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Wednesday Thoughts: स्वार्थ साधकर भलाई नहीं होती,दम्भ में पुण्य की कमाई नहीं होती

...यदि दिखावे के लिए हो तुम सबके, किसी नज़र से यह अच्छाई नहीं होती।

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स्वार्थ साधकर भलाई नहीं होती,

दम्भ में पुण्य की कमाई नहीं होती

यदि दिखावे के लिए हो तुम सबके,

किसी नज़र से यह अच्छाई नहीं होती।

 

 

अच्छे पथ पर चलते हो तो, बाधाओं से डरना क्या

खाली हाथ आए और खाली है जाना, फिर ख़ज़ानों को यूं भरना क्या ?

 

 

गलत मंशा से किया कोई काम कभी फलता नहीं,

बोकर पेड़ बबूल के फल सरस आम का मिलता नहीं।

 

 

दम्भ, घमण्ड, द्वेष, क्रोध और अभिमान,

असत्य वचन और जीवन में अज्ञान

कहते हैं प्रभु श्रीकृष्ण-अर्जुन से,

ये सब आसुरी प्रवृत्ति की हैं पहचान।

 

 

 

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Dropadi Kanojiya

द्रोपदी कनौजिया पेशे से टीचर रही है लेकिन अपने लेखन में रुचि के चलते समयधारा के साथ शुरू से ही जुड़ी है। शांत,सौम्य स्वभाव की द्रोपदी कनौजिया की मुख्य रूचि दार्शनिक,धार्मिक लेखन की ओर ज्यादा है।

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