्रक्चर) इस्तेमाल कर सके।
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यही वर्ग:
- सबसे ज्यादा TDS देता है
- सबसे कम लचीलापन रखता है
- और हर साल यही सोचता है:
“नई टैक्स व्यवस्था चुनें या पुरानी?”
Income Tax Slab 2026-27 का असली असर यहीं दिखाई देगा।
नई बनाम पुरानी टैक्स व्यवस्था 2026: असली फर्क कहाँ है?
बजट 2020 में सरकार ने New Tax Regime पेश की थी।
तर्क साफ था—
कम टैक्स स्लैब, कम झंझट, कम डॉक्युमेंटेशन
लेकिन हकीकत यह है कि 2025 तक भी अधिकांश सैलरीड लोग Old Tax Regime से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाए।
क्यों?
क्योंकि सवाल सिर्फ स्लैब का नहीं, डिडक्शन बनाम सरलता का है।
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पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) – समझदारी या मजबूरी?
Old Tax Regime का मूल सिद्धांत
पुरानी टैक्स व्यवस्था इस सोच पर आधारित है कि:
- सरकार आपको बचत और निवेश के लिए प्रेरित करे
- बदले में आपको टैक्स में राहत मिले
इस व्यवस्था में टैक्स स्लैब भले ही ऊँचे हों, लेकिन डिडक्शन्स बहुत ताकतवर हैं।
Old Tax Regime के प्रमुख टैक्स स्लैब (संकेतात्मक)
| वार्षिक आय | टैक्स दर |
|---|---|
| ₹0 – ₹2.5 लाख | 0% |
| ₹2.5 – ₹5 लाख | 5% |
| ₹5 – ₹10 लाख | 20% |
| ₹10 लाख से ऊपर | 30% |
(स्लैब Income Tax Slab 2026-27 में बदले जा सकते हैं, लेकिन स्ट्रक्चर यही रहता है)
Income Tax-राहत या आफत, टैक्स छूट का इन करोड़ों लोगों को नहीं मिलेगा फायदा
Old Tax Regime में मिलने वाली बड़ी कटौतियाँ (Deductions)
1️⃣ Section 80C – ₹1.5 लाख तक
सबसे चर्चित और सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली धारा।
इसमें शामिल हैं:
- PPF
- EPF
- ELSS Mutual Funds
- LIC Premium
- Home Loan Principal
👉 समस्या यह है कि ₹1.5 लाख की लिमिट पिछले 10 सालों से नहीं बदली।
2️⃣ Section 80D – हेल्थ इंश्योरेंस
- Self/Family: ₹25,000
- Parents: ₹25,000 (₹50,000 अगर सीनियर सिटीजन)
आज के मेडिकल खर्चों को देखते हुए यह लिमिट बहुत कम लगती है।
3️⃣ Section 24 – Home Loan Interest
- Self-occupied घर पर ₹2 लाख तक ब्याज की छूट
- यह फायदा New Tax Regime में उपलब्ध नहीं है
Old Tax Regime किसके लिए बेहतर है?
- जिनके पास होम लोन है
- जो नियमित रूप से PPF / ELSS / LIC में निवेश करते हैं
- जिनका हेल्थ इंश्योरेंस कवर मजबूत है
नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) 2026 – सरलता बनाम त्याग
New Tax Regime क्यों लाई गई?
सरकार का मानना था कि:
- हर टैक्सपेयर निवेश नहीं करना चाहता
- हर कोई डॉक्युमेंटेशन नहीं झेल सकता
- टैक्स को सरल बनाना ज़रूरी है
इसलिए नई टैक्स व्यवस्था लाई गई।
New Tax Regime के मुख्य फीचर्स
- ज्यादा स्लैब, लेकिन कम टैक्स दरें
- अधिकांश डिडक्शन खत्म
- स्टैंडर्ड डिडक्शन (हाल के बजट में शामिल)
संक्षेप में:
कम टैक्स, लेकिन कोई बचत का फायदा नहीं
New Tax Regime किसके लिए फायदेमंद है?
- Fresh job करने वाले युवा
- जिनके पास होम लोन नहीं
- जो निवेश नहीं करते या करना नहीं चाहते
₹15 लाख की कमाई पर टैक्स का पूरा गणित – Case Study (Part-1 Introduction)
अब हम उस हिस्से पर आते हैं जिसे लोग सबसे ध्यान से पढ़ते हैं।
क्यों ₹15 लाख का केस सबसे महत्वपूर्ण है?
- यह New vs Old Tax Regime 2026 की असली परीक्षा है
- यहीं दोनों व्यवस्थाओं का फर्क साफ दिखता है
- यहीं से टैक्स बचत या नुकसान तय होता है
हम ₹15 लाख की आय पर पूरा टैक्स कैलकुलेशन टेबल के साथ करेंगे, लेकिन यहाँ आधार समझना जरूरी है।
एक नज़र में: Old vs New Regime – Conceptual Comparison
| बिंदु | पुरानी व्यवस्था | नई व्यवस्था |
|---|---|---|
| टैक्स स्लैब | ज्यादा | कम |
| 80C / 80D | उपलब्ध | नहीं |
| होम लोन ब्याज | ₹2 लाख तक | नहीं |
| सरलता | कम | ज्यादा |
| टैक्स प्लानिंग | जरूरी | नहीं |
Income Tax Slab 2026-27 पर एक्सपर्ट्स की शुरुआती राय
टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार बजट 2026 में सरकार के सामने तीन बड़े दबाव हैं:
- मिडिल क्लास की नाराज़गी
- महंगाई और खर्च में असंतुलन
- New Tax Regime को और आकर्षक बनाना
संभावनाएँ:
- Standard Deduction बढ़ सकती है
- New Regime के स्लैब और सरल हो सकते हैं
- 80C की लिमिट पर फिर चर्चा हो सकती है
Income Tax Slab 2026-27: ₹15 लाख की कमाई पर टैक्स का पूरा गणित – New vs Old Regime
₹15 लाख की आय: क्यों यहीं से टैक्स की असली चोट शुरू होती है?
भारत में ₹15 लाख सालाना आय एक ऐसा स्तर है जहाँ:
- आप “लो टैक्स” कैटेगरी से बाहर हो जाते हैं
- 30% टैक्स स्लैब शुरू हो जाता है
- हर अतिरिक्त ₹1 कमाने पर टैक्स का असर साफ दिखता है
यही वजह है कि Income Tax Slab 2026-27 का सबसे ज्यादा विश्लेषण इसी आय वर्ग के लिए किया जाता है।
Case Study Framework: ₹15 लाख की सैलरी वाला टैक्सपेयर
मान लेते हैं:
- Annual Gross Income: ₹15,00,000
- व्यक्ति Salaried है
- कोई बिज़नेस इनकम नहीं
- आय सिर्फ Salary से है
अब हम इसे दो अलग-अलग टैक्स व्यवस्थाओं में डालते हैं।
🔵 Scenario A: Old Tax Regime (पुरानी टैक्स व्यवस्था)
मान्यताएँ (Assumptions)
- Section 80C निवेश: ₹1,50,000
- Section 80D (Self + Parents): ₹50,000
- Home Loan Interest (Section 24): ₹2,00,000
- Standard Deduction: ₹50,000
📊Old Tax Regime – Step by Step Calculation
| विवरण | राशि (₹) |
|---|---|
| Gross Salary | 15,00,000 |
| Standard Deduction | (-) 50,000 |
| Net Salary | 14,50,000 |
| 80C Deduction | (-) 1,50,000 |
| 80D Deduction | (-) 50,000 |
| Home Loan Interest (Sec 24) | (-) 2,00,000 |
| Taxable Income | 10,50,000 |
Old Tax Regime में टैक्स स्लैब अनुसार टैक्स
📊 Old Regime – Tax Slab Calculation
| Income Slab | टैक्स दर | टैक्स (₹) |
|---|---|---|
| ₹0 – ₹2.5 लाख | 0% | 0 |
| ₹2.5 – ₹5 लाख | 5% | 12,500 |
| ₹5 – ₹10 लाख | 20% | 1,00,000 |
| ₹10 – ₹10.5 लाख | 30% | 15,000 |
| Total Tax | 1,27,500 | |
| Health & Education Cess (4%) | 5,100 | |
| Final Tax Payable | ₹1,32,600 |
🔍 Old Tax Regime का निष्कर्ष
- ₹15 लाख की कमाई पर
- ₹4.5 लाख की कटौतियों के बाद
- टैक्स सिर्फ ₹1.32 लाख
👉 यह तभी संभव है जब:
- आप निवेश करते हों
- होम लोन हो
- हेल्थ इंश्योरेंस लिया हो
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🟢 Scenario B: New Tax Regime (नई टैक्स व्यवस्था)
अब वही ₹15 लाख की आय New Tax Regime 2026 में डालते हैं।
मान्यताएँ
- केवल Standard Deduction उपलब्ध
- कोई 80C, 80D, Home Loan deduction नहीं
📊 New Tax Regime – Step by Step Calculation
| विवरण | राशि (₹) |
|---|---|
| Gross Salary | 15,00,000 |
| Standard Deduction | (-) 50,000 |
| Taxable Income | 14,50,000 |
New Tax Regime – टैक्स स्लैब (संकेतात्मक)
| Income Slab | टैक्स दर |
|---|---|
| ₹0 – ₹3 लाख | 0% |
| ₹3 – ₹6 लाख | 5% |
| ₹6 – ₹9 लाख | 10% |
| ₹9 – ₹12 लाख | 15% |
| ₹12 – ₹15 लाख | 20% |
📊 New Regime – Tax Calculation
| स्लैब | टैक्स (₹) |
|---|---|
| ₹3 – ₹6 लाख (5%) | 15,000 |
| ₹6 – ₹9 लाख (10%) | 30,000 |
| ₹9 – ₹12 लाख (15%) | 45,000 |
| ₹12 – ₹14.5 लाख (20%) | 50,000 |
| Total Tax | 1,40,000 |
| Health & Education Cess (4%) | 5,600 |
| Final Tax Payable | ₹1,45,600 |
🔥 Old vs New Regime: सीधा तुलना (₹15 लाख केस)
📊 Final Comparison
| विवरण | Old Regime | New Regime |
|---|---|---|
| Gross Income | 15,00,000 | 15,00,000 |
| Total Deductions | 4,50,000 | 50,000 |
| Taxable Income | 10,50,000 | 14,50,000 |
| Final Tax | ₹1,32,600 | ₹1,45,600 |
| कौन सस्ता? | ✅ Old Regime | ❌ New Regime |
इस तुलना से क्या सीख मिलती है?
👉 अगर आप पूरा निवेश + होम लोन उपयोग करते हैं,
तो Old Tax Regime अभी भी बेहतर है।
👉 अगर:
- आप निवेश नहीं करते
- होम लोन नहीं है
- टैक्स प्लानिंग से बचना चाहते हैं
तो New Tax Regime मानसिक रूप से आसान है, भले टैक्स थोड़ा ज्यादा हो।
Marginal Relief: जहाँ लोग सबसे ज्यादा कन्फ्यूज़ होते हैं
Marginal Relief क्या है?
अगर आपकी आय:
- ₹7 लाख से थोड़ी ही ज्यादा है
- और टैक्स अचानक बहुत बढ़ जाता है
तो सरकार Marginal Relief देती है।
👉 ₹15 लाख वाले केस में इसका फायदा नहीं मिलता
लेकिन Income Tax Slab 2026-27 में यह मिडिल स्लैब वालों के लिए बहुत अहम है।
होम लोन: Old Regime का सबसे बड़ा हथियार
- ₹2 लाख तक ब्याज पर सीधी छूट
- EMI का बड़ा हिस्सा टैक्स बचाता है
- New Regime में यह पूरी तरह खत्म
यही वजह है कि:
Home Loan + ₹15 लाख आय = Old Regime ज्यादा मजबूत
Income Tax Slab 2026-27: 80C, 80D, Standard Deduction और Tax Planning का फाइनल गेमप्लान
80C और 80D: क्या बजट 2026 में मिडिल क्लास को राहत मिलेगी?
जब भी Income Tax Slab 2026-27 की बात होती है, तो सबसे पहले चर्चा आती है
👉 Section 80C और Section 80D की।
क्यों 80C आज सबसे बड़ा विवाद बन चुका है?
Section 80C की सीमा:
- ₹1.5 लाख
- पिछले 10+ वर्षों से नहीं बदली
लेकिन इसी दौरान:
- महंगाई 2 गुना से ज्यादा बढ़ चुकी है
- शिक्षा और हेल्थ खर्च कई गुना बढ़ गए हैं
- निवेश के विकल्प भी ज्यादा हो चुके हैं
80C की वर्तमान स्थिति (Reality Check)
| Investment Option | Average Annual Need |
|---|---|
| PPF / EPF | ₹70,000 – ₹1,00,000 |
| ELSS Mutual Funds | ₹50,000 – ₹1,00,000 |
| Life Insurance | ₹30,000 – ₹60,000 |
👉 नतीजा:
₹1.5 लाख की सीमा आज के समय में अप्रासंगिक होती जा रही है।
बजट 2026 में 80C बढ़ने की संभावना क्यों है?
टैक्स एक्सपर्ट्स और फाइनेंस एनालिस्ट्स के अनुसार:
- सरकार मिडिल क्लास के दबाव को नजरअंदाज नहीं कर सकती
- चुनावी माहौल और खपत (consumption) को बढ़ाने की जरूरत
- New Tax Regime को अपनाने की रफ्तार उम्मीद से कम
👉 इसलिए Income Tax Slab 2026-27 में 80C को
₹2 लाख या ₹2.5 लाख तक बढ़ाने की मांग मजबूत है।
Section 80D: हेल्थ इंश्योरेंस अब “लक्ज़री” नहीं रहा
80D की मौजूदा सीमा
- Self + Family: ₹25,000
- Parents: ₹25,000 (₹50,000 अगर सीनियर सिटीजन)
समस्या कहाँ है?
आज के समय में:
- एक decent family floater health policy = ₹25,000–₹40,000
- Parents (Senior Citizens) का premium = ₹40,000–₹70,000
👉 लेकिन टैक्स छूट वही पुरानी।
Income Tax Slab 2026-27 में 80D क्यों अहम है?
- कोविड के बाद हेल्थ खर्च की संवेदनशीलता बढ़ी
- Insurance penetration बढ़ाने का सरकारी लक्ष्य
- Preventive healthcare पर फोकस
👉 इसलिए संभावना है कि:
- Self/Family limit → ₹40,000
- Parents limit → ₹60,000
Standard Deduction 2026: सैलरीड क्लास का सबसे सीधा हथियार
Standard Deduction का सफर
- पहले: Transport + Medical Allowance
- फिर: ₹40,000 Standard Deduction
- अभी: ₹50,000
लेकिन सवाल यह है —
क्या ₹50,000 आज भी पर्याप्त है?
क्यों Standard Deduction बढ़ना जरूरी है?
Standard Deduction:
- हर सैलरीड टैक्सपेयर को मिलता है
- Old और New — दोनों Regime में लागू
- कोई डॉक्युमेंटेशन नहीं
यही वजह है कि Income Tax Slab 2026-27 में
Standard Deduction को लेकर सबसे ज्यादा उम्मीदें हैं।
संभावित बदलाव (Expert View)
| विकल्प | प्रभाव |
|---|---|
| ₹75,000 | मिडिल क्लास को तत्काल राहत |
| ₹1,00,000 | New Tax Regime ज्यादा आकर्षक |
अगर Standard Deduction बढ़ता है:
- New Regime में टैक्स का अंतर कम होगा
- Salaried class की disposable income बढ़ेगी
Marginal Relief: अक्सर अनदेखा, लेकिन बेहद जरूरी
Marginal Relief क्या करता है?
मान लीजिए:
- आपकी आय ₹7,00,001 है
- टैक्स अचानक ₹20,000 बढ़ जाता है
👉 Marginal Relief यह सुनिश्चित करता है कि:
टैक्स आपकी आय से ज्यादा न बढ़े
Income Tax Slab 2026-27 में इसका महत्व
- Mid-income taxpayers (₹7–₹10 लाख)
- Bonus या arrears पाने वाले कर्मचारी
- One-time income cases
👉 सरकार इसे और सरल और स्पष्ट कर सकती है।
New Tax Regime बनाम Old Tax Regime: 2026 में कौन जीतेगा?
अब सबसे अहम सवाल —
2026-27 में कौन-सी टैक्स व्यवस्था चुनें?
Old Tax Regime – कब चुनें?
अगर आप:
- PPF / ELSS / LIC में निवेश करते हैं
- Home Loan चल रहा है
- Health Insurance लिया हुआ है
👉 Old Regime अब भी टैक्स के लिहाज से बेहतर है।
New Tax Regime – कब चुनें?
अगर आप:
- Investment नहीं करते
- EMI या Home Loan नहीं है
- Simplicity चाहते हैं
👉 New Regime मानसिक रूप से आसान है।
कौन-सी Regime किसके लिए?
| प्रोफाइल | सही विकल्प |
|---|---|
| ₹15 लाख + Home Loan + Investments | Old Regime |
| ₹15 लाख + No Investments | New Regime |
| Fresh Job / Young Professional | New Regime |
| Family + Insurance + EMI | Old Regime |
31 मार्च से पहले Tax Planning Checklist (Must-Read)
✔️ Section 80C
- ELSS Mutual Funds
- PPF Contribution
- EPF Voluntary Contribution
✔️ Section 80D
- Health Insurance (Self + Parents)
- Preventive Health Check-up
✔️ Section 24
- Home Loan Interest Certificate
✔️ NPS (80CCD)
- Extra ₹50,000 deduction (Old Regime)
Income Tax Slab 2026-27: सबसे बड़ी सीख
- टैक्स बचत सिर्फ स्लैब से नहीं होती
- सही योजना = सही Regime
- ₹15 लाख की आय पर प्लानिंग न करने की कीमत भारी पड़ती है
FAQ 1: Income Tax Slab 2026-27 क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर:
Income Tax Slab 2026-27 वह टैक्स स्ट्रक्चर है जिसके आधार पर वित्त वर्ष 2026-27 में आपकी आय पर टैक्स लगाया जाएगा। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी से तय होता है कि आपकी सैलरी या कमाई का कितना हिस्सा टैक्स के रूप में जाएगा।
FAQ 2: Budget 2026 में Income Tax Slab 2026-27 में बदलाव की कितनी संभावना है?
उत्तर:
बजट 2026 से मिडिल क्लास को राहत देने की मजबूत उम्मीद है। टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार स्लैब, Standard Deduction और कुछ डिडक्शन लिमिट्स में बदलाव संभव है, लेकिन अंतिम फैसला बजट घोषणा पर निर्भर करेगा।
FAQ 3: New Tax Regime और Old Tax Regime में 2026-27 में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर:
Old Tax Regime में 80C, 80D, होम लोन ब्याज जैसी कई कटौतियाँ मिलती हैं, जबकि New Tax Regime में टैक्स दरें कम हैं लेकिन अधिकांश डिडक्शन उपलब्ध नहीं हैं। Income Tax Slab 2026-27 में सही विकल्प आपकी आय और निवेश पर निर्भर करता है।
FAQ 4: ₹15 लाख की सालाना आय पर कौन-सी टैक्स व्यवस्था बेहतर है?
उत्तर:
अगर ₹15 लाख की आय के साथ आपके पास होम लोन, हेल्थ इंश्योरेंस और नियमित निवेश हैं, तो Old Tax Regime आमतौर पर कम टैक्स में फायदेमंद रहती है। बिना निवेश के मामलों में New Tax Regime सरल विकल्प हो सकता है।
FAQ 5: Income Tax Slab 2026-27 में Standard Deduction बढ़ने की संभावना है?
उत्तर:
हां, Standard Deduction को ₹50,000 से बढ़ाकर ₹75,000 या ₹1 लाख करने की मांग लंबे समय से है। बजट 2026 में इसे बढ़ाने की संभावना को टैक्स एक्सपर्ट्स नजरअंदाज नहीं कर रहे हैं।
FAQ 6: Section 80C की सीमा Income Tax Slab 2026-27 में बढ़ेगी या नहीं?
उत्तर:
Section 80C की ₹1.5 लाख सीमा पिछले 10 वर्षों से नहीं बदली है। महंगाई को देखते हुए इसे ₹2 लाख या उससे अधिक करने की मांग है, लेकिन यह बजट 2026 के निर्णय पर निर्भर करेगा।
FAQ 7: Section 80D (Health Insurance) में 2026-27 में क्या बदलाव हो सकता है?
उत्तर:
हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम तेजी से बढ़ने के कारण 80D की सीमा बढ़ाने की मांग है। Income Tax Slab 2026-27 में Self और Parents दोनों के लिए लिमिट बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
FAQ 8: Marginal Relief क्या है और Income Tax Slab 2026-27 में इसका फायदा किसे मिलता है?
उत्तर:
Marginal Relief उन टैक्सपेयर्स को राहत देता है जिनकी आय किसी स्लैब सीमा से थोड़ी ही अधिक होती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि टैक्स आपकी अतिरिक्त आय से ज्यादा न हो।
FAQ 9: Income Tax Slab 2026-27 में टैक्स बचाने के लिए सबसे जरूरी कदम कौन-से हैं?
उत्तर:
सही टैक्स व्यवस्था चुनना, समय पर निवेश करना, हेल्थ इंश्योरेंस लेना, होम लोन ब्याज का लाभ उठाना और 31 मार्च से पहले टैक्स प्लानिंग करना Income Tax Slab 2026-27 में टैक्स बचाने के प्रमुख तरीके हैं।
FAQ 10: Income Tax Slab 2026-27 में New Tax Regime को डिफॉल्ट क्यों बनाया गया है?
उत्तर:
सरकार ने New Tax Regime को सरल और कम डॉक्युमेंटेशन वाली व्यवस्था के रूप में डिफॉल्ट बनाया है ताकि टैक्स सिस्टम आसान हो सके। हालांकि टैक्सपेयर्स के पास Old Tax Regime चुनने का विकल्प अब भी मौजूद है।
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