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सुशासन दिवस (Atal Ji Special): भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर उनके 5 ऐतिहासिक भाषण, जो आज भी रोंगटे खड़े कर देते हैं
क्यों खास है आज का दिन?
हर साल 25 दिसंबर को भारत सुशासन दिवस (Good Governance Day) के रूप में मनाता है। यह दिन केवल एक औपचारिक अवसर नहीं, बल्कि उस महान व्यक्तित्व को स्मरण करने का दिन है, जिसने राजनीति को संवेदना, शालीनता और सिद्धांतों से जोड़ा—भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी।
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अटल जी सिर्फ एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे कवि, विचारक, वक्ता और राष्ट्रपुरुष थे। उनके भाषण केवल शब्दों का संग्रह नहीं होते थे, बल्कि उनमें राष्ट्र की आत्मा बोलती थी। आज उनकी जयंती पर हम उन 5 ऐतिहासिक भाषणों को याद कर रहे हैं, जो आज भी सुनने पर रोंगटे खड़े कर देते हैं।
सुशासन दिवस (Good Governance Day) का महत्व
सुशासन दिवस की शुरुआत वर्ष 2014 में की गई थी। इसका उद्देश्य है—
- पारदर्शी शासन को बढ़ावा देना
- जवाबदेही सुनिश्चित करना
- नागरिकों तक योजनाओं का प्रभावी लाभ पहुंचाना
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अटल बिहारी वाजपेयी का पूरा राजनीतिक जीवन सुशासन की मिसाल रहा। उनके लिए सत्ता साधन नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम थी।
अटल बिहारी वाजपेयी: राजनीति में कविता और करुणा
अटल जी का व्यक्तित्व राजनीति की कठोरता से अलग था। वे विरोधियों का भी सम्मान करते थे। संसद में उनके भाषणों को सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों समान श्रद्धा से सुनते थे।
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उनकी कुछ प्रसिद्ध पंक्तियां—
“हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा…”
आज भी युवाओं को प्रेरणा देती हैं।
🔥 अटल जी के 5 ऐतिहासिक भाषण, जो आज भी दिल को छू जाते हैं
1️⃣ संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी भाषण (1977)
📍 स्थान: संयुक्त राष्ट्र, न्यूयॉर्क
🎙️ पद: भारत के विदेश मंत्री
यह वह क्षण था जब हिंदी पहली बार संयुक्त राष्ट्र में गूंजी। अटल बिहारी वाजपेयी ने पूरी दुनिया के सामने हिंदी में भाषण देकर भारत की सांस्कृतिक आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी।
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उन्होंने कहा—
“मैं उस देश का प्रतिनिधि हूं, जो बुद्ध और गांधी की भूमि है।”
उनका यह भाषण केवल भाषा का नहीं, बल्कि भारत की अस्मिता का उद्घोष था। आज भी यह भाषण सुनने पर गर्व से सीना चौड़ा हो जाता है।
2️⃣ पोखरण परमाणु परीक्षण के बाद राष्ट्र के नाम संबोधन (1998)
जब भारत ने पोखरण-II परमाणु परीक्षण किया, तब पूरी दुनिया की नजरें भारत पर थीं। अंतरराष्ट्रीय दबाव चरम पर था, लेकिन अटल जी का राष्ट्र के नाम संबोधन शांत, संतुलित और आत्मविश्वास से भरा हुआ।
उन्होंने स्पष्ट कहा—
“भारत शांति का पक्षधर है, लेकिन अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं कर सकता।”
यह भाषण भारत के रणनीतिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गया।
3️⃣ लाहौर बस यात्रा और शांति का संदेश (1999)
अटल बिहारी वाजपेयी जब लाहौर बस यात्रा पर पाकिस्तान गए, तब उनका भाषण इतिहास में दर्ज हो गया। उन्होंने मीनार-ए-पाकिस्तान से शांति का संदेश दिया।
उन्होंने कहा—
“दोनों देशों को गरीबी से लड़ना है, युद्ध से नहीं।”
यह भाषण दर्शाता है कि अटल जी की राजनीति नफरत नहीं, संवाद पर आधारित थी।
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4️⃣ संसद में अंतिम भाषण: राजनीति का आदर्श
अपने अंतिम संसदीय भाषण में अटल जी ने जो कहा, वह आज की राजनीति के लिए भी आईना है
“Santa Claus की सच्ची कहानी: असल में कौन थे और क्यों बाँटते हैं तोहफे?”
“सरकारें आएंगी-जाएंगी, पार्टियां बनेंगी-बिगड़ेंगी, लेकिन देश रहना चाहिए।”
यह भाषण सत्ता की नश्वरता और राष्ट्र की सर्वोच्चता का संदेश देता है।
5️⃣ कवि अटल का भाषण: शब्दों में राष्ट्रधर्म
अटल बिहारी वाजपेयी जब कविता पढ़ते थे, तो सभा मंत्रमुग्ध हो जाती थी। उनकी कविता—
“गीत नया गाता हूं…”
सिर्फ साहित्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना की अभिव्यक्ति थी।
उनका यह रूप बताता है कि राजनीति में भी संवेदनशीलता और सौंदर्य संभव है।
अटल जी का सुशासन मॉडल: आज भी प्रासंगिक
अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में—
- स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना
- सर्व शिक्षा अभियान
- ग्राम सड़क योजना
- दूरसंचार क्रांति
जैसी योजनाएं शुरू हुईं, जिनका लाभ आज भी देश उठा रहा है।
आज के भारत में अटल जी की प्रासंगिकता
आज जब राजनीति में भाषा तीखी होती जा रही है, तब अटल जी की मर्यादा, संवाद और सहमति की राजनीति और भी अधिक प्रासंगिक हो जाती है।
वे कहते थे—
“विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन देश एक है।”
युवाओं के लिए अटल बिहारी वाजपेयी की सीख
- राजनीति में शालीनता बनाए रखें
- असहमति में भी सम्मान जरूरी है
- सत्ता नहीं, सेवा प्राथमिक हो
- राष्ट्रहित सर्वोपरि हो
सुशासन दिवस पर क्यों याद किए जाते हैं अटल जी?
क्योंकि—
- उन्होंने लोकतंत्र को मजबूत किया
- संस्थाओं की गरिमा बनाए रखी
- फैसलों में मानवीय दृष्टिकोण रखा
अटल जी का जीवन ही Good Governance का पाठ है।
सोशल मीडिया पर अटल जी: एक विरासत
आज भी अटल बिहारी वाजपेयी के भाषण और कविताएं सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती हैं। युवा पीढ़ी उन्हें नेता नहीं, प्रेरणा के रूप में देखती है।
निष्कर्ष: अटल जी केवल स्मृति नहीं, मार्गदर्शक हैं
सुशासन दिवस हमें याद दिलाता है कि राजनीति केवल सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि जनसेवा का संकल्प है। अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने शब्दों, कर्मों और विचारों से यह सिद्ध कर दिखाया।
उनके ये 5 भाषण आज भी हमें सिखाते हैं कि—
“राजनीति में भी नैतिकता संभव है।”
🔔 डिस्क्लेमर
यह लेख ऐतिहासिक भाषणों, सार्वजनिक स्रोतों और साहित्यिक संदर्भों पर आधारित है। उद्देश्य केवल जानकारी और प्रेरणा देना है।
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