शायरी : नफरतों में क्या रखा हैं .., मोहब्बत से जीना सीखो..,

(1) टुटा हुआ विश्वास
और छूटा हुआ बचपन,
जिंदगी में कभी दुबारा वापस नहीं मिलता !!

(2)” नफरतों में क्या रखा हैं ..,
मोहब्बत से जीना सीखो..,
क्योकि
ये दुनियाँ न तो हमारा घर हैं …
और …
न ही आप का ठिकाना ..,
याद रहे ! दूसरा मौका सिर्फ कहानियाँ देती हैं , जिन्दगी नहीं …

(3) रखा करो नजदीकियां, ज़िन्दगी का कुछ भरोसा नहीं…
फिर मत कहना चले भी गए और बताया भी नहीं. . . !

बहुत ग़जब का नज़ारा है इस अजीबसी दुनिया का,
लोग सबकुछ बटोरने में लगे हैं खाली हाथ जाने के लिये..!

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