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करदाताओं के लिए खुशखबरी, ITR फॉर्म में नहीं देनी होगी ये मुख्य जानकारी

साथ ही सरकार ITR फॉर्मे में भी सरकार किसी भी प्रकार का संशोधन नहीं कर रही है...

नई दिल्ली:Taxpayers ITR Form-कोरोनाकाल (Coronavirus) में करदाताओं (Taxpayers) के लिए एक अच्छी खबर आई है।

अगर आप भी टैक्सपेयर है तो यह आपके लिए बड़ी खबर है कि आपको अपने आईटीआर फॉर्मे (Taxpayers ITR Form) में हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन (high value transactions) की डिटेल्स नहीं देनी होगी।

साथ ही सरकार ITR फॉर्मे में भी सरकार किसी भी प्रकार का संशोधन (no modification in ITR Form) नहीं कर रही है।

जी हां,आधिकारिक सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कि टैक्सपेयर्स को अपने Income Tax Return में हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन का ब्यौरा नहीं देना होगा।

क्या है हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन what is high value transactions

हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन में महंगी हवाई यात्राएं, विदेश यात्रा, महंगे होटल में पैसा खर्च करना और बच्चों को महंगा स्कूल में भेजना इत्यादि शामिल हैं।

सोर्सेज की मानें तो फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन (SFT) के बयान के अंतर्गत किसी भी इंफॉर्मेशन का अर्थ यह होगा कि इनकम टैक्स (income tax) को इस प्रकार के हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन की जानकारी वित्तीय संस्थानों द्वारा दी जाएगी।

न्यूज एजेंसी पीटीआई को सूत्रों ने बताया कि, ‘‘इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म (Taxpayers ITR Form) को संशोधित (Modified) करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।’’

उन्होंने आगे बताया कि, ‘‘करदाता को अपने रिटर्न में उच्च मूल्य वाले लेनदेन का ब्यौरा देने की जरूरत नहीं होगी।’’

उनके अनुसार,हाईवैल्यू ट्रांजैक्शन के मामले ज्यादातर ऐसे हैं जिनमें बड़ी रकम के सामान की खरीद होती है लेकिन खरीदने वाला आईटीआर फाइल (ITR File)नहीं करता क्योंकि वह अपनी सालाना इनकम 2.5 लाख सालाना से कम दिखाता है।

इन हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन में महंगी हवाई यात्राएं, विदेश यात्रा, महंगे होटल में पैसा खर्च करना और बच्चों को महंगा स्कूल में भेजना शामिल हैं।

 

दरअसल, वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इनकम टैक्स एक्ट (income tax Act) के अनुसार पहले ही हर बड़े ट्रांजैक्शन में PAN या आधार की जानकारी देना अनिवार्य किया गया है।

साथ ही थर्ड पार्टी को इसकी जानकारी आयकर विभाग को देना जरूरी है। ऐसे में करदाताओं से ही जानकारी लेना सही विचार नहीं है।

 

 एक बड़ा वर्ग नहीं देता टैक्स

सूत्रों के अनुसार, भारत में यह सर्वविदित है कि बहुत ही छोटा तबका टैक्स देता है और ऐसे सभी लोग जिन्हें टैक्स देना चाहिए, असल में वह टैक्स नहीं दे रहे हैं।

इनकम टैक्स विभाग(Income tax department) वॉलेंटरी कम्प्लायंस पर अधिक से अधिक निर्भर है इसलिए SFT के जरिए थर्ड पार्टी से खर्च का डाटा कलेक्ट करना बेहतर और अधिक प्रभावकारी है।

इससे टैक्स चोरी करने वाले लोगों की पहचान करना बेहतर तरीका है।

इनकम टैक्स विभाग फिलहाल बचत खाते में नकद जमा/निकासी, अचल संपत्ति की खरीद/बिक्री, क्रेडिट कार्ड भुगतान, शेयर की खरीद, बांड, विदेशी मुद्रा, म्यूचुअल फंड्स समेत अन्य ट्रांजैक्शन के जरिए जानकारियां हासिल करता है।

 

Taxpayers ITR Form

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shweta sharma

श्वेता शर्मा एक उभरती लेखिका है। पत्रकारिता जगत में कई ब्रैंड्स के साथ बतौर फ्रीलांसर काम किया है। लेकिन अब अपने लेखन में रूचि के चलते समयधारा के साथ जुड़ी हुई है। श्वेता शर्मा मुख्य रूप से मनोरंजन, हेल्थ और जरा हटके से संबंधित लेख लिखती है लेकिन साथ-साथ लेखन में प्रयोगात्मक चुनौतियां का सामना करने के लिए भी तत्पर रहती है।

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