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2025 में उत्तर भारत की राजनीति: सत्ता, चुनावी आंकड़े और बदला जनादेश

“2025 में उत्तर भारत की राजनीतिक हलचल: सत्ता परिवर्तनों, चुनावी परिणामों, जनादेश की वजहों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत विश्लेषण”

2025-Uttar-Bharat-Politics

2025 में उत्तर भारत की राजनीति: सत्ता परिवर्तन, चुनावी आंकड़े और बदले जनादेश की पूरी परतें


साल 2025 उत्तर भारत की राजनीति के लिए केवल एक चुनावी वर्ष नहीं था, बल्कि यह वह दौर साबित हुआ जब शहरी मतदाता, गठबंधन गणित, स्थानीय असंतोष और संगठनात्मक ताकत—सभी एक साथ सामने आए। उत्तर भारत ने यह साफ कर दिया कि आने वाले राष्ट्रीय चुनावों की दिशा यहीं से तय होगी।

इस PART–1 में हम उत्तर भारत के राज्यों और क्षेत्रों को एक-एक कर, पूरे चुनावी और राजनीतिक डेटा के साथ समझेंगे:

  • कहाँ सत्ता बदली
  • कहाँ सत्ता बची लेकिन चेतावनी मिली
  • कहाँ चुनाव नहीं हुए, फिर भी राजनीतिक ज़मीन हिली

आज की 10 बड़ी खबरें: देश-विदेश की हर अहम अपडेट

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📊 1) दिल्ली: 27 साल बाद सत्ता परिवर्तन — उत्तर भारत का सबसे बड़ा संकेत

🗳️ चुनावी तथ्य

  • राज्य: दिल्ली
  • विधानसभा सीटें: 70
  • चुनाव तिथि: 5 फरवरी 2025
  • बहुमत का आँकड़ा: 36
  • मतदान प्रतिशत: ~60.5%

🧮 परिणाम (Before vs After)

पार्टी2020 सीटें2025 सीटेंसीट बदलाव
AAP6222–40
BJP848+40
INC000

👉 सरकार बनी: BJP
👉 मुख्यमंत्री: रेखा गुप्ता

📉 वोट शेयर और राजनीतिक अर्थ

  • AAP का वोट शेयर लगभग 10 प्रतिशत अंक गिरा
  • BJP का वोट शेयर पहली बार 47% के आसपास पहुँचा
  • सीट conversion ratio BJP के पक्ष में असाधारण रहा

🔍 जनादेश क्यों बदला?

  1. Urban fatigue: 10 साल की सरकार के बाद शहरी मतदाता में थकान
  2. Leadership perception: नेतृत्व को लेकर भरोसे में कमी
  3. Middle-class swing: व्यापारियों और salaried वर्ग का झुकाव बदला
  4. Centre–State friction: निरंतर टकराव से governance narrative कमजोर हुआ l 

Politics Flashback 2025: वो 5 फैसले जिन्होंने भारत की राजनीति की दिशा बदल दी

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राष्ट्रीय संकेत:
उत्तर भारत के शहरी राज्य अब भावनात्मक राजनीति से ज़्यादा performance politics पर वोट कर रहे हैं।

2025-Uttar-Bharat-Politics


📊 2) बिहार: सत्ता बची, लेकिन राजनीति पूरी तरह पुनर्गठित

🗳️ चुनावी तथ्य

  • राज्य: बिहार
  • विधानसभा सीटें: 243
  • चुनाव अवधि: 6–11 नवंबर 2025
  • बहुमत: 122
  • मतदान प्रतिशत: ~66.9%
  • महिला मतदान: ~71%

🧮 परिणाम

गठबंधनसीटें
NDA (BJP+JDU)202
महागठबंधन (RJD+INC)35
अन्य6

👉 मुख्यमंत्री: नीतीश कुमार (NDA)

📊 आँकड़ों से क्या साफ होता है?

  • महागठबंधन का वोट शेयर NDA से बहुत पीछे नहीं
  • लेकिन:
    • उम्मीदवार चयन
    • गठबंधन तालमेल
    • booth-level संगठन

पूरी तरह NDA के पक्ष में रहा

India Politics 2025: संसद की राजनीति, तथ्य-आधारित डेटा और गहन विश्लेषण

🔍 राजनीतिक निष्कर्ष

  • बिहार में यह चुनाव anti-incumbency नहीं, बल्कि
    strategy-versus-sentiment का उदाहरण बना
  • NDA की सीट efficiency ऐतिहासिक रही

उत्तर भारत का सबक:
अब केवल जनाधार नहीं, seat conversion mathematics चुनाव जिताती है।


📊 3) उत्तराखंड: सत्ता स्थिर, पर स्थानीय राजनीति में दरार

🗳️ नगर निकाय चुनाव (जनवरी 2025)

  • देहरादून नगर निगम:
    • BJP: 63 / 100
    • INC: 24
    • निर्दलीय: 13
  • श्रीनगर नगर निगम (नया):
    • निर्दलीय: 18
    • BJP: 16
    • INC: 6

📉 विश्लेषण

  • शहरी क्षेत्रों में BJP की पकड़
  • पहाड़ी क्षेत्रों में:
    • स्थानीय मुद्दे
    • निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रभाव

राजनीतिक संकेत:
उत्तराखंड में विधानसभा सत्ता सुरक्षित है, लेकिन
local leadership dissatisfaction बढ़ रहा है।


📊 4) छत्तीसगढ़: शहरी और अर्ध-शहरी झुकाव में बड़ा बदलाव

🗳️ स्थानीय निकाय चुनाव (फरवरी 2025)

  • कुल निकाय: 173
  • BJP: 126
  • INC: 30
  • अन्य: 17

📍 प्रमुख नगर

शहरBJPINC
रायपुर60/7010
बिलासपुर49/7018

🔍 राजनीतिक अर्थ

  • शहरी और semi-urban क्षेत्रों में INC कमजोर
  • BJP का cadre-based संगठन हावी

उत्तर भारत का विस्तार संकेत:
शहरी निकाय परिणाम आने वाले विधानसभा चुनावों का early indicator बनते हैं।


📊 5) उत्तर प्रदेश: चुनाव नहीं, लेकिन राजनीतिक ज़मीन हिलती रही

🗳️ 2025 में क्या नहीं हुआ?

  • कोई विधानसभा चुनाव नहीं
  • कोई लोकसभा चुनाव नहीं

🧠 फिर भी क्यों अहम?

  • उपचुनावों में:
    • ruling party को कुछ सीटों पर नुकसान
  • विपक्ष ने:
    • जातीय जनगणना
    • कानून-व्यवस्था
    • रोजगार

को लेकर दबाव बनाया

India Politics Flashback 2025: किन राज्यों में चुनाव हुए और कौन-सी सरकार बनी? | राज्य-वार डेटा रिपोर्ट

📊 राजनीतिक संकेत

  • BJP की सत्ता सुरक्षित
  • लेकिन:
    • urban youth
    • small traders
    • aspirational districts

में soft dissatisfaction 2025-Uttar-Bharat-Politics

UP उत्तर भारत की सबसे बड़ी चेतावनी:
अगर संगठन ढीला पड़ा, तो बड़ा जनाधार भी खतरे में पड़ सकता है।


📊 6) हरियाणा और हिमाचल: स्थिर सरकारें, अस्थिर नैरेटिव

🔍 2025 का ट्रेंड

  • कोई चुनाव नहीं
  • लेकिन:
    • किसान मुद्दे
    • MSP
    • केंद्र-राज्य समन्वय

लगातार चर्चा में रहे

राजनीतिक संदेश:
उत्तर भारत में अब issue-based churn चुनाव से पहले ही शुरू हो जाता है।


📊 7) उत्तर भारत का संयुक्त राजनीतिक सारांश (2025)

श्रेणीस्थिति
पूर्ण सत्ता परिवर्तनदिल्ली
निर्णायक सत्ता पुष्टिबिहार
स्थानीय सत्ता झुकावछत्तीसगढ़, उत्तराखंड
चुनाव बिना churnउत्तर प्रदेश, हरियाणा
शहरी राजनीति का प्रभावउच्च

🧠 उत्तर भारत में जनादेश क्यों बदल रहा है?

  1. Urban voter maturity
  2. Performance vs identity shift
  3. Seat conversion politics
  4. Local leadership importance
  5. Organization > charisma

उत्तर भारत ने 2025 में यह साफ कर दिया कि:

“अब चुनाव नारों से नहीं, गणित से जीते जाएंगे।”

दिल्ली में सत्ता परिवर्तन, बिहार में रणनीतिक जीत, और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बढ़ता असंतोष —
ये सभी संकेत हैं कि आगामी राष्ट्रीय राजनीति की नींव उत्तर भारत में दोबारा लिखी जा रही है


2025 में पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत की राजनीति: क्षेत्रीय दल, सत्ता संतुलन और बदले जनादेश का पूरा लेखा-जोखा


साल 2025 में अगर उत्तर भारत ने राष्ट्रीय राजनीति को दिशा दी, तो पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत ने यह साफ कर दिया कि भारत की राजनीति अब केवल दो-तीन बड़े राज्यों तक सीमित नहीं रही। यह क्षेत्र क्षेत्रीय दलों, स्थानीय पहचान, गठबंधन राजनीति और केंद्र-राज्य संबंधों के लिहाज़ से सबसे ज़्यादा संवेदनशील और निर्णायक बन चुका है।

  • पूर्व भारत (पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, बिहार-पूर्वी प्रभाव)
  • उत्तर-पूर्व भारत (असम, Bodoland, त्रिपुरा, मणिपुर, मेघालय, नागालैंड)
  • कहाँ चुनाव नहीं हुए, फिर भी सत्ता का संतुलन बदला
  • और क्यों यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में king-maker zone बन सकता है

📊 1) पश्चिम बंगाल: सत्ता स्थिर, लेकिन राजनीतिक तापमान चरम पर

🗳️ 2025 में क्या हुआ?

  • कोई विधानसभा चुनाव नहीं
  • लेकिन:
    • उपचुनाव
    • पंचायत और स्थानीय निकाय राजनीति
    • केंद्र-राज्य टकराव

पूरे साल चर्चा में रहे।

📊 उपचुनाव और संकेत

  • 2025 में हुए उपचुनावों में:
    • TMC ने अधिकांश सीटें बचाईं
    • BJP को सीमित सफलता
  • वोट शेयर में:
    • शहरी इलाकों में BJP स्थिर
    • ग्रामीण और अल्पसंख्यक क्षेत्रों में TMC की पकड़

🔍 राजनीतिक विश्लेषण

  • ममता बनर्जी सरकार की सत्ता सुरक्षित
  • लेकिन:
    • कानून-व्यवस्था
    • केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई
    • केंद्र-राज्य वित्तीय विवाद

ने राजनीतिक माहौल गरम रखा।

संदेश:
पश्चिम बंगाल में सत्ता नहीं बदली, पर राजनीति स्थिर नहीं है


📊 2) ओडिशा: चुनाव नहीं, लेकिन राजनीतिक ध्रुवीकरण तेज़

🗳️ स्थिति (2025)

  • कोई विधानसभा चुनाव नहीं
  • सत्तारूढ़ दल: BJD
  • मुख्य चुनौती: BJP

📊 डेटा संकेत

  • शहरी क्षेत्रों में BJP का विस्तार
  • ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में BJD की पकड़
  • उपचुनावों में:
    • सीटें बचीं
    • लेकिन margin घटा

🔍 राजनीतिक अर्थ

  • नवीन पटनायक की व्यक्तिगत स्वीकार्यता बनी हुई
  • लेकिन:
    • संगठनात्मक उत्तराधिकार
    • नेतृत्व के बाद का सवाल

राजनीतिक बहस का केंद्र रहा। 2025-Uttar-Bharat-Politics

संकेत:
ओडिशा में सत्ता 2025 में नहीं बदली, लेकिन भविष्य की राजनीति का groundwork तैयार हुआ।


📊 3) झारखंड: गठबंधन सरकार और बढ़ती अस्थिरता

🗳️ स्थिति (2025)

  • गठबंधन सरकार
  • कोई पूर्ण विधानसभा चुनाव नहीं

📊 राजनीतिक दबाव

  • गठबंधन दलों में:
    • नेतृत्व विवाद
    • नीति मतभेद
  • आदिवासी क्षेत्रों में:
    • भूमि
    • रोजगार
    • खनन

को लेकर असंतोष।

🔍 विश्लेषण

  • सत्ता बची
  • लेकिन गठबंधन की राजनीतिक cohesion कमजोर हुई

संदेश:
झारखंड 2025 में politically fragile state के रूप में उभरा।


📊 4) असम: Bodoland चुनाव ने पूरा समीकरण बदल दिया

🗳️ Bodoland Territorial Council (BTC) चुनाव

  • कुल सीटें: 40
  • परिणाम:
    • BPF: 28
    • UPPL: 8
    • BJP: 5

📊 Before vs After

दलपिछली स्थिति2025
BPFकमजोरसशक्त वापसी
BJPप्रभावीसीमित
UPPLसत्ता मेंपिछड़ा

🔍 राजनीतिक असर

  • क्षेत्रीय दल की जबरदस्त वापसी
  • असम सरकार के लिए राजनीतिक चेतावनी
  • उत्तर-पूर्व में:
    • स्थानीय पहचान
    • स्वायत्तता

के मुद्दे फिर मजबूत।

संदेश:
उत्तर-पूर्व में राष्ट्रीय दल तभी टिकेंगे जब क्षेत्रीय भावनाओं को समझेंगे


📊 5) त्रिपुरा: सत्ता सुरक्षित, लेकिन विपक्ष मजबूत

🗳️ स्थिति

  • BJP सरकार
  • 2025 में चुनाव नहीं

📊 डेटा संकेत

  • CPI(M) और कांग्रेस का संयुक्त प्रभाव
  • शहरी क्षेत्रों में विपक्ष सक्रिय
  • tribal इलाकों में:
    • रोजगार
    • भूमि अधिकार

को लेकर सवाल।

राजनीतिक निष्कर्ष:
त्रिपुरा में सत्ता स्थिर है, पर राजनीतिक मुकाबला जीवित है।


📊 6) मणिपुर: शांति, सुरक्षा और राजनीति का त्रिकोण

🗳️ 2025 का परिदृश्य

  • जातीय और सामाजिक तनाव का असर
  • राजनीतिक निर्णयों पर सुरक्षा का प्रभाव

📊 राजनीतिक दबाव

  • केंद्र से हस्तक्षेप की मांग
  • राज्य सरकार पर:
    • कानून-व्यवस्था
    • पुनर्वास

का दबाव।

संदेश:
मणिपुर में 2025 की राजनीति चुनाव से ज़्यादा शासन और शांति पर केंद्रित रही।


📊 7) मेघालय और नागालैंड: क्षेत्रीय संतुलन की राजनीति

🗳️ स्थिति

  • क्षेत्रीय गठबंधन सरकारें
  • 2025 में चुनाव नहीं

📊 संकेत

  • क्षेत्रीय दलों की bargaining power
  • केंद्र के साथ pragmatic रिश्ते

राजनीतिक अर्थ:
उत्तर-पूर्व में स्थिरता का मतलब सहमति-आधारित राजनीति है।


📊 8) पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत का संयुक्त राजनीतिक सारांश

राज्य/क्षेत्र2025 स्थितिप्रमुख संकेत
पश्चिम बंगालसत्ता स्थिरउच्च राजनीतिक तनाव
ओडिशासत्ता स्थिरभविष्य की तैयारी
झारखंडगठबंधनअस्थिरता
असम (BTC)सत्ता बदलीक्षेत्रीय दल मजबूत
त्रिपुरासत्ता स्थिरविपक्ष सक्रिय
मणिपुरसंवेदनशीलशासन प्राथमिक
मेघालय/नागालैंडस्थिरसहमति राजनीति

🧠 पूर्व और उत्तर-पूर्व में जनादेश के बदलते कारण

  1. क्षेत्रीय पहचान की राजनीति
  2. केंद्र-राज्य संबंधों का असर
  3. स्थानीय मुद्दे > राष्ट्रीय नैरेटिव
  4. गठबंधन राजनीति की मजबूरी
  5. सुरक्षा और विकास का संतुलन

2025-Uttar-Bharat-Politics


2025 ने यह साबित किया कि पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत अब केवल “सीट देने वाले राज्य” नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के संतुलनकर्ता बन चुके हैं।

  • यहाँ सत्ता बच सकती है, पर समर्थन हिलता रहता है
  • यहाँ क्षेत्रीय दलों को नज़रअंदाज़ करना राजनीतिक भूल है
  • और यहाँ की राजनीति आने वाले वर्षों में केंद्र की सत्ता गणित तय करेगी

भारत की राजनीति बहु-केंद्रित हो चुकी है

2025 में दक्षिण भारत की राजनीति और उसका राष्ट्रीय असर: सत्ता, असंतोष और 2026–27 की दिश


साल 2025 में दक्षिण भारत ऐसा क्षेत्र रहा जहाँ ज्यादातर राज्यों में चुनाव नहीं हुए, फिर भी राजनीतिक हलचल, गठबंधन तनाव और केंद्र-राज्य टकराव अपने चरम पर रहे। यही कारण है कि राष्ट्रीय राजनीति को समझने के लिए दक्षिण भारत को नज़रअंदाज़ करना सबसे बड़ी रणनीतिक भूल होगी।

इस PART–3 में हम देखेंगे:

  • दक्षिण भारत के प्रमुख राज्यों में 2025 की राजनीतिक स्थिति
  • चुनाव न होने के बावजूद बदला जनमत
  • केंद्र-राज्य संबंधों का असर
  • और अंत में, पूरे भारत पर इसका राष्ट्रीय प्रभाव

📊 1) कर्नाटक: सत्ता स्थिर, लेकिन शासन पर सीधा दबाव

🗳️ स्थिति (2025)

  • सत्तारूढ़ दल: कांग्रेस
  • विधानसभा चुनाव: नहीं हुए
  • सरकार का दूसरा वर्ष

📊 2025 के राजनीतिक संकेत

  • बजट और गारंटी योजनाओं पर दबाव
  • शहरी क्षेत्रों में:
    • टैक्स
    • इंफ्रास्ट्रक्चर
    • रोजगार

को लेकर असंतोष

🔍 डेटा आधारित विश्लेषण

  • शहरी उपचुनावों में:
    • BJP का वोट शेयर स्थिर
    • कांग्रेस की सीटें बचीं, लेकिन margin घटा

राजनीतिक संदेश:
कर्नाटक में सत्ता सुरक्षित है, पर performance scrutiny शुरू हो चुका है।


📊 2) तेलंगाना: नई सरकार और शुरुआती जनादेश की परीक्षा

🗳️ स्थिति (2025)

  • सत्तारूढ़ दल: कांग्रेस
  • नई सरकार का पहला पूरा वर्ष

📊 2025 के प्रमुख मुद्दे

  • किसान ऋण माफी
  • सरकारी नौकरियाँ
  • हैदराबाद शहरी विकास
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🔍 राजनीतिक संकेत

  • ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस को शुरुआती समर्थन
  • शहरी मध्यम वर्ग में:
    • अपेक्षाएँ अधिक
    • धैर्य कम

संदेश:
तेलंगाना में 2025 honeymoon period से reality check का साल रहा।


📊 3) तमिलनाडु: सत्ता स्थिर, केंद्र से टकराव जारी

🗳️ स्थिति

  • सत्तारूढ़ दल: DMK
  • कोई विधानसभा चुनाव नहीं

📊 2025 की राजनीति

  • भाषा नीति
  • NEET
  • वित्तीय अधिकार

पर केंद्र-राज्य संघर्ष

🔍 विश्लेषण

  • DMK ने:
    • संघीय ढांचे को मुद्दा बनाया
    • दक्षिणी राज्यों की आवाज़ को राष्ट्रीय मंच दिया

राजनीतिक संकेत:
तमिलनाडु में चुनाव नहीं, लेकिन राजनीतिक नैरेटिव राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी रहा।


📊 4) केरल: विपक्षी राज्य, लेकिन राष्ट्रीय विमर्श में सक्रिय

🗳️ स्थिति

  • सत्तारूढ़ दल: LDF (CPI(M))
  • 2025 में चुनाव नहीं

📊 मुद्दे

  • वित्तीय संकट
  • केंद्र से अनुदान विवाद
  • कल्याण योजनाओं पर दबाव

🔍 राजनीतिक अर्थ

  • केरल सरकार ने:
    • संघीय अधिकारों
    • राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता

को लेकर बहस को तेज़ किया

संदेश:
केरल राष्ट्रीय राजनीति में वैचारिक विपक्ष की भूमिका निभाता रहा।

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📊 5) आंध्र प्रदेश: सत्ता परिवर्तन के बाद पुनर्गठन

🗳️ स्थिति (2025)

  • नई सरकार
  • चुनाव के बाद पहला पूर्ण वर्ष

📊 राजनीतिक संकेत

  • प्रशासनिक पुनर्गठन
  • राजधानी और निवेश नीति
  • केंद्र से विशेष सहायता की मांग

राजनीतिक अर्थ:
आंध्र प्रदेश में 2025 reset year रहा, जहाँ सरकार को जनादेश को स्थिर करना था।


📊 6) दक्षिण भारत का संयुक्त राजनीतिक ट्रेंड (2025)

राज्यचुनावसत्ता स्थितिप्रमुख संकेत
कर्नाटकनहींकांग्रेसप्रदर्शन पर दबाव
तेलंगानानहींकांग्रेसअपेक्षाएँ ऊँची
तमिलनाडुनहींDMKसंघीय टकराव
केरलनहींLDFवैचारिक विपक्ष
आंध्र प्रदेशनहींनई सरकारपुनर्गठन

📊 7) राज्यों की राजनीति का राष्ट्रीय प्रभाव (2025)

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल —
राज्यों में जो हुआ, उसने राष्ट्रीय राजनीति को कैसे बदला?

🔹 1. गठबंधन राजनीति मजबूत हुई

  • राज्यों में क्षेत्रीय दलों की bargaining power बढ़ी
  • केंद्र को:
    • सहयोग
    • समन्वय

पर ज़्यादा निर्भर होना पड़ा

🔹 2. संघीय ढांचे पर बहस तेज़

  • दक्षिण + पूर्वी राज्यों ने:
    • वित्त
    • भाषा
    • नीति

पर केंद्र से टकराव बढ़ाया

🔹 3. शहरी मतदाता निर्णायक बना

  • दिल्ली जैसे उदाहरण ने दिखाया कि:
    • शहरी वोटर सत्ता बदल सकता है
    • performance politics हावी है

🔹 4. विपक्ष की रणनीति बदली

  • राज्यों में:
    • मुद्दा आधारित राजनीति
    • संगठन पर ज़ोर

बढ़ा


📊 8) 2025 से 2026–27 की राजनीति के लिए संकेत

🔮 आने वाले चुनावों के लिए clear signals

  1. राज्य चुनाव = राष्ट्रीय जनादेश का ट्रायल रन
  2. गठबंधन गणित निर्णायक होगा
  3. केवल राष्ट्रीय चेहरे काफी नहीं
  4. स्थानीय नेतृत्व और डेटा-आधारित रणनीति ज़रूरी:

“भारत की राजनीति अब एक-केंद्रित नहीं रही।
सत्ता दिल्ली में बनती है, लेकिन दिशा राज्यों से तय होती है।”

  • उत्तर भारत ने सत्ता बदली
  • पूर्व और उत्तर-पूर्व ने संतुलन बदला
  • दक्षिण भारत ने नैरेटिव और संघीय बहस तय की

यह केवल 2025 का फ्लैशबैक नहीं, बल्कि आने वाले दशक की राजनीतिक पटकथा है।

2025-Uttar-Bharat-Politics


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