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मद्रास हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: ‘पिंजरे का तोता CBI’ को रिहा करो

2013 में कोलफील्ड आवंटन मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई पर टिप्पणी की थी और उसे  "पिंजरे के तोते"(Caged-Parrot-CBI) के रूप में वर्णित किया था।

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नई दिल्ली:केंद्रीय जांच एजेंसी CBI पर मद्रास हाईकोर्ट(Madras-High-Court)ने कड़ी टिप्पणी की है।

मंगलवार को कोर्ट ने कहा है कि सीबीआई पिंजरे में बंद तोता है,उसे रिहा किया जाना (Madras-High-Court-orders-Free-Caged-Parrot-CBI)चाहिए।

कोर्ट ने सीबीआई की स्वायत्ता पर टिप्पणी करते हुए कहा कि CBI केवल संसद को रिपोर्ट करने वाला स्वायत्त निकाय होना चाहिए।

आपको बता दें कि विपक्ष भी अक्सर आरोप लगाता रहता है कि CBI बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के हाथों का पोलिटिकल टूल बन गया है।

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कोर्ट का कहना है कि सीबीआई को CAG की तरह होना चाहिए जो केवल संसद के प्रति जवाबदेह है।

मौजूदा व्यवस्था में बदलाव करने की बात करते हुए 12 प्वाइंट्स के निर्देश में कोर्ट ने कहा, ”यह आदेश ‘पिंजड़े में बंद तोते (CBI)’ को रिहा करने का प्रयास है।

बता दें कि 2013 में कोलफील्ड आवंटन मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई पर टिप्पणी की थी और उसे  “पिंजरे के तोते”(Caged-Parrot-CBI) के रूप में वर्णित किया था।

उस समय विपक्ष में रहने वाली भाजपा ने एजेंसी पर कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा नियंत्रित होने का आरोप लगाया था।

बीते कुछ सालों ने सीबीआई ने विपक्ष के काफी नेताओं के खिलाफ केस दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई है, जिसे लेकर भी उस पर भाजपा के नियंत्रण का आरोप लगता रहता है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तो स्पष्ट रूप कहती रही हैं कि ये पीएम द्वारा कंट्रोल की जाने वाली ‘साजिश ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन’ है।

कोर्ट ने कहा की एजेंसी की स्वायत्तता तभी सुनिश्चित होगी, जब उसे वैधानिक दर्जा दिया जाएगा. कोर्ट ने कहा कि भारत सरकार को सीबीआई को अधिक अधिकार और शक्तियां देने के लिए एक अलग अधिनियम बनाने के लिए विचार करके निर्णय का निर्देश दिया जाता है, ताकि सीबीआई केंद्र के प्रशासनिक नियंत्रण के बिना कार्यात्मक स्वायत्तता के साथ अपना काम कर सके।

 

 

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