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Thursday thoughts:“मैं शांति चाहता हूं, में ‘मैं’ अहंकार है, ‘चाहता हूँ’ इच्छा है,

अगर आप अपने अहंकार और इच्छा को दूर कर लेते है तभी आप शांति को प्राप्त करते है।” – साईं बाबा

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मैं शांति चाहता हूं, में ‘मैं’ अहंकार है, ‘चाहता हूँ’ इच्छा है,

अगर आप अपने अहंकार और इच्छा को दूर कर लेते है

तभी आप शांति को प्राप्त करते है।” – साईं बाबा

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

“अगर आप प्रतिस्पर्धा और विवादों से बचते हैं,

तब ईश्वर आपकी रक्षा करता है।” – साईं बाबा

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

“अगर तुम धनवान हो तो उस वृक्ष की भांति कृपालु बनो,

जो अपने ऊपर फल लगते हैं ही झुक जाता है।” – साईं बाबा

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

“सभी धर्मों का सार एक है। समर्पण हर किसी का मुख्य कर्तव्य है।

समर्पण का अर्थ है- एकता की भावना, मैं और परमेश्वर एक हैं।

क्यों? इसका कारण यह है कि जो तुम में मौजूद है वह मुझमें मौजूद है।” – साईं बाबा

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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Dropadi Kanojiya

द्रोपदी कनौजिया पेशे से टीचर रही है लेकिन अपने लेखन में रुचि के चलते समयधारा के साथ शुरू से ही जुड़ी है। शांत,सौम्य स्वभाव की द्रोपदी कनौजिया की मुख्य रूचि दार्शनिक,धार्मिक लेखन की ओर ज्यादा है।

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