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अंगारकी संकष्टी चतुर्थी 2026: साल की सबसे शक्तिशाली चतुर्थी! जानिए पहली तिथि, शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय समय और पूजा का रहस्य

अंगारकी संकष्टी चतुर्थी 2026: पहली तिथि, शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय समय, पूजा विधि और महत्व

Angarki Sankashti Chaturthi 2026

अंगारकी संकष्टी चतुर्थी 2026 – पहली अंगारकी संकष्टी की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

अंगारकी संकष्टी चतुर्थी 2026 (Angarki Sankashti Chaturthi 2026) साल 2026 की पहली वार्षिक अंगारकी संकष्टी मंगलवार, 6 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। अंगारकी संकष्टी वह विशेष संकष्टी चतुर्थी है जो मंगलवार को पड़ती है और इसे अन्य संकष्टी चतुर्थियों से कहीं अधिक शुभ और प्रभावशाली माना जाता है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है और विशेष रूप से संकटों के दूर होने, बुद्धि, समृद्धि और जीवन में सुख-शांति के लिए किया जाता है।

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अंगारकी संकष्टी चतुर्थी 2026

वर्ष 2026 में संकष्टी चतुर्थी की कुल तिथियाँ और उनमें से अंगारकी संकष्टी के दिन इस प्रकार हैं —
📌 6 जनवरी 2026 – पहली अंगारकी संकष्टी (Tuesday)
📌 5 मई 2026 – दूसरी अंगारकी संकष्टी (Tuesday)
📌 29 सितंबर 2026 – तीसरी अंगारकी संकष्टी (Tuesday)

Angarki Sankashti 2026: Siddhivinayak Temple Darshan, Date, Muhurat


अंगारकी संकष्टी का महत्व

अंगारकी संकष्टी एक विशेष ज्योतिषीय और धार्मिक योग है जिसमें संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को आने पर व्रत का फल दोगुना माना जाता है।
👉 संकष्टी चतुर्थी शब्द का मूल संस्कृत में अर्थ होता है – “संकटों का नाश करने वाली चतुर्थी” यानी एक ऐसा दिन जो जीवन की कठिनाइयों और बाधाओं को दूर करने में मदद करता है।

  • भगवान गणेश को विघ्नहारक, बुद्धि, ज्ञान और समृद्धि का देवता माना जाता है।
  • संकष्टी व्रत का मुख्य उद्देश्य मानसिक, पारिवारिक और आर्थिक बाधाओं को दूर करना है।
  • जब यही व्रत मंगलवार (मंगल दिन) को पड़ता है तो इसे अंगारकी संकष्टी कहते हैं और फल बेहद शुभ मानते हैं। 

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अंगारकी संकष्टी चतुर्थी 2026 – शुभ तिथि और मुहूर्त

तत्वविवरण
तिथि (Start)6 जनवरी 2026 सुबह से
दिनमंगलवार (Mangalar)
वैदिक व्रत अवधिसंकष्टी चतुर्थी तिथि प्रारंभ से चतुर्थी समाप्ति तक
चंद्रोदय (Moonrise)लगभग रात में 09:26 बजे (लगभग) (
व्रत समाप्तिचंद्रोदय के उपरांत पूजा कर व्रत तोड़ा जाता है

नोट: चंद्रोदय का सही समय स्थान (शहर) के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है। अतः स्थान आधारित पंचांग/कैलेंडर से भी चंद्रोदय का समय अवश्य देखें।


पूजा विधि – Step by Step

1. स्नान और शुद्धिकरण

सुबह उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल को स्वच्छ करें और गणेश जी की प्रतिमा या फोटो स्थापित करें।

2. भगवान गणेश की स्थापना और मंत्र उच्चारण

  • गणेश जी का अभिषेक करें (दूध, दही, शहद, जल)
  • लाल वस्त्र, फूलों और दाने-दालें अर्पित करें।
  • गणेश मंत्र उच्चारण जैसे —

“ॐ विघ्नेश्वराय नमः”
“वक्रतुण्ड महाकाय…”
यह मंत्र व्रत को शुभ फल प्रदान करने में सहायक माने जाते हैं।

3. नैवेद्य (प्रसाद) अर्पण

व्रत के समय मोदक, लड्डू तथा फल-फूल अर्पित करें।
मोदक को विशेष रूप से भगवान गणेश का प्रिय प्रसाद माना जाता है।

4. चंद्रोदय दर्शन और व्रत तोड़ना

  • शाम को चंद्रोदय का इंतज़ार करें।
  • चंद्रमा के दर्शन के बाद चंद्रदेव को अर्घ्य देकर व्रत तोड़ा जाता है।
  • अर्घ्य के बाद पूजा का प्रसाद ग्रहण किया जाता है।

अंगारकी संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा

एक बार प्राचीन समय में एक राजा बड़े दुःख में था। उसे जीवन में अनंत बाधाएँ और विघ्नों का सामना करना पड़ रहा था। तब एक मुनि ने उसे कहा — “गणेश जी की विशेष पूजा और विनय से युक्त अंगारकी संकष्टी व्रत करो।”
राजा ने मंगल दिन पर संकष्टी व्रत रखा और गणेश पूजा विधि का पालन किया। पूजा के बाद जब उसने चंद्रोदय पर अर्घ्य दिया, उसके सारे विघ्न दूर हो गए और जीवन में आनंद, शांति तथा समृद्धि लौटी। यही कथा आज अंगारकी संकष्टी व्रत की महिमा बताती है।


अंगारकी संकष्टी चतुर्थी के लाभ

✅ सभी बाधाओं और संकटों का नाश
✅ मनोवांछित फल की प्राप्ति
✅ बुद्धि, सकारात्मकता और शक्ति का विकास
✅ पारिवारिक सुख-शांति
✅ मानसिक तनाव का नाश


पूजा के समय ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें

🔹 व्रत केवल चतुर्थी चतुर्थी तिथि में ही रखना चाहिए।
🔹 चंद्रोदय से पहले व्रत न तोड़े।
🔹 भक्त विशुद्ध मन और श्रद्धा से गणेश मंत्रों का जाप करें।
🔹 पूजा में हल्दी, दुर्वा, मोदक का विशेष महत्व है।


अंगारकी संकष्टी चतुर्थी FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

1. अंगारकी संकष्टी व्रत कब रखा जाता है?

जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को आती है तो उसे अंगारकी संकष्टी कहते हैं। (

2. यह व्रत क्यो विशेष माना जाता है?

क्योंकि मंगलवार का दिन मंगल ग्रह का होता है, जो ऊर्जा, साहस और सकारात्मक प्रभावों को बढ़ाता है। इसी कारण यह व्रत अधिक फलदायी माना जाता है। (

3. क्या बिना व्रत रखे पूजा कर सकते हैं?

हाँ, श्रद्धापूर्वक पूजा और गणेश मंत्र जप बिना व्रत भी किया जा सकता है, लेकिन व्रत के साथ फल अधिक सकारात्मक फल देता है।

4. व्रत कब तोड़ा जाये?

चंद्रोदय के बाद पूजा कर प्रसाद ग्रहण करके व्रत तोड़ा जाता है।

5. क्या रोज़ाना संकष्टी चतुर्थी पर भी यह व्रत होता है?

जी हाँ, हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी संकष्टी चतुर्थी आती है, लेकिन वो अंगारकी तभी कहलाती है जब वो मंगलवार को आती है।

6. व्रत के दौरान क्या खाया-पिया जा सकता है?

उपवास रखने वाले भक्त आमतौर पर फल, दूध, और बिना अनाज वाले व्यंजन ही ग्रहण करते हैं।

7. पूजा में कौन-से मंत्र जपे जाये?

गणेश मंत्र जैसे “ॐ गं गणपतेय नमः” एवं “वक्रतुण्ड महाकाय…” का जाप विशेष शुभ माना जाता है।

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Varsa

वर्षा कोठारी एक उभरती लेखिका है। पत्रकारिता जगत में कई ब्रैंड्स के साथ बतौर फ्रीलांसर काम किया है। अपने लेखन में रूचि के चलते समयधारा के साथ जुड़ी हुई है। वर्षा मुख्य रूप से मनोरंजन, हेल्थ और जरा हटके से संबंधित लेख लिखती है लेकिन साथ-साथ लेखन में प्रयोगात्मक चुनौतियां का सामना करने के लिए भी तत्पर रहती है।

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