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18000 हजार करोड़ में TataSons ने किया AirIndia का वेलकम बेक

Air India हुई टाटा की, 18000 करोड़ में जीती बोली, नजदीकी प्रतिद्वंद्वी से 2900 करोड़ रुपये से जीती बोली

tata group won air india bidding 

नई दिल्ली (समयधारा) : 18000 हजार करोड़ में Tata ने किया AirIndia का वेलकम बेक l 

आखिरकार एयर इंडिया को टाटा संस ने सबसे बड़ी बोली लगाकर जीत लियाl

पिछले कई साल से टलते टलते आखिरकार Air India के लिए दो बोली लगी।

एक टाटा संस ने लगाई और दूसरी बोली स्पाइसजेट के चेयरमैन अजय सिंह ने।

Air india की बोली टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा संस ने जीत ली है और 65 साल बाद एकबार फिर एयरइंडिया टाटा ग्रुप के पास लौट आई है।

DIPM के सेक्रेटरी तुहीन कांत ने कहा कि Air India के लिए टाटा ग्रुप ने 18,000 करोड़ रुपए की बोली लगाई थी।

Air India का 15300 करोड़ रुपए का कर्ज टाटा चुकाएगी। एयर इंडिया पर 31 अगस्त तक 61,560 करोड़ रुपए का कर्ज था।

इसमें 15300  करोड़ रुपए टाटा संस चुकाएगी जबकि बाकी के 46,262 करोड़ रुपए AIAHL (Air India asset holding company) भरेगी।

2009 से अब तक सरकार ने Air India में 1,10,276 करोड़ रुपए इनवेस्ट किए हैं।

कंपनी के लॉस की भरपाई सरकार की गारंटीड लोन के जरिए होती रही है। tata group won air india bidding 

उम्मीद है कि 10 दिसंबर 2021 तक यह डील पूरी हो जाएगी और सरकार Air India का हैंडओवर टाटा संस को दे देगी।

Air India का रिजर्व प्राइस 12906 करोड़ रुपए तय हुआ है।

पिछले दो दशकों से भारत सरकार एयर इंडिया के निजीकरण की कोशिश कर रही थी।

इस दौरान केंद्र में 5 बार सरकारें बदलीं। आइए जानते हैं कि घाटे में चल रही इस सरकारी एयरलाइन के निजीकरण का सफर कैसा रहा

एयर इंडिया हमेशा से सरकारी कंपनी नहीं थी। इसे 1932 में जेआरडी टाटा ने “टाटा एयरलाइंस” के नाम से शुरू किया था।

शुरु में यह कराची से मद्रास तक वीकली फ्लाइट सर्विस मुहैया कराती थी, जो अहमदाबाद और बॉम्बे होते हुए जाती थी।

इस एयरलाइन ने अपने पहले साल में 155 यात्रियों और 10.71 टन चिठ्ठियों को लेकर 2,60,000 किलोमीटर की उड़ान भरी।

इस दौरान इसने 60,000 रुपये का मुनाफा कमाया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह एयरलाइन एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी में बदल गई और इसका नाम एयर इंडिया हो गया।

इसके ठीक बाद 1948 में भारत सरकार ने इसमें 49 पर्सेंट हिस्सेदारी खरीद ली।

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फिर 1953 में सरकार एयर कॉरपोरेशन एक्ट पासकर एयरलाइन में जेआरडी टाटा से मेजॉरिटी हिस्सेदारी खरीद ली।

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