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Mother’s Day special: ‘मां’ की ममता तय करती है बच्चों का भविष्य

हमारे भारतीय समाज में आज भी ऐसी मांओं की कोई कमी नहीं जो बेटों की मां होने के घमंड में अपने ही बेटों का भविष्य अंधकारमय कर देती है,तो वहीं कुछ विरला मांए ऐसी भी है जो अपने बेटों की गलतियों को चुनौती देती है और जब वे भटकते है तो उन्हें सबक भी सिखाती है।

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आज फिर से लोग ‘माँ’ को सर आँखों पर रखेंगे l फिर भले ही वे साल भर उस ‘माँ'(Mother) को बतौर माँ तो छोड़ो, एक औरत और एक इंसान होने का भी सम्मान न देते हो। 

पर आज वो माँ के लिए सबकुछ करने को तैयार हो जायेंगे Mother’s Day पर वह यह जताने में पीछे नहीं हटेंगे कि

उनकी जिंदगी में ‘माँ’ ही सबकुछ है और वह माँ के सबसे योग्य पुत्र या पुत्री है l

काश यह दिखावा नहीं होता l काश, हर दिन माँ को वह सम्मान मिलता जिसके वो काबिल है l

आज एक ऐसी ही दो मांओं की एक ‘सच्ची कहानी’ बयां करेंगे, जिसमे कहानी के पात्रों के नाम उनकी निजता का सम्मान करते हुए बदल दिए गए है(Mother’s day Special-Mothers-love-decides-the-future-of-her-children)l

मुंबई(Mumbai) और दिल्ली(Delhi) में रहने वाली दो अलग-अलग कहानियां l

पहले बात करते है मुंबई की एक ऐसी माँ की,जो रूढ़िवादी सोच से ओतप्रोत है,जिसे लगता है कि उसने एक नहीं बल्कि तीन-तीन बेटों को जन्म देकर इस धरती पर एहसान कर दिया और जिसने अपनी जिंदगी में अपनी ‘ममता’ की वजह से अपने ही पुत्रों का भविष्य चौपट कर दिया l

यह माँ जिसका नाम भंवरी बाई था l  जिसके 3 पुत्र और 6 बेटियों है l इस माँ(Mother)ने किस तरह से अपने बच्चों के भविष्य को बिगाड़ाl

भंवरी बाई के 3 पुत्रों में सबसे बड़े पुत्र के दो लड़के है l वही बीच वाले पुत्र की चार लड़कियां l सबसे छोटे वाले पुत्र को एक लड़का और एक लड़की हैl

अपने बड़े पुत्र को ज्यादा प्यार देने की वजह से उसने उसकी बुराइयों, उसकी ख़राब आदतों को समय पर नहीं रोका,जिसका नतीजा यह हुआ कि उसके सबसे बड़े पुत्र ने अपना भविष्य ही चौपट कर दिया l

बचपन और जवानी में हर तरह के सुख भोगने वाला उसका सबसे बड़ा पुत्र आज संघर्ष भरी जिंदगी जी रहा है l अपने कर्मों का फल भुगत रहा है l

इसी माँ ने यह गलती फिर की और अपने दूसरे पुत्र को भी गलत आदतों को बढ़ावा दिया

नतीजा, फिर वही जवानी में सभी तरह के ऐशो-आराम से जिंदगी जीने वाला दूसरा पुत्र भी इस समय जिंदगी और मौत के बीच की लड़ाई लड़ रहा है l

वही तीसरा पुत्र, जिसके जवान होते-होते वह इस दुनिया में ही नहीं रही, पर बचपन में उसे भी ज्यादा लाड लड़ाया,

जिसके चलते वह पढ़ाई न कर सका और आज जिंदगी में जिस मुकाम पर वह पहुंचा है,उससे कहीं बेहतर तरक्की करके वह अपनी पहचान बना सकता था। 

यहाँ मैं 9 पुत्र/पुत्रियों की माँ भंवरी को दोष नहीं दे रहा,पर समाज की उन सभी मांओं को एक एहसास जरुर दिलाना चाहता हूँ,

जो अपनी अंधी ममता और गलत परवरिश के कारण अपने ही बच्चों का भविष्य ख़राब कर रही(Mother’s day Special-Mothers-love-decides-the-future-of-her-children)है l

‘माँ’ होना एक बहुत ही बड़ी जिम्मेदारी है,’माँ’ सिर्फ ममता की मूर्ति बनकर नहीं रहनी चाहियें, उसे आगे बढ़कर कई तरह के रूप में अपने आप को ढालना होता है l

अगर माँ सिर्फ ममता की मूरत बनकर रहेगी, तो वह भंवरी माँ की तरह होगी और वही अगर माँ ‘दुर्गा के नौ अवतारों’ में होगी तो वह सही अर्थों में ‘माँ’ कहलाएगी l

अब बात करते है दिल्ली में रहने वाली इस ‘माँ’ कविता की l संयोग से इस माँ के भी 9 पुत्र/पुत्रियाँ है l

दो बेटों और 7 बेटियों की इस माँ ने न सिर्फ अपने बच्चों पर ममता लुटाई, बल्कि उनके उज्जवल भविष्य के लिए अपने जिंदगी के अंतिम दिनों तक वह लड़ती रही l

कविता ने अपने सभी बच्चो को बेहद ही प्यार दिया, पर अंत समय में सिर्फ ममता का कर्ज उसकी कुछ बेटियों ने ही उसे चुकायाl इसमें उसकी ममता का कोई दोष नहीं था l

दोनों बेटों ने माँ को,सिर्फ और सिर्फ अपना वो हथियार बनाया,जिससे उनका फायदा हो l

इस माँ ने अपने बच्चों की परवरिश में कोई गलती नहीं की, लेकिन एक वक्त पर वह भी पुत्र मोह में अंधी हुई,बेटियों से ज्यादा बेटों पर भरोसा किया l

किंतु वक्त रहते अंत समय में उसने अपनी गलतियों को सुधारा और अपने दोनों नालायाक बेटों को सबक सिखायाl

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एक तरफ भंवरी बाई ने अपने पहले पुत्र के प्यार में उसकी गलतियों को नजरअंदाज किया और उसे बढ़ावा दिया नतीजा वह बिगड़ता चला गया l

जब वह पूरी तरह से बिगड़ गया l उसे घर से निकाल दिया पर दूसरे पुत्र के लिए भी उसकी ममता कम नहीं हुई और उसने फिर से वही गलती दौहराई नतीजा,दूसरे पुत्र को भी उसे घर से निकालना पडा l

मां का निश्चछल प्यार कब अंधी ममता में बदल गया भंवरी बाई को पता ही नहीं चला l जिसका नतीजा उसके दो पुत्रों ने उसके पति और उसकी इज्जत को समाज में तार-तार कर दिया l

इंसान की फितरत जल्दी नहीं बदलती l भंवरी बाई ने अगर अपनी पहली ही गलती पर ध्यान दिया होता तो शायद आज भंवरी बाई की कहानी कुछ और होती l

अंत समय में अस्पताल में जब भंवरी बाई का निधन हुआ, तो वहां खडा मैं यह सोच रहा था क्या “माँ की ममता” सच में आपका भविष्य तय करती है l

मेरी इस कहानी की दूसरी माँ यानी कविता ने भी एक गलती की अपने दोनों पुत्रों पर जरुरत से ज्यादा भरोसा करने की गलती।

सोचा वह उसके बुढ़ापे का सहारा बनेंगे,पर हुआ उल्टा। पहला पुत्र शादी के कुछ दिनों बाद ही अलग रहने लगा

और दूसरा पुत्र  यानी उसकी नौ संतानों में आठवीं संतान l उसको छोड़ उसी के पैसों से अमेरिका में अपनी फैमिली को ले जा कर वहां बस गया l

अंत दिनों में उसके जीते जी उसके पुत्र और तीन पुत्रियों ने उसे मरा सा छोड़ दिया l

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लेकिन कविता अपने वजूद को बचाने के लिए कोर्ट तक गई,जहां उसकी चार बेटियों ने उसका साथ दिया।

इतना ही नहीं, अंत समय में बेटों की मंशा जानकर खुद स्वाभिमानी कविता ने निर्णय लिया कि उसकी चिता को मुखाग्नि उसके बेटे नहीं बल्कि उसकी सबसे छोटी पुत्री,जोकि कुंवारी है,वह देगी।

अंत समय में कुदरत ने भी मां कविता की अंतिम इच्छा पूरी की और हालात भी ऐसे बनाएं कि उसके दोनों पुत्र अग्नि तक देना तो दूर,आखिरी समय में मां के दर्शन तक नहीं कर सकें।

यह कविता की ही अच्छी परवरिश का नतीजा था कि उसकी सबसे छोटी बेटी ने अपनी बहनों के साथ मिलकर अंत समय में मां को सभी सुख-सुविधाएं मुहैया कराई,जिसका नतीजा यह था कि अपने आखिरी समय में कविता ने जब इस दुनिया को अलविदा कहा तो उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान के साथ बहुत गहरा सुकून था,मानों वह खुशी-खुशी इस दुनिया को अलविदा कह गई।

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जहां भंवरी बाई की कहानी में माँ की अंधी ममता ने उसके पुत्रों का भविष्य अंधकारमय कर दिया,

तो वहीं कविता की कहानी में उसकी ममता ने उसके पुत्रों के भविष्य को तो उज्जवल बनाया ही, साथ ही साथ उसकी सही परवरिश ने उसे सुकून भरी मौत भी दी l

इन दोनों मांओं की जिंदगी का मैं साक्षी रहा हूं और मैं भी वहां खड़ा-खड़ा सोच रहा था कि क्या सच में मां की ममता बच्चों का भविष्य निर्माण करती(Mother’s day Special-Mothers-love-decides-the-future-of-her-children) है?

इन दो कहानियों में सबक कई है l ममता भी है, तो उसकी हद पार होने पर होने वाले दुष्परिणाम भी है l

हमारे भारतीय समाज में आज भी ऐसी मांओं की कोई कमी नहीं जो बेटों की मां होने के घमंड में अपने ही बेटों का भविष्य अंधकारमय कर देती है,तो वहीं कुछ विरला मांए ऐसी भी है जो अपने बेटों की गलतियों को चुनौती देती है और जब वे भटकते है तो उन्हें सबक भी सिखाती है।

इससे तो यही सिद्ध होता है कि मां की ममता ही बच्चों का भविष्य तय करती(Mother’s day Special-Mothers-love-decides-the-future-of-her-children)है।

जिस प्रकार ज्यादा मीठा शरीर में डायबिटीज का कारण बनता है,ठीक उसी प्रकार अंधी ममता और ‘बेटों की मां होने का घमंड’ खुद मां के जीवन में ऐसा डायबिटीज बन जाता है जो लाइलाज होता है।

लेकिन वहीं, अगर मां समय रहते खुद के और बच्चों के भविष्य के लिए नीम सी कड़वी भी हो जाएं, तो न सिर्फ बच्चे का भविष्य स्वस्थ शरीर की तरह उज्जवल हो जाता है,बल्कि मां का जीवन भी मिसाल बन जाता है।

 

 

 

 

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Dharmesh Jain

धर्मेश जैन www.samaydhara.com के को-फाउंडर और बिजनेस हेड है। लेखन के प्रति गहन जुनून के चलते उन्होंने समयधारा की नींव रखने में सहायक भूमिका अदा की है। एक और बिजनेसमैन और दूसरी ओर लेखक व कवि का अदम्य मिश्रण धर्मेश जैन के व्यक्तित्व की पहचान है।

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